गांव पहाड़ीपुर की रहने वाली डॉ.अंकिता सिवाच ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। डॉ.अंकिता सिवाच ने यूपीएससी परीक्षा में 442वीं रैंक हासिल कर अपनी कड़ी मेहनत और लगन का परिचय दिया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव और जिले में खुशी का माहौल है। जैसे ही उनके यूपीएससी परीक्षा में चयन की खबर सामने आई, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। रिश्तेदारों और परिचितों ने घर पहुंचकर उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस खुशी के मौके पर परिवार के सदस्यों ने मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। डॉ. अंकिता सिवाच ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रोहतक के मॉडल स्कूल से प्राप्त की, जहां से उन्होंने दसवीं और बारहवीं कक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने खानपुर स्थित मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को सीमित नहीं रखा और प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखा। इसी लक्ष्य को लेकर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की और दूसरे प्रयास में ही सफलता हासिल कर ली। अंकिता सिवाच की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का भी अहम योगदान रहा है। उनके पिता रणवीर सिवाच शिक्षा विभाग में अध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्ष 2022 में वीआरएस लेने के बाद वे झज्जर जिले के गांव लकड़िया में जीवन ज्योति स्कूल का संचालन कर रहे हैं और शिक्षा के क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं। वहीं उनकी माता कमला महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में सुपरिंटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं l डॉ.अंकिता के भाई शिवम सिवाच ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई की है और हाल ही में दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में वकालत कर रहे हैं। डॉ. अंकिता सिवाच ने अपनी सफलता से यह साबित कर दिया है कि यदि इंसान पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि असफलता से घबराने की बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती।