अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे निकाय के सफाई कर्मचारियों में रोष गहराता ही जा रहा है। वीरवार को वे उस समय भड़क उठे जब बाजारों में अवरूद्व हुए नालों से दुकानदारों द्वारा कचरा निकलवा दिया। सूचना मिलते ही पहुंचे सफाई कर्मियों ने न केवल दुकानदारों द्वारा उठवाया जा रहा कचरा रूकवा दिया बल्कि निकाला कचरा वापस नालों में ही बहा दिया। हंगामे के बीच चेतावनी दी कि नालों की सफाई की तो दुकानदारों को भी उनके विरोध का सामना करना पड़ेगा। उधर दमकल विभाग की ओर से की गई सख्ती का भी कोई असर दिखाई नहीं दिया। सुबह नौ बजे तक ड्यूटी पर लौटने को नोटिस दिया गया था लेकिन दोपहर तक भी कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा और सफाई कर्मचारियों के धरना स्थल पर ही नारेबाजी करते रहे। उधर घर-घर से कचरा उठान के लिए तीन दिन चलाए गए टिप्परों के वीरवार को भी पहिये थमे रहे। अधिकतर चालक व सहायक धरने में शामिल रहे। सफाई कर्मचारी थानेसर इकाई प्रधान सुनील लोहाट की अगुवाई में बाजार में कचरा उठान के विरोध के बाद वापस नप कार्यालय पर धरने पर लौट गए तो वहीं निगरानी के लिए टीमें भी बनाई। हालांकि ये टीमें दुकानदारों व आसपास के लोगों से अपने समर्थन में आने की अपील भी करते रहे लेकिन कचरा न उठाने देने के चलते बाजार के हालात बदतर होने लगे हैं। वहीं कर्मचारियों ने ऐलान किया कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती तब तक वे न खुद कचरा उठाएंग और न उठाने देंगे। कन्या स्कूल के आगे कचरे का अंबार, मुंह ढांप कर निकलते हैं लोग शहर में जहां जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं वहीं बाजार में पुरानी सब्जी मंडी के समीप स्थित राजकीय कन्या विद्यालय के गेट के समक्ष ही कचरे का अंबार लगा हुआ है। जिसमें से हर समय दुर्गंध व धुआं उठता रहता है। यहां से निकलने वाले लोग मुंह ढांपकर ही जाते हैं जबकि दुर्गंध से आसपास के लोगों के साथ-साथ स्कूल की छात्राओं व स्टाफ को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बिगड़ चुके बाजार के हालात शहर में बाजार के हालात पूरी तरह से बिगड़ चुके हैं। नाले अवरूद्व है तो बाजार की सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है। पिछले कईं दिनों से बने इन हालात का कारोबार पर भी असर पड़ रहा है तो दुकानदारों में बीमारी फैलने की भी आशंका बनी हुई है।