धमतरी जिले में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक गांव में रहने वाले करीब 31 लोगों का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया है, जिसके चलते इन परिवारों का गांव में रहना मुश्किल हो गया है। पीड़ितों ने अपनी परेशानी को लेकर कलेक्टर के जनदर्शन में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं जिला प्रशासन ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
दरअसल, जिला प्रशासन की ओर से हर मंगलवार को जनदर्शन का आयोजन किया जाता है, जिसमें ग्रामीण और आम लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। मंगलवार को भखारा थाना क्षेत्र के ग्राम तर्रागोंदी के कुछ पीड़ित भी अपनी शिकायत लेकर जनदर्शन में पहुंचे।
पीड़ितों ने बताया कि उनके परिवार में महिला, पुरुष और मासूम बच्चों समेत कुल 31 लोग हैं, जिनका पिछले करीब दो वर्षों से हुक्का-पानी बंद कर सामाजिक बहिष्कार किया गया है। उनका आरोप है कि करीब दो साल पहले उन पर गांव में अतिक्रमण करने का आरोप लगाया गया था।
इसके बाद पंचायत की ओर से उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया।पीड़ितों के मुताबिक पंचायत की ओर से गांव के लोगों को निर्देश दिया गया है कि कोई भी व्यक्ति उनसे बातचीत नहीं करेगा, उनके खेतों में काम करने नहीं जाएगा और न ही उनके परिवार के यहां आना-जाना, उठना-बैठना या शादी-विवाह जैसे सामाजिक आयोजनों में उन्हें बुलाया जाएगा। सुख-दुख के मौकों पर भी साथ देने पर रोक लगाई गई है।
पीड़ितों का यह भी आरोप है कि यदि गांव का कोई व्यक्ति उनसे बातचीत करता है तो पंचायत की ओर से उस पर अर्थदंड लगाया जाता है। ऐसे में उन्हें राशन समेत रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए दूसरे गांवों का रुख करना पड़ रहा है। करीब दो साल से सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहे पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द मामले की जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है। वहीं प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हुकापानी बंद करना अपराध
किसी भी कारण लोगो का हुकापानी बंद करना अदालतों और उच्च न्यायालयों ने नागरिकों के स्वतंत्रता और समानता के अधिकार का उल्लंघन माना है। आज के समय में समाज या पंचायतों द्वारा किसी का हुक्का-पानी बंद करना या सामाजिक बहिष्कार करना कानूनी रूप से एक दंडनीय अपराध है।