आखिरकार धान अव्यवस्था की भेंट चढ़ ही गया। करीब दो लाख एमटी धान पर बारिश का पानी फिर गया। करीब दो घंटे से जारी बारिश से खुले में पड़ा धान भीग रहा है। हालांकि कुछ धान को बचाने के लिए आढ़तियों व किसानों द्वारा तिरपाल से ढांपकर बचाने का प्रयास भी किया गया लेकिन बड़ी मात्रा में धान बोरियां व खुली ढेरियों के रूप में बारिश के बीच भीगता रहा। थानेसर अनाजमंडी में ही 90 हजार एमटी धान की आवक हो चुकी है, जिसमें से 70 हजार एमटी धान की खरीद की गई, जिसमें से महज 42 फीसदी का ही उठान हो पाया। बाकी धान में से अधिकतर खुले आसमान के नीचे पड़ा है, जिस पर दो घंटे तक बारिश पड़ती रही। बारिश से मंडियों में धान भीगा है, जिसके साथ ही उठान ठप हो गया है जबकि खरीद पहले ही उठान के लिए बंद की हुई थी। वहीं खेतों में धान कटाई कार्य भी ठप हो गया है। इससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका के चलते चिंंता गहरा गई है।