बैटरी जल्दी डाउन होना, फोन हैंग होना जैसे झमेलों से बचने के उपाय

आपका स्मार्टफोन आपको स्मार्ट तो बनाता है, मगर इसके झमेले भी कम नहीं है। कभी बैटरी बैकअप की समस्या, तो कभी हैग होने की परेशानी। फिर इन झझटों को कैसे दूर करें?
आज के दौर में उसी व्यक्ति को स्मार्ट माना जाता है, जिनके हाथ में स्मार्टफोन टुनटुनाते हैं। भले ही स्मार्टफोन कंप्यूटर और इंटरनेट का हर काम करने में सक्षम हैं, लेकिन कुछ मामलों में इनकी स्मार्टनेस फिसड्डी साबित हो जाती है। उस स्थिति में इनके स्मार्ट होने पर भी संदेह होता है।
भले ही स्मार्टफोन स्पीड, परफॉर्मेंस और स्पेस के मामले में अव्वल साबित हो रहे हों, लेकिन इनका बैटरी बैकअप आज भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
बैटरी है बड़ी प्रॉबलम

हमारा सबसे करीबी मित्र हमारा फोन ही है। बोर हुए तो गेम खेल लिया, खुश हुए तो सोशल मीडिया पर एक्टिवेट हो गए और इसी तरह इंटरनेट सर्फिंग से जुड़े दूसरे काम, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग या प्ले आदि सभी काम स्मार्टफोन ही करता है, वो भी एचडी क्वालिटी के साथ। ऐसे में फोन की बैटरी दिन भर चला पाना किसी चुनौती से कम नहीं है। जब तक फोन कंपनियां किसी हाई बैकअप क्षमता वाली बैटरी को ईजाद नहीं कर लेतीं, तब तक फोन की बैटरी लाइफ को बनाए रखने के लिए हमें ही कुछ आदतों पर काबू रखना होगा।
कम खेलें गेम
कहीं डॉक्टर के यहां वेटिंग हो या फिर ट्रेन या फ्लाइट का इंतजार, हम तुरंत गेम खेलने के लिए मोबाइल निकाल लेते हैं। बोरियत दूर करने के लिए यह तरीका कारगर हो, लेकिन गेम के हैवी ग्राफिक्स और एचडी डिस्प्ले फोन की सारी बैटरी चूस लेता है। इसलिए चार्जिंग प्वाइंट से बहुत दूर होने पर गेम खेलने से परहेज करें। इसके अलावा फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे सोशल ऐप्स पर बार-बार अपडेट चेक करने की आदत के चलते भी बैटरी पावर खर्च होती है। अकेले फेसबुक ही 20 प्रतिशत बैटरी की खपत का कारण बनता है। बार-बार अपडेट चेक करने की आदत के बजाए। सुबह, दोपहर, शाम चेक करने के सेशन बनाएं।
सॉल्यूशन
गूगल प्ले स्टोर या आई फोन पर ऐसे कई बैटरी सेविंग ऐप्स हैं। ये ऐप्स आपको यह बताते हैं कि कौन सा ऐप फोन की बैटरी की ज्यादा खपत कर रहा है और यह भी सलाह देते हैं कि जिन ऐप्स का प्रयोग न के बराबर है, उन्हें उपयोग न करें, तो बैटरी लाइफ को बढ़ाया जा सकता है। ज्यादा बैटरी की खपत करने वाले ऐप्स के उपयोग पर काबू कर आप बैटरी लाइफ बढ़ा सकते हैं।
हैंग भी होते हैं, डाटा भी खर्च होता है

ज्यादातर उपभोक्ता कोई ऐप्स इस्तेमाल करने के बाद, उसे बंद नहीं करते और बैक बटन से वापिस मेन स्क्रीन पर आ जाते हैं। जब तक ऐप्स को क्लॉज नहीं किया जाता, तब तक वे ऑफ स्क्रीन होने के बावजूद ऑन रहते हैं और अपनी प्रोसेसिंग जारी रखते हैं। ऐसे में भले ही आप ऐप्स का इस्तेमाल न कर रहे हों, लेकिन आपका इंटरनेट डाटा भी लगातार खर्च होता रहता है और रैम को भी फिजूल में प्रोसेसिंग करनी पड़ती है। इस वजह से मोबाइल पर दूसरे ऐप्स खोलने से उसकी रैम पर लोड पड़ता है, जब एक साथ कई ऐप्स ऑन रह जाते हैं, तो इसके चलते मोबाइल रैम एक साथ सभी ऑन ऐप्स को सपोर्ट देती है।
इसके चलते इसकी परफॉर्मेंस धीमी हो जाती है और लगातार ऐसा ऑन रहने से मोबाइल हैंग होने लगता है। दूसरा इंटरनेट की स्पीड भी सही सपोर्ट नहीं करती। वह भी कई ऐप्स को डाटा देने के कारण बंट जाती है।
सॉल्यूशन
एक वक्त में एक या दो ऐप्स ही ऑन रखें। अगर फोन की पफॉर्मेंस इसके अलावा फोन पर ज्यादा ऐप्स का अंबार न लगाएं। सिर्फ वही ऐप्स रखें, जो ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। कभी-कभी उपयोग होने वाले ऐप्स डिलीट कर दें। आजकल बाजार में 2जीबी और 4जीबी रैम वाले मोबाइल भी मौजूद हैं। ज्यादा रैम मतलब स्पीड के साथ शानदार तालमेल।
स्पेस और स्पीड

मोबाइल की स्पीड स्मूथ रखने के लिए उसके स्पेस का ख्याल रखना जरूरी है। मान लीजिए आपके पास 8जीबी स्टोरेज क्षमता वाला मोबाइल है और उसमें आप 7 जीबी तक का डाटा और ऐप्स स्टोर कर लेते हैं, तो इसकी स्पीड धीमी हो जाएगी।
सॉल्यूशन- समय-समय मोबाइल की मेमोरी जांचते रहें। जैसे ही यह अपनी अधिकतम क्षमता के करीब पहुंचने वाला हो, तो डाटा को कंप्यूटर या फिर मोबाइल में मेमोरी कार्ड डालकर उसमें शिफ्ट कर लें। इससे उसकी स्पीड नॉरमल बनी रहेगी। आजकल बाजार पर कम कीमत पर ही 16, 32 और 64 जीबी की इनबिल्ट मेमोरी वाले फोन उपलब्ध हैं। आप अपनी जरूरत और बजट के अनुसार, अपने मोबाइल का चुनाव कर लें।
वाईफाई पर करें अपडेट
फोन का डाटा बचाना है, तो गूगल प्ले स्टोर में जाकर बाईं और बने हमबर्गर आइकल को टच करें। अब सेटिंग>ऑटो-अपडेट एप्स> ऑटो अपडेट ऐप्स ओवर वाई-फाई ओनली विकल्प को चुनें। इससे फोन के ऐप्स मोबाइल डाटा पर खुद को अपडेट नहीं करेंगे, जिससे फोन का डाटा बचा रहेगा।