गुरुग्राम में मानसून के बाद सर्दी की दस्तक से गुरुग्राम में वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। विकास सदन मॉनिटरिंग स्टेशन पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 419 तक पहुंच गया है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए नगर निगम की ओर से साल भर में 35 करोड़ रुपये से अधिक के खर्च के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ है। नगर निगम कागजों में प्लानिंग करने में जुटा है। धरातल पर उसका असर नहीं दिख रहा है। सड़कों पर उड़ती धूल लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रही है। निगम ने धूल दबाने के लिए एंटी-स्मॉग गन मशीनें खरीदी थीं। पर वे सड़कों पर शायद ही कभी चलती दिखती हैं। कई मशीनें स्थान निर्धारण प्रणाली चालू करके खड़ी रहती हैं। कागजों में पानी के छिड़काव का हिसाब-किताब तैयार किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक बसें और ईवी चार्जिंग स्टेशन की योजनाएं भी फाइलों तक सीमित हैं। शहर के प्रमुख मार्गों पर टूटी सड़कें, गड्ढे, मलबा और कूड़े के ढेर प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं। खुले में कूड़ा जलाना भी प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। इस पर रोक नहीं लग पा रही है।