नारनौल। जिले में महज 15 दिन पहले दस्तक देने वाला लंपी स्किन रोग अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि इस रोग ने 15 लीटर दूध देने वाली एक गाय को मौत की नींद सुला दिया। इस तरह जिले में इस रोग से गाय की मौत का यह पहला मामला सामने आया है। जिसके बाद से पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया है और विभाग पूरी मुस्तैदी से गायों के टीकाकरण में जुट गया है। हालांकि पूर्व में सोनीपत व हिसार लैब में भेजे गए 133 सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल जिले में 97 मामले लंपी के संभावित माने जा रहे हैं। वहीं उपचार के बाद 32 पशु पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। संक्रमण को पूरी तरह से खत्म होने में अभी समय लग सकता है और इस लंपी संक्रमण के चलते 2 अगस्त की रात करीब 8 बजे गांव हुडीना के पशुपालक जिले सिंह की गाय की मृत्यु हो गई थी। यही नहीं बल्कि जिले सिंह की दूसरी गाय भी संक्रमण के चलते लंपी रोग को शिकार हो चुकी है। तीन ओर से राजस्थान से सटा होने के कारण जिला महेंद्रगढ़ में पड़ोसी प्रदेश से भी लंपी के मामले सामने आने की संभावना जताई जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में पशुओं की खरीद फरोख्त के चलते भी संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ रहा है। इस संबंध में विभाग ने भी सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है, ताकि इसके प्रभाव को कम किया जा सके। 60 हजार पशुओं का किया गया टीकाकरण: एक सितंबर तक जिले में लंपी रोग से बचाव के लिए 60 हजार पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके बाद भी मामले सामने आने से यह तय है कि टीकाकरण के साथ संक्रमित पशुओं की समय रहते पहचान कर उन्हें स्वस्थ पशु से अलग रखना जरूरी है।