नॉर्वे सरकार का एलान: सार्वजनिक जगहों पर एआई चश्मों के उपयोग पर बैन का प्रस्ताव, क्यों उठाया जा रहा ये कदम?
क्या आप भी स्मार्ट चश्मा पहनकर घूमने के शौकीन हैं? नॉर्वे सरकार अब सार्वजनिक जगहों पर एआई और कैमरे से लैस स्मार्ट चश्मों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। बिना इजाजत फोटो, वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग के बढ़ते खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। जानिए किन-किन जगहों पर लगेगा बैन और क्या हैं सरकार की पूरी योजना...

विस्तार
एआई और स्मार्ट तकनीक से लैस चश्मे अब सिर्फ एक गैजेट नहीं रह गए हैं। इनमें कैमरा, ऑडियो रिकॉर्डिंग और एआई जैसे फीचर्स दिए जा रहे हैं। लेकिन इसी तकनीक को लेकर प्राइवेसी की चिंता भी बढ़ रही है। इसी बीच नॉर्वे की सरकार ने कुछ चुनिंदा जगहों पर एआई चश्मों के इस्तेमाल पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है। सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि ऐसे चश्मों की मदद से लोगों की जानकारी के बिना उनकी फोटो, वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड किया जा सकता है।
किन जगहों पर लग सकता है प्रतिबंध?
नॉर्वे सरकार के मुताबिक, प्रस्तावित प्रतिबंध उन जगहों पर लागू किया जा सकता है जहां आम लोग नियमित रूप से आते-जाते हैं। इनमें पार्क, समुद्र तट, संग्रहालय, शॉपिंग सेंटर और सार्वजनिक कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों में खेल, संगीत और सांस्कृतिक आयोजन भी दायरे में आ सकते हैं। सरकार का मानना है कि ऐसी जगहों पर लोगों को इस बात की चिंता नहीं होनी चाहिए कि कोई व्यक्ति उनकी जानकारी के बिना उन्हें रिकॉर्ड कर रहा है।
स्कूल और बच्चों से जुड़ी जगहें भी दायरे में
इसके अलावा एआई चश्मों के इस्तेमाल को लेकर बच्चों की प्राइवेसी को भी खास चिंता का विषय माना जा रहा है। यही वजह है कि इस प्रस्ताव के तहत स्कूल, किंडरगार्टन, खेल के मैदान और यूथ क्लब जैसी जगहों को भी शामिल किया जा सकता है। सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों यानी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को भी संभावित प्रतिबंध के दायरे में शामिल करने पर विचार कर रही है।
डॉक्टर के क्लिनिक से जिम तक हो सकता है बैन
इतना ही नहीं, ऐसी जगहें जहां लोगों की प्राइवेसी ज्यादा जरूरी होती है, वहां भी एआई चश्मों पर रोक लग सकती है। जैसे की सरकार ने हेल्थकेयर सेंटर, डॉक्टर के ऑफिस, स्विमिंग पूल और चेंजिंग रूम व शॉवर वाले जिम जगहों का उदाहरण दिया है। इन जगहों पर बिना जानकारी के फोटो या वीडियो रिकॉर्ड होने का जोखिम ज्यादा गंभीर माना जा रहा है।
सरकार को किस बात की चिंता है?
नॉर्वे के डिजिटलाइजेशन और सार्वजनिक प्रशासन मंत्री टॉरगेयर मिकैल्सेन (Torgeir Micaelsen) ने तकनीक के इस दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मंत्री टॉरगेयर मिकैल्सेन ने कहा,'मुझे इस बात की बेहद चिंता है कि बाजार में ऐसी नई और शक्तिशाली तकनीक पेश की जा रही है, जहां लोगों को पता भी नहीं चलता और उनके फोटो खींचे जाने, वीडियो बनाए जाने या ऑडियो रिकॉर्ड किए जाने का जोखिम बना रहता है।'
सरकार का कहना है कि लोगों को सार्वजनिक जगहों पर यह भरोसा होना चाहिए कि उन्हें छिपकर रिकॉर्ड नहीं किया जा रहा है। इसी वजह से वह पहले अस्थायी रोक लगाकर इस तकनीक के प्रभाव और इससे जुड़े प्राइवेसी जोखिमों का विस्तार से अध्ययन करना चाहती है।
हर जगह एआई चश्मों पर बैन नहीं लगेगा
नॉर्वे सरकार ने साफ किया है कि वह एआई चश्मों या दूसरी पहनने वाली तकनीक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की योजना नहीं बना रही है। निजी इस्तेमाल की अनुमति जारी रह सकती है। इसी तरह ऐसी जगहों पर भी इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा, जहां दूसरे लोगों को उनकी सहमति के बिना रिकॉर्ड किए जाने का जोखिम नहीं है। सरकार कुछ सीमित और सामाजिक रूप से उपयोगी मामलों में अपवादों पर भी विचार कर रही है।
किन एआई चश्मों पर लागू हो सकता है बैन?
फिलहाल अभी यह भी तय नहीं हुआ है कि प्रस्तावित प्रतिबंध के दायरे में कौन-कौन से डिवाइस आएंगे। इसके लिए सरकार यह जांच करेगी कि नियम सिर्फ कैमरा और ऑडियो रिकॉर्डिंग वाले चश्मों पर लागू हो, या कैमरा और AI फीचर्स वाले चश्मों को भी इसमें शामिल किया जाए। इसके अलावा कैमरा, ऑडियो रिकॉर्डिंग और एआई वाले दूसरे वियरेबल डिवाइस भी प्रस्तावित नियमों के दायरे में आ सकते हैं।
जल्द संसद में पेश होगा प्रस्ताव
रॉयटर्स के अनुसार नॉर्वे की अल्पसंख्यक सरकार ने कहा है कि वह इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द संसद में पेश करेगी। हालांकि, अंतिम नियम क्या होंगे और किन जगहों पर प्रतिबंध लागू होगा, यह कानून की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।
सरकार इसके साथ एक विशेषज्ञ समूह भी बनाएगी। यह समूह एआई चश्मों और दूसरी शरीर पर पहनी जाने वाली तकनीक से जुड़े जोखिमों का अध्ययन करेगा और भविष्य में इनके लिए स्थायी राष्ट्रीय नियम बनाने को लेकर सरकार को सलाह देगा।
दुनिया में बढ़ रही एआई चश्मों को लेकर चिंता
नॉर्वे का यह कदम ऐसे समय में आया है जब कैमरा और एआई से लैस स्मार्ट चश्मों की प्राइवेसी को लेकर कई देशों में चर्चा बढ़ रही है। ऐसे चश्मे देखने में सामान्य लग सकते हैं, लेकिन इनमें कैमरा, माइक्रोफोन और एआई जैसी तकनीक होने के कारण आसपास मौजूद लोगों को यह हमेशा पता नहीं चल सकता कि उन्हें रिकॉर्ड किया जा रहा है। इसी वजह से सरकारें और प्राइवेसी संगठनों के सामने सवाल है कि इस नई तकनीक के इस्तेमाल के लिए मौजूदा नियम पर्याप्त हैं या नहीं।