ChatGPT: ओपनएआई ने किशोरों की सुरक्षा को लेकर उठाया सख्त कदम, आज से लागू होगा चैटजीपीटी पर पैरेंटल कंट्रोल

सुयश पांडेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीसुयश पांडेय
Mon, 29 Sep 2025 05:08 PM IST
सार

ओपनएआई ने चैटजीपीटी में बड़े बदलाव किए हैं। अब 13-18 साल के यूजर्स के लिए पैरेंटल कंट्रोल्स, संवेदनशील कंटेंट ब्लॉकिंग और आत्महत्या जैसे खतरनाक प्रॉम्प्ट्स पर तुरंत अलर्ट की सुविधा जोड़ी गई है। जानिए क्या है पूरी डिटेल।

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OpenAI has introduced new parental controls for ChatGPT
ChatGPT - फोटो : AI

    विस्तार

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ओपनएआई ने चैटजीपीटी में बड़े बदलाव किए हैं, खासतौर पर 13 से 18 साल के यूजर्स के लिए। अब माता-पिता अपने बच्चों की चैटिंग पर नजर रख सकेंगे और संवेदनशील कोई भी बातचीत होने पर तुरंत अलर्ट भी पा सकेंगे।संवेदनशील चैट पर मानवीय निगरानी

    अगर कोई किशोर आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुँचाने जैसी बातें चैटजीपीटी में लिखता है, तो उस चैट को सबसे पहले मानव मॉडरेटर जांचेंगे। अगर स्थिति गंभीर लगी तो माता-पिता को ईमेल, एसएमएस या एप नोटिफिकेशन के जरिए सूचना दी जाएगी।कंटेंट फिल्टर और सेफ्टी मोड

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    पैरेंट अकाउंट से जुड़े किशोर अकाउंट्स पर अपने आप अतिरिक्त सुरक्षा फीचर्स सक्रिय हो जाएंगे। इनमें ग्राफिक कंटेंट, वायरल चैलेंज, यौन या हिंसक रोलप्ले और चरम सौंदर्य मानकों जैसी सामग्री को ब्लॉक करना शामिल है।पैरेंटल कंट्रोल्स के नए विकल्प

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    माता-पिता अब बच्चों के चैटजीपीटी इस्तेमाल पर और भी नियंत्रण रख पाएंगे। चैटिंग के लिए समय सीमा तय करना (जैसे रात 8 बजे से सुबह 10 बजे तक ब्लॉक करना)। बच्चों का डेटा एआई ट्रेनिंग से बाहर रखना। वॉइस मोड और इमेज जेनरेशन को बंद करना। बॉट की सेव की गई मेमोरी को डिसेबल करना।गोपनीयता का संतुलन

    ओपनएआई का कहना है कि अलर्ट में बच्चों की चैट का पूरा कंटेंट साझा नहीं होगा। केवल यह जानकारी दी जाएगी कि बच्चा आत्महत्या या आत्म-नुकसान से जुड़ी बात कर रहा है। साथ ही माता-पिता को विशेषज्ञों की ओर से बातचीत के सुझाव भी मिलेंगे।कानूनी और सामाजिक संदर्भ

    ये बदलाव ऐसे समय में आए हैं जब कुछ माता-पिता ने चैटजीपीटी पर मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि चैटबॉट ने उनके किशोर बच्चे को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया। ओपनएआई का कहना है कि सुरक्षा और गोपनीयता दोनों का संतुलन बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।क्यों जरूरी हैं ये कदम

    एआई कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के दौर में किशोरों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओपनएआई की यह पहल भविष्य में अन्य कंपनियों को भी ऐसे सुरक्षा टूल्स अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।

    नोट: अगर आपको या आपके किसी परिचित को मदद की जरूरत है, तो भारत में किरण हेल्पलाइन (1800-599-0019) पर 24x7 निःशुल्क सहायता उपलब्ध है।

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