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नारनौल जिले में पांच साल में दोगुने हुए हाइपरटेंशन के मरीज, डायबिटीज के मामलों में भी बढ़ोतरी

नारनौल। जिले में हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या पांच साल में दोगुनी हो गई है। वर्ष 2020-21 में 5287 मरीज थे, जो 2025-26 तक बढ़कर 11890 हो गए हैं। डायबिटीज के मरीजों की संख्या में भी हर साल बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। यह आंकड़े नागरिक अस्पताल के एनसीडी से लिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या में 125 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है। 2020-21 में 5287 मरीज दर्ज किए गए थे, जो 2025-26 में 11890 तक पहुंच गए। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में जुलाई तक 2665 नए मरीज उपचार के लिए आ चुके हैं। इसी तरह, डायबिटीज के मरीज भी 2020-21 के 4556 से बढ़कर 2025-26 में 6186 हो गए। जुलाई 2026-27 तक 2096 नए मरीज सामने आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अनियमित खानपान और खराब दिनचर्या इन बीमारियों के प्रमुख कारण हैं। तनाव और आधुनिक जीवनशैली भी इसमें योगदान दे रही है। मनोरोग विशेषज्ञों के पास प्रतिदिन 15 से 20 मरीज पहुंच रहे हैं। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ते दबाव का संकेत है। युवाओं में बढ़ रहा उच्च रक्तचाप: पहले उच्च रक्तचाप की समस्या 30 साल से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी। अब 20 से 25 साल के युवाओं में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, बढ़ती उम्र, मोटापा और नशे का सेवन इसके प्रमुख कारण हैं। आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी और दफ्तर का बढ़ता काम युवाओं में रक्तचाप बढ़ा रहा है। समय पर जांच और उपचार आवश्यक: समय पर जांच और उपचार आवश्यक जी मिचलाना, उल्टी आना, चक्कर आना और सिर में दर्द उच्च रक्तचाप के प्रमुख लक्षण हैं। चिकित्सकों का कहना है कि 20 से 35 साल के कई युवा जानकारी के अभाव में जांच नहीं करवाते। समय पर उपचार न मिलने से ब्रेन हेमरेज और हार्ट अटैक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ब्रेन हेमरेज की स्थिति में मरीज के कोमा में जाने का खतरा भी रहता है। केस नंबर -1 एक महिला ने एक महीने के भीतर सड़क हादसे में अपने 15 वर्षीय बेटे और फिर अपने भाई को खो दिया। लगातार रोने और रातभर जागने से वह गहरे तनाव में चली गई। जांच में वह उच्च रक्तचाप से ग्रसित मिली। समय पर इलाज मिलने से अब उसकी हालत में सुधार हो रहा है। केस नंबर -2 एक अन्य मामले में 30 वर्षीय युवक आर्थिक तंगी के कारण तनावग्रस्त हो गया। इससे उसके दैनिक कामकाज और व्यवहार पर असर पड़ने लगा। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती किया गया तो जांच में उच्च रक्तचाप की पुष्टि हुई। वर्जन : तनाव से ग्रसित व्यक्ति में उच्च रक्तचाप की समस्या सबसे अधिक बनी रहती है। सामान्य तौर पर 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को नियमित अंतराल पर रक्तचाप की जांच करवानी चाहिए। जिससे समय पर उच्च रक्तचाप का पता चल सकें और उपचार किया जा सकें। डॉ. राहुल गुप्ता, मनोरोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, नारनौल।

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