रियल है या रोबोट?: एरोवाना जैसी बायोनिक फिश देख धोखा खा जाएंगे आप, जानें किस तकनीक से करती है असली जैसी तैराकी
क्या आपने कभी ऐसी रोबोटिक मछली देखी गई है, जो बिल्कुल असली एरोवाना मछली की तरह पानी में तैरती है? CIFTIS में एक ऐसी फिश पेश की गई, जो पहली नजर में देखने पर एकदम असली दिखती है, लेकिन है नहीं। 12 घंटे का बैटरी बैकअप और 66 फीट गहराई तक तैरने की क्षमता रखने वाले इस रोबोट की कीमत क्या है और यह कैसे काम करता है? जानिए इस खास लेख में...

विस्तार
अगर किसी एक्वेरियम में आपको एक खूबसूरत एरोवाना मछली तैरती नजर आए और कुछ देर बाद पता चले कि वह असल मछली नहीं बल्कि एक रोबोट है, तो शायद यकीन करना मुश्किल हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (CIFTIS) में एक ऐसी अनूठी तकनीक का प्रदर्शन किया गया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पहली नजर में पानी में तैरती हुई यह मछली बिल्कुल असली नजर आती है, लेकिन असलियत में यह एक हाई-टेक बायोनिक एरोवाना रोबोट (Bionic Arowana Robot) है। इसे असली एरोवाना मछली के शारीरिक ढांचे और उसके तैरने के प्राकृतिक अंदाज को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। खास बात यह है कि पानी में इसकी बॉडी मूवमेंट इतनी नेचुरल दिखाई देती है कि दूर से इसे असली मछली समझना आसान है। यह रोबोट फ्लूइड सिमुलेशन टेक्नोलॉजी और बायोनिक डिजाइन की मदद से मछली की तरह तैरने की कोशिश करता है।
किस तकनीक का है कमाल?
इस बायोनिक फिश की सबसे बड़ी खासियत इसकी फ्लूइड सिमुलेशन टेक्नोलॉजी है। इसी तकनीक की मदद से यह पानी के भीतर बेहद आसानी और सुंदरता से तैरती है। इसके तैरने की शैली और शारीरिक संरचना इतनी सटीक है कि पहली नजर में असली एरोवाना मछली और इस रोबोट में फर्क कर पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
स्पीड, पावर और ऑपरेटिंग गहराई
1.9 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तैरेगी: यह बायोनिक एरोवाना ज्यादा तेज चलने के लिए नहीं, बल्कि असली मछली जैसी प्राकृतिक तैराकी के लिए बनाई गई है। इसकी अधिकतम स्पीड 1.9 किमी प्रति घंटा बताई गई है, जो करीब 1.1–1.2 mph के बराबर है। यानी इसकी खासियत रफ्तार से ज्यादा पानी में इसकी नेचुरल और स्मूद मूवमेंट है। उपलब्ध जानकारी में भी इसकी अधिकतम स्पीड करीब 1.9 किमी/घंटा बताई गई है।
एक चार्ज में 12 घंटे तक चलेगी
बैटरी की बात करें तो इस रोबोट में लिथियम बैटरी दी गई है। कंपनी की ओर से दावा किया जा रहा है कि एक बार फुल चार्ज करने पर या 12 घंटे तक पानी में तैर सकती है। यानी इसे लगातार थोड़े समय के लिए चलाने के बजाय लंबे समय तक एक्वेरियम या पानी के किसी निर्धारित सेटअप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यही फीचर इसे सिर्फ एक सामान्य रिमोट-कंट्रोल रोबोट से अलग बनाता है।
कैसे होती है कंट्रोल?
इसकी खासियत यह भी है कि ये खुद भी तैर सकती है और रिमोट से भी कंट्रोल की जा सकती है। बायोनिक एरोवाना को चलाने के लिए हर समय रिमोट की जरूरत नहीं पड़ती। यह डिफॉल्ट रूप से अपने निर्धारित घेरे में अपने-आप तैर सकती है। यानी इसे पानी में छोड़ने के बाद यह ऑटोनॉमस तरीके से स्विमिंग कर सकती है। इसके अलावा इसे वायरलेस रिमोट कंट्रोल से भी चलाया जा सकता है। हालांकि, रिमोट कंट्रोल का इस्तेमाल कम गहराई पर ही संभव होगा। ज्यादा गहराई में वायरलेस कंट्रोल की सीमा एक समस्या बन सकती है।
कितने पानी के अंदर जा सकती है?
इस रोबोट की अधिकतम ऑपरेटिंग डेप्थ 20 मीटर यानी करीब 66 फीट बताई गई है। इसका मतलब है कि इसे सिर्फ सतह के आसपास तैरने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है। यह काफी गहराई तक पानी के अंदर ऑपरेट कर सकती है।
हालांकि, रिमोट कंट्रोल और ऑटोनॉमस ऑपरेशन की क्षमताओं में अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है। वायरलेस रिमोट का इस्तेमाल कम गहराई तक सीमित रह सकता है, जबकि रोबोट की अधिकतम ऑपरेटिंग गहराई 20 मीटर है।
अभी चीन के बाहर आधिकारिक बिक्री नहीं
इस रोबोट की बिक्री को लेकर भी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। कंपनी के एक प्रतिनिधि के अनुसार, उन्होंने अभी तक चीन के बाहर आधिकारिक तौर पर कोई बायोनिक एरोवाना नहीं बेचा है।
यानी फिलहाल इसे ग्लोबल मार्केट में आसानी से खरीदा जा सकने वाला प्रोडक्ट नहीं माना जा सकता। चीन के बाहर इसकी उपलब्धता को लेकर कंपनी की तरफ से अभी आधिकारिक बिक्री नेटवर्क की जानकारी सामने नहीं आई है।
कितनी है कीमत?
अब बात इसकी कीमत की। कंपनी ने अभी इसकी फाइनल रिटेल कीमत तय नहीं की है। हालांकि, कंपनी के प्रतिनिधि के अनुसार इसकी कीमत करीब US5,000 डॉलर प्रति यूनिट रखने की योजना है।
यानी भारतीय मुद्रा में देखें तो यह कीमत करीब 4.15 लाख से ज्यादा बैठ सकती है, हालांकि वास्तविक भारतीय कीमत टैक्स, इंपोर्ट और अन्य शुल्क के कारण अलग हो सकती है। इसलिए फिलहाल पांच हजार डॉलर को प्लान की गई कीमत के तौर पर देखना चाहिए, फाइनल रिटेल प्राइस के तौर पर नहीं।