पश्चिम दिल्ली में गैर-कानूनी तरीके से चल रहे इंटरनेशनल कॉल सेंटरों के जरिए अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों के नागरिकों से साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क का खुलासा किया है। जिले की साइबर सेल और स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम ने 17 सितंबर को मीनाक्षी गार्डन, अजय एन्क्लेव और कीर्ति नगर में एक साथ छापेमारी कर 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें कॉल सेंटर के मालिक और आयोजक, मैनेजर, बैंकर और टेलीकॉलर शामिल हैं। जिला पुलिस उपायुक्त हरेश्वर वी स्वामी ने बताया कि पश्चिमी जिला पुलिस को पश्चिम दिल्ली में गैर-कानूनी इंटरनेशनल कॉल सेंटरों और इसके जरिए अमेरिका और कनाडा के नागरिकों से ठगी करने की जानकारी मिली थी। पुलिस ने तकनीकी जानकारी के आधार पर कुछ अवैध कॉल सेंटरों का पता लगाया। उसके बाद साइबर सेल और स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम गठित की गई। 17 सितंबर को पुलिस टीम ने मीनाक्षी गार्डन, अजय एन्क्लेव और कीर्ति नगर में एक साथ तीन जगहों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान उन जगहों पर गैर-कानूनी इंटरनेशनल कॉल-सेंटर चलते हुए पाए गए। इन सेंटरों पर आरोपी खुद को एप्पल, आईओएस और माइक्रोसाफ्ट कंपनी के तकनीकी-सहायता और कस्टमर-केयर कर्मचारी बनकर इंटरनेट-आधारित कॉलिंग एप्लिकेशन के जरिए विदेशी नागरिकों से बात कर रहे थे। पुलिस ने इन जगहों से सेंटरों के मालिकों, मैनेजरों, बैंकरों और टेलीकॉलर समेत 23 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। जिसमें कॉल सेंटरों के तीन मालिक 36 साल के सौरभ शर्मा, 31 साल के सरनजीत सिंह उर्फ जेरी और 34 साल के तरनजीत सिंह उर्फ जैज शामिल हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब्त डिजिटल डिवाइस की जांच में पता चला कि उनमें इंटरनेट-बेस्ड कॉलिंग और रिमोट-एक्सेस एप्लिकेशन मौजूद थे। डिवाइस में विदेशी कॉल हिस्ट्री, विदेशों के टेलीफोन नंबरों की लिस्ट, पीड़ितों से जुड़ी जानकारी, पेमेंट के स्क्रीनशॉट, व्हाट्सएप पर बातचीत और दूसरे आपत्तिजनक डिजिटल मटीरियल भी मिले। पुलिस को आरोपियों के फोन से व्हाट्सएप बिजनेस अकाउंट और कई ऐसे ग्रुप मिले, जिनका इस्तेमाल ऑपरेशन से जुड़े तालमेल, टीएफएन से जुड़ी जानकारी और धोखाधड़ी से मिली रकम को संभालने के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने इन जगहों से 2 महंगी कारें थार और ग्रैंड विटारा, 27 लैपटॉप, 28 मोबाइल फोन, 11 राउटर, 36 हेडफोन, 25 अडैप्टर और 79 हजार रुपये बरामद किए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने घरों को वर्क स्टेशन में बदलकर संगठित और गैर कानूनी इंटरनेशनल कॉल सेंटर चला रहे थे। आरोपी सोशल-इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल करके अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों में लोगों को निशाना बनाते थे। वह नकली पहचान का इस्तेमाल करके नामी कंपनी के तकनीकी सहायता और कस्टमर-केयर कर्मचारी होने का नाटक करते थे। बिना अनुमति के खरीदारी, सब्सक्रिप्शन या सुरक्षा समस्याओं के बारे में नकली पॉप-अप संदेश का इस्तेमाल करके लोगों को टोल-फ्री नंबरों पर संपर्क करने के लिए उकसाया जाता था। इन नंबरों को भारत से इंटरनेट-आधारित कॉलिंग एप्लिकेशन के जरिए टेलीकॉलर संभालते थे। लोगों का भरोसा जीतने के बाद कॉल को वरिष्ठ अधिकारी बनकर बात करने वाले लोगों को ट्रांसफर कर दिया जाता था। यह लोग समस्या को हल करने के लिए पीड़ितों से यूएस डॉलर में भुगतान की मांग करते थे। पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच के लिए डिजिटल सबूतों का विश्लेषण कर रही है। साथ ही गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है।