Report: दुनिया के 58% स्कूलों में मोबाइल फोन बैन, यूनिसेफ की रिपोर्ट में खुलासा; जानें इससे बच्चों पर क्या असर
School phone ban UNICEF report 2026:
स्मार्टफोन की लत अब बच्चों के बचपन पर भारी पड़ रही है। पढ़ाई में एकाग्रता की कमी और सोशल मीडिया के खतरों को देखते हुए दुनिया भर के देश कड़े कदम उठा रहे हैं। महज दो साल के भीतर स्कूलों में फोन बैन करने वाले देशों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है।आखिर क्यों मोबाइल को क्लासरूम से बाहर किया जा रहा है? आइए जानते हैं।

विस्तार
Impact of mobile phones on students mental health:
यूनिसेफ की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 58% देशों के स्कूलों में अब मोबाइल फोन पर पाबंदी लग चुकी है। 2023 में यह आंकड़ा मात्र 24% था, जो 2025 में बढ़कर 40% हुआ और अब 58% तक पहुंच गया है। स्कूलों में फोन बैन करने का मुख्य उद्देश्य क्लास में बच्चों का ध्यान भटकने से रोकना, साइबर बुलिंग को कम करना और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करना है। हंगरी के रिसर्च बताते हैं कि बैन के बाद बच्चों में आउटडोर एक्टिविटी और किताबों के प्रति रुचि बढ़ी है।
Mobile phone restriction in schools global statistics: क्लासरूम से क्यों गायब हो रहे हैं स्मार्टफोन?
आंकड़ों में उछाल
- 2023 में केवल 24% देशों में पाबंदी थी।
- 2025 से आंकड़ो में बढ़ाेतरी शुरू हुई और यह बढ़कर 40 प्रतिशत पहुंच गया।
- 2026 में अब दुनिया के 58% देशों ने इसे लागू कर दिया है।
- मध्य और दक्षिणी एशियाई देश इस बदलाव में सबसे आगे हैं, जबकि ओशिनिया के देश जैसे ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड आदि फिलहाल इस दौड़ में पीछे हैं।
- एकाग्रता (Focus): फोन के वजह से बच्चे पढ़ाई पर ध्यान नहीं लगा पा रहे हैं।
- साइबर बुलिंग:स्कूल परिसर में डिजिटल उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही थीं।
- सोशल मीडिया का खतरा: इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स बच्चों, खासकर लड़कियों में बॉडी इमेज को लेकर हीन भावना पैदा कर रहे हैं।
- फेसबुक की एक रिपोर्ट के अनुसार, 32% टीनेज लड़कियों को इंस्टाग्राम के बाद अपने शरीर को लेकर खराब महसूस हुआ।
हंगरी के शोधकर्ताओं ने स्कूल टाइम में फोन बैन के बाद कुछ सकारात्मक बदलाव दर्ज किए हैं। इनके अनुसार फोन का इस्तेमाल 37% से घटकर मात्र 4% हुआ, जिसके बाद से बच्चे आपस में बातचीत कर रहे हैं, खेल-कूद रहे हैं और पहले से ज्यादा एक्टिव हो गए हैं। इसी के साथ किताबों पढ़ने की ओर भी रुझान बढ़ा है।
हालांकि, रिपोर्ट यह भी कहती है कि बदलाव की रफ्तार अभी धीमी है, जहां 33% टीचर्स ने इसे पॉजिटिव माना, वहीं 64% का मानना है कि अभी बहुत बड़े बदलाव की जरूरत है।
सख्त कानून या फिर कड़ी पॉलिसी?
हालांकि कुछ देशों ने जैसे कोलंबिया, एस्टोनिया, पेरू और पोलैंड ने फोन को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय कड़ी पॉलिसी लागू की है, जिससे तकनीक और अनुशासन के बीच संतुलन बना रहे।