आम आदमी पार्टी के हांसी जिला प्रधान राजेंद्र सोरखी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर सोरखी पुलिस चौकी में डिटेन कर लिया। इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए राजेंद्र सोरखी ने सरकार पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाया और कहा कि देश में शांतिपूर्ण ढंग से धरना-प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार इस अधिकार को दबाने का प्रयास कर रही है। राजेंद्र सोरखी के अनुसार, वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर सोरखी पुलिस चौकी में डिटेन कर दिया। उन्होंने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को अपनी आवाज उठाने, सरकार के सामने अपनी मांगें रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज करवाने का अधिकार है। यदि लोगों को अपने विचार रखने और विरोध जताने से रोका जाता है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हमारा अधिकार' राजेंद्र सोरखी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों से असहमति जताना कोई अपराध नहीं है। जनता को अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, विरोध करना और अपनी बात सरकार तक पहुंचाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी भी नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि सरकार जनता की आवाज सुने और असहमति रखने वाले लोगों के विचारों का भी सम्मान करे। शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के माध्यम से लोग अपनी समस्याओं और मांगों को सामने रखते हैं। ऐसे में विरोध की आवाज को दबाने के बजाय संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। पुलिस कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल राजेंद्र सोरखी को हिरासत में लिए जाने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी के जिला प्रधान ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जनता की आवाज को दबाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।