NASA: नासा में 4,000 कर्मचारियों की छंटनी, क्या अंतरिक्ष की रेस में चीन से पिछड़ रहा है अमेरिका?

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Sat, 17 Jan 2026 07:00 AM IST
सार

NASA Layoffs:

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा बीते साल बड़े बदलावों से गुजरी है। बजट कटौती के चलते हजारों कर्मचारियों की छंटनी हुई, जिससे मिशनों की रफ्तार प्रभावित हुई है। इसी बीच चीन का तेज और योजनाबद्ध स्पेस प्रोग्राम अमेरिका के लिए चुनौती बनता दिख रहा है।

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नासा के कई प्रोग्राम देरी से चल रहे हैं। - फोटो : Freepik

    विस्तार

    अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में पिछले साल करीब 4,000 कर्मचारियों की छंटनी हुई है। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद बजट में की गई कटौती का सीधा असर एजेंसी के कामकाज पर पड़ा। बड़ी संख्या में अनुभवी कर्मचारियों के जाने से रिसर्च, नई तकनीकों और भविष्य के मिशनों की गति धीमी हो गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों की कमी सिर्फ प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि इससे नासा की दीर्घकालिक योजनाएं भी कमजोर हुई हैं। कई अहम प्रोजेक्ट्स तय समय से पीछे चल रहे हैं, जिससे अंतरिक्ष क्षेत्र में अमेरिका की बढ़त पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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    मून मिशन में फंसती अमेरिकी योजनाएं

    अपोलो मिशन के बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि अमेरिका चांद की दौड़ में बढ़त में नहीं है। नासा का आर्टेमिस प्रोग्राम लगातार देरी का सामना कर रहा है। स्पेस लॉन्च सिस्टम और ओरियन कैप्सूल जैसी तकनीकें पुरानी मानी जा रही हैं, जबकि इनकी लागत भी काफी ज्यादा है। इसके अलावा, लूनर लैंडर और अन्य जरूरी सिस्टम अभी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाए हैं। नेतृत्व में बार-बार बदलाव और राजनीतिक दबाव ने लंबी रणनीति को कमजोर किया है।

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    चीन का तेज और स्थिर स्पेस मिशन

    वहीं चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम ज्यादा योजनाबद्ध और स्थिर नजर आता है। साल 2024 में चीन ने चांग ई-6 मिशन के जरिए चांद के दूर वाले हिस्से से सैंपल लाकर दुनिया को चौंका दिया। यह उपलब्धि भविष्य के मानव मिशनों की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। चीन खास तौर पर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद पानी की बर्फ और संसाधनों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

    स्पेस इकॉनमी में बदलता संतुलन

    हालांकि अमेरिका अभी भी वैश्विक स्पेस इकॉनमी में मजबूत स्थिति में है, लेकिन चीन तेजी से यह अंतर कम कर रहा है। चीन में सरकारी और निजी कंपनियां मिलकर रॉकेट, सैटेलाइट और नई तकनीकों पर काम कर रही हैं। इसके उलट, अमेरिका का स्पेस प्रोग्राम बिखरा हुआ दिखता है। फंडिंग की अनिश्चितता, नेतृत्व की कमी और दीर्घकालिक सोच का अभाव आने वाले समय में स्पेस रेस का संतुलन बदल सकता है।

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