ओपनएआई बना रहा ह्यूमनॉइड रोबोट: 2027 में दिखेगी पहली झलक; ऑल्टमैन बोले- शरीर नहीं, दिमाग है सबसे बड़ी चुनौती

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Mon, 19 Oct 2026 02:50 PM IST
सार

चैटजीपीटी बनाने वाली ओपनएआई अब इंसानों जैसा ह्यूमनॉइड रोबोट बनाने की तैयारी में है। कंपनी के सीईओ सैम ऑल्टमैन के मुताबिक, 2027 में इसका डेमो दिखाया जा सकता है। लेकिन रोबोट का शरीर बनाने से ज्यादा मुश्किल उसके एआई दिमाग को तैयार करना है, ताकि वह चीजों को समझकर सही तरीके से काम कर सके।

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2027 में आ सकता है ओपनएआई का ह्यूमनॉइड रोबोट। - फोटो : FREEPIK

    विस्तार

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में चैटजीपीटी बनाने वाली ओपनएआई अब एक नई दिशा में कदम बढ़ा रही है। कंपनी इंसानों जैसा दिखने और उनके आसपास काम करने वाला ह्यूमनॉइड रोबोट बनाने की तैयारी कर रही है। OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने संकेत दिया है कि कंपनी इस प्रोजेक्ट पर काम करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि रोबोट का शरीर कैसा दिखेगा, उससे ज्यादा जरूरी यह है कि उसका दिमाग कैसे काम करेगा।

    कंपनी की योजना अभी शुरुआती दौर में है। ऑल्टमैन के मुताबिक, ओपनएआई 2027 में अपने रोबोट का एक डेमो दिखा सकती है। हालांकि, रोबोट को आम लोगों के इस्तेमाल के लिए बाजार में आने में इससे ज्यादा समय लग सकता है। कंपनी ने अभी इसके डिजाइन, कीमत या लॉन्च की तारीख का खुलासा नहीं किया है।

    ओपनएआई क्यों बना रही इंसानों जैसा रोबोट?

    सैम ऑल्टमैन ने एक पॉडकास्ट में बातचीत में बताया कि इंसानों जैसी बनावट वाले रोबोट के पीछे एक व्यावहारिक वजह है। हमारी दुनिया इंसानों के हिसाब से बनाई गई है। घरों के दरवाजे, सीढ़ियां, कीबोर्ड और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले औजारों का डिजाइन इंसानों की शारीरिक बनावट को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है।

    ऐसे में अगर रोबोट को इन्हीं जगहों पर काम करना है, तो उसका शरीर भी इंसानों जैसा होना उपयोगी हो सकता है। दो हाथ और दो पैर होने से वह इंसानों के लिए बनाई गई जगहों पर चलने-फिरने और चीजों को इस्तेमाल करने में सक्षम हो सकता है।

    लेकिन सिर्फ इंसानों जैसा शरीर बना देना काफी नहीं होगा। रोबोट को यह भी समझना होगा कि किस स्थिति में क्या करना है, चीजों को कैसे पकड़ना है और किसी काम को पूरा करने के लिए अपने हाथ-पैरों का इस्तेमाल कैसे करना है।

    ह्यूमनॉइड रोबोट बनाने में क्या है सबसे बड़ी चुनौती?

    ऑल्टमैन ने बताया कि उनका मुख्य फोकस इस बात पर नहीं है कि वह रोबोट बाहर से कैसा दिखेगा। उनके मुताबिक, असली चुनौती उसके दिमाग को विकसित करना है, जो इस रोबोट को चलाएगा। उन्होंने बताया कि अगर किसी मशीन को दो हाथ और दो पैर दे भी दिए जाएं, लेकिन उसे यह नहीं पता कि उनका इस्तेमाल कब और कैसे करना है, तो वह किसी काम का नहीं है।

    रोबोट के शरीर पर भी काम कर रही है कंपनी

    सैम ऑल्टमैन की प्राथमिकता रोबोट के दिमाग को विकसित करने पर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ओपनआई उसके हार्डवेयर को नजरअंदाज कर रही है। कंपनी मोटर, गियर सिस्टम, सेंसर और तापमान को नियंत्रित करने वाली तकनीक समेत कई हार्डवेयर हिस्सों पर काम करने के लिए विशेषज्ञों की तलाश कर रही है। इसके अलावा, रोबोट को बड़े पैमाने पर बनाने के लिए मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन से जुड़े काम भी अहम होंगे।

    इस क्षेत्र में ओपनएआई अकेली कंपनी नहीं है। टेस्ला अपने ऑप्टिमस ह्यूमनॉइड रोबोट पर कई साल से काम कर रही है। वहीं, चीनी कंपनी एक्सपेंग ने भी अपने आयरन ह्यूमनॉइड रोबोट को असेंबली के बाद प्रोडक्शन लाइन से खुद चलते हुए बाहर आते दिखाया है। रोबोट को समझदारी से काम करने लायक बनाने के लिए एआई के साथ-साथ उसके मोटर, जोड़ों और पूरे शरीर को सही तरीके से चलाना भी जरूरी है।

    पहले इंडस्ट्रियल, फिर पर्सनल रोबोट बनाने का लक्ष्य

    ओपनआई का शुरुआती लक्ष्य ऐसे जनरल-पर्पज रोबोट बनाना है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर के काम में कुशल कारीगरों की मदद कर सकें। वहीं, कंपनी का लॉन्ग-टर्म गोल एक ऐसा पर्सनल रोबोट बनाना है, जो आपके घर के अनगिनत काम संभाल सके।

    हालांकि, घरों तक इन रोबोट्स के पहुंचने में अभी लंबा वक्त लगेगा। फिलहाल, ओपनएआई के करियर पेज पर रोबोटिक्स से जुड़ी 27 नौकरियां लिस्टेड हैं, जो इस बात का सुबूत हैं कि कंपनी इस फ्यूचरिस्टिक मिशन पर गंभीरता से काम कर रही है।

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