कुईं बाजार स्थित सिंह मैरिज लॉन में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन वृंदावन से आए कथावाचक हरिमंगल पराशर महराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि सनातन धर्म सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ पद्धति है। जो हमें माता-पिता का सम्मान, गुरुजनों के प्रति श्रद्धा और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराती है। उन्होंने कहा कि भगवान की प्रत्येक लीला में मानव जीवन के लिए संदेश छिपा है। श्रीकृष्ण की लीलाएं प्रेम, करुणा, भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ ही धार्मिक और नैतिक संस्कार भी देना आवश्यक है। सनातन संस्कृति की रक्षा करना और उसके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचना सभी का दायित्व है। उन्होंने सनातन धर्म के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने, बच्चों को अच्छे संस्कार देने और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वाहन किया। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की कथा सुनकर श्रद्धालु भक्ति से सराबोर हो गए। इस दौरान सुरेश वर्मा, राजू वर्मा, कन्हैया गुप्ता, रीता देवी, कुमकुम गुप्ता, अंशिमा, प्रिंसी, ज्योति वर्मा, रितु देवी, विश्वनाथ कसौधन, गौरव गुप्ता, सोमनाथ प्रजापति, जगदीश आदि मौजूद रहे।