समस्त अंबेडकरवादी समाज सभा, हांसी ने चमार जाति का नाम बदलकर मेघवाल किए जाने के प्रस्ताव को लेकर कड़ा विरोध जताया है। सभा के प्रधान डॉ. अभयराम आल्हाण ने कहा कि किसी भी समाज की ऐतिहासिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विषय पर बिना व्यापक सामाजिक सहमति के कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। डॉ. आल्हाण ने कहा कि चमार समाज का इतिहास संघर्ष, सामाजिक परिवर्तन और देश के प्रति योगदान से जुड़ा रहा है। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की वाणी और सामाजिक आंदोलन में भी इस पहचान का ऐतिहासिक संदर्भ मिलता है। उन्होंने कहा कि केवल नाम बदलने से सामाजिक भेदभाव समाप्त नहीं होगा, बल्कि समानता और सम्मान के लिए समाज की सोच में बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी संगठन या समिति की ओर से चमार जाति का नाम बदलकर मेघवाल करने की सिफारिश सरकार के समक्ष रखी जाती है तो समस्त अंबेडकरवादी समाज सभा, हांसी इसका लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से विरोध करेगी। डॉ. आल्हाण ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समानता, स्वतंत्रता और सम्मान के अधिकार सुनिश्चित किए हैं। इसलिए किसी जाति या समुदाय की पहचान से जुड़े फैसले लेते समय संबंधित समाज की भावनाओं और ऐतिहासिक तथ्यों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि चमार जाति का नाम बदलने संबंधी किसी भी प्रस्ताव या सिफारिश को आगे न बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में समाज के उत्थान के लिए कार्य करना चाहती है तो शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान और संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। डॉ. अभयराम आल्हाण ने कहा कि समाज को बांटने या पहचान बदलने के बजाय उसे मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने अंबेडकरवादी संगठनों और समाज के लोगों से अपील की कि इस मुद्दे पर शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करें