WhatsApp की सुरक्षा में खामी : यूजर कॉल रिसीव न करे तब भी फोन में इंस्टॉल हो जाता था स्पाईवेयर

गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीगौरव द्विवेदी
Wed, 15 May 2019 06:27 AM IST
सार
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Whatsapp: Spy Threat to your privacy, update the app
प्रतीकात्मक तस्वीर

    विस्तार

    मैसेंजर एप वॉटसएप की सुरक्षा में बड़ी खामी का खुलासा होने के बाद दुनियाभर में इसका इस्तेमाल करने वाले लोग सकते में हैं। हालांकि अभी यह सही-सही पता नहीं चल सका है कि कितने लोगों के फोन व्हाट्सएप के जरिए हैक किए गए। जिस एनएसओ ग्रुप पर लोगों के फोन हैक करने का आरोप है, वह सबसे पहले 2016 में सुर्खियों में आया था।

    तब पता चला था कि यह संयुक्त अरब अमीरात की सरकार के साथ मिलकर लोगों के फोन हैक करता है। एनएसओ का सबसे मशहूर प्रोडक्ट पेगासस है। इस टूल के जरिए टार्गेट यूजर के फोन का कैमरा और माइक्रोफोन भी ऑन किया जा सकता है। साथ ही इसमें मौजूद सभी डेटा चुराए जा सकते हैं।

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    हैकर टार्गेट यूजर को वाट्सएप के जरिए वॉयस कॉल करते थे। यूजर फोन उठाए या न उठाए, स्पाई वेयर उसके डिवाइस में इंस्टॉल हो जाता था। इसके बाद कॉल लॉग से वह कॉल गायब भी हो जाता था। इस तरह यूजर को पता भी नहीं चलता था कि उसका फोन हैक हो गया है।

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    न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक हैकर्स द्वारा वाट्सएप के जरिए यूजर के फोन में इंस्टॉल किए गए कोड एनएसओ के अन्य कोड से काफी मिलते-जुलते थे। ताजा मामले की जानकारी इस महीने की शुरुआत में मिली। कंपनी ने 10 दिन के अंदर इसे ठीक कर अपडेट जारी कर दिया था।

    वाट्सएप के मुताबिक यह कहना जल्दबाजी होगी कि कितने लोग प्रभावित हुए। कंपनी का मानना है कि स्पाई वेयर काफी उन्नत किस्म का है और इससे चुनिंदा लोग या संस्थान ही प्रभावित हुए होंगे। कोई संख्या नहीं बताई गई है। कंपनी ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को जरूरी जानकारी दे दी गई है।

    क्या एप अपडेट करने के बाद स्पाई वेयर खत्म हो सकेगा

    वाट्सएप अपडेट करने के बाद उसे एनएसओ के स्पाई वेयर के जरिए हैक नहीं किया जा सकता है। लेकिन, जिनका फोन पहले ही हैक हो चुका है क्या उन्हें अपडेट का फायदा होगा, यह अभी पता नहीं है।

    आतंकवाद रोकने के लिए सरकारों के साथ काम करते हैं : एनएसओ

    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एनएसओ ने कहा कि वह आतंकवाद और अपराध रोकने के लिए सरकारों के साथ काम करती है। कंपनी ने कहा कि-हम काफी जांच-परख करने के बाद लाइसेंस जारी करते हैं। लोगों की सुरक्षा के लिए हम टेक्नोलॉजी तैयार करते हैं। गलत इस्तेमाल होने पर एक्शन लिया जाता है।

    फेसबुक की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'हम यूजर्स से एप को अपग्रेड करने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही उनसे ऑपरेटिंग सिस्टम भी अप टू डेट रखने को कहा गया है।' कंपनी ने कहा कि यह स्पाई वेयर काफी उन्नत किस्म का है और चुनिंदा लोगों को ही निशाना बनाया गया होगा। ज्यादातर यूजर प्रभावित नहीं हुए होंगे।

    ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जासूसी वाला सॉफ्टवेयर एक इस्राइली कंपनी एनएसओ ग्रुप ने विकसित किया है। इस जासूसी सॉफ्टवेयर को व्हाट्सएप कॉल के जरिये लोगों के फोन में इंस्टाल किया गया है। इस कंपनी को ‘साइबर आर्म्स डीलर’ के तौर पर जाना जाता है। यदि कोई उपभोक्ता कॉल का जवाब नहीं देता है तब भी उसके फोन में ये जासूसी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया जा सकता है। अभी इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है कि कितने लोगों को इस साइबर हमले का निशाना बनाया गया है।

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