SC: सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया अकाउंट सस्पेंशन पर नियमों की मांग ठुकराई, कहा- 'ये कोई मौलिक अधिकार नहीं'

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Fri, 10 Oct 2025 01:51 PM IST
सार

SC Rejects Plea For Rules In Social Media Suspension:

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक या सस्पेंड करने के नियम तय करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अन्य कानूनी मंचों पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, सुप्रीम कोर्ट इस पर सीधे सुनवाई नहीं करेगा।

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सोशल मीडिया - फोटो : AI

    विस्तार

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट ब्लॉक या सस्पेंड करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गाइडलाइन बनाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता अन्य कानूनी मंचों के जरिए अपनी शिकायत रख सकते हैं।

    यह मामला दो याचिकाकर्ताओं से जुड़ा था, जिन्होंने दावा किया कि उनके व्हाट्सएप अकाउंट बिना किसी कारण के ब्लॉक कर दिए गए। वे इन अकाउंट्स का इस्तेमाल अपने ग्राहकों से संवाद करने के लिए करते थे।

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    कोर्ट ने दी अन्य एप के इस्तेमाल की सलाह

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि उनके व्हाट्सएप अकाउंट क्यों ब्लॉक किए गए। इस पर वकील ने बताया कि उन्हें कोई कारण नहीं बताया गया।

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    इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की “और भी कई मैसेजिंग एप्स हैं, आप उनका इस्तेमाल कर सकते हैं।” अदालत ने कहा कि व्हाट्सएप तक पहुंच कोई मौलिक अधिकार नहीं है और यह याचिका सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नहीं की जानी चाहिए थी।

    याचिका में क्या मांग की गई थी

    याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि उन्होंने एक राष्ट्रव्यापी नीति बनाने की मांग की है ताकि सोशल मीडिया कंपनियां अकाउंट सस्पेंड या ब्लॉक करने के दौरान पारदर्शिता और न्यायसंगत प्रक्रिया का पालन करें। उनका कहना था कि किसी अकाउंट को बिना जवाब देने का मौका दिए ब्लॉक करना अनुचित है।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया “क्या व्हाट्सएप या कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म राज्य है?” इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, “नहीं।” तब कोर्ट ने कहा कि ऐसे में इस तरह की याचिका हाईकोर्ट में भी शायद स्वीकार्य नहीं होगी।

    सिविल सूट दायर करने का सुझाव

    सुप्रीम कोर्ट ने अंत में कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सिविल सूट दाखिल कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी बताया कि हाल ही में देश में कई स्वदेशी मैसेजिंग एप्स विकसित किए गए हैं, जिनका उपयोग किया जा सकता है।

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