Russia: रूस में अब 'चरमपंथी' जानकारी खोजने पर भी सजा, संसद ने पास किया नया कानून
रूसी संसद ने एक नया कानून पारित किया है जिसके तहत इंटरनेट पर 'चरमपंथी' मानी जाने वाली जानकारी खोजने या एक्सेस करने पर जुर्माना लगेगा। इस कदम को ऑनलाइन सेंसरशिप को मजबूत करने की दिशा में एक और कड़ी माना जा रहा है।

विस्तार
रूस की संसद के ऊपरी सदन ने शुक्रवार को एक ऐसे विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत अब इंटरनेट पर ‘चरमपंथी’ घोषित की गई सामग्री की खोज करना भी अपराध माना जाएगा। यह कानून रूस में इंटरनेट पर सरकारी नियंत्रण को और सख्त करने की एक और कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
इस विधेयक में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘चरमपंथी’ मानी जाने वाली सामग्री को खोजता या एक्सेस करता है, तो उस पर करीब 64 अमेरिकी डॉलर (लगभग 5,300 रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
व्लादिमीर पुतिन करेंगे पास
इससे पहले इस विधेयक को संसद के निचले सदन ने भी मंजूरी दे दी थी। अब यह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हस्ताक्षर के बाद कानून का रूप ले लेगा। रूसी कानून में ‘चरमपंथ’ की परिभाषा काफी व्यापक है। इसमें अलेक्सी नवलनी की एंटी-करप्शन फाउंडेशन जैसी विपक्षी संस्थाएं और ‘अंतरराष्ट्रीय एलजीबीटी मूवमेंट’ भी शामिल हैं।
हालांकि, अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किस तरह से इन सर्च को ट्रैक करेंगे या किस आधार पर यह तय करेंगे कि किसने जानबूझकर ऐसी सामग्री खोजी है।
बैन की गई जानकारी सर्च करना होगा गुनाह
सरकारी अधिकारी दावा कर रहे हैं कि आम इंटरनेट यूजर्स को इस कानून से डरने की जरूरत नहीं है और यह सिर्फ उन्हीं पर लागू होगा जो बार-बार बैन की गई जानकारी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।
रूस में लाखों लोग VPN का इस्तेमाल कर बैन की गई साइट्स एक्सेस करते हैं, लेकिन सरकार इन पर भी शिकंजा कस रही है। 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से रूस में सरकार विरोधी आवाजों को दबाने के लिए ऑनलाइन सेंसरशिप, गिरफ्तारियों और मीडिया बैन में भारी इजाफा हुआ है।