Microsoft: माइक्रोसॉफ्ट ने 27 लाख यूजर्स को कहा 'Sorry', लौटाएगी करोड़ों रुपए, जानिए क्या है विवाद
Microsoft 365 Plan Controversy:
टेक दिग्गज Microsoft ने ऑस्ट्रेलिया में करीब 27 लाख ग्राहकों से माफी मांगी है। कंपनी पर आरोप है कि उसने Microsoft 365 सब्सक्रिप्शन के एआई वर्जन की कीमतों और विकल्पों को लेकर यूजर्स को गुमराह किया है।

विस्तार
टेक दुनिया की दिग्गज कंपनी Microsoft एक बार फिर सुर्खियों में है। ऑस्ट्रेलिया में 2.7 मिलियन (27 लाख) से ज्यादा ग्राहकों से कंपनी ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। मामला Microsoft 365 के उन सब्सक्रिप्शन प्लान्स से जुड़ा है जिनमें हाल ही में एआई फीचर Copilot जोड़ा गया था।
क्या है मामला?
ऑस्ट्रेलिया की कंज्यूमर कमीशन (ACCC) ने Microsoft पर आरोप लगाया है कि उसने ग्राहकों को सब्सक्रिप्शन रिन्यूअल के दौरान गुमराह किया। आयोग के अनुसार, 31 अक्टूबर 2024 से कंपनी ने यूजर्स को बताया कि उन्हें या तो उन्हें नए AI-सक्षम प्लान्स को स्वीकार करना होगा या अपना सब्सक्रिप्शन रद्द करना पड़ेगा।
इन नए प्लान्स की कीमतें पहले से काफी ज्यादा थीं। Microsoft 365 Personal Plan की वार्षिक फीस 45% बढ़कर AUD 109 से AUD 159 हो गई थी, जबकि Family Plan की कीमत 29% बढ़कर AUD 139 से AUD 179 पहुंच गई। लेकिन ACCC का कहना है कि Microsoft ने यूजर्स को यह नहीं बताया कि वे बिना AI वाले पुराने क्लासिक प्लान को भी जारी रख सकते थे, जिनकी कीमतें पहले जैसी ही थीं। यह विकल्प केवल तब सामने आता था जब कोई ग्राहक कैंसिलेशन की प्रक्रिया शुरू करता था।
कंपनी ने सफाई देते हुए मांगी माफी
कंपनी ने गलती मानते हुए कहा कि वह ग्राहकों से अधिक स्पष्ट संवाद नहीं कर पाई। Microsoft Australia ने एक बयान जारी कर कहा कि कंपनी ने यूजर्स को ईमेल भेज कर माफी मांगी है कि उन्हें सब्सक्रिप्शन विकल्पों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं बतायी गई थी थे। कंपनी ने बताया कि यूजर्स को नॉन-एआई विकल्पों की जानकारी दी गई है और योग्य ग्राहकों को रिफंड देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। Microsoft ने यह भी कहा कि वह भविष्य में ट्रांसपेरेंसी और कम्युनिकेशन को बेहतर बनाएगी ताकि ग्राहकों को गलतफहमी न हो।
ACCC ने Microsoft के खिलाफ फेडरल कोर्ट में केस दायर किया है। आयोग कंपनी पर फाइनेंशियल पेनल्टी, कंज्यूमर रिफंड, और कानूनी कार्रवाई की लागत सहित कई सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। आयोग का कहना है कि टेक कंपनियों को नई तकनीक या एआई फीचर जोड़ने के नाम पर उपभोक्ताओं के साथ भ्रामक व्यवहार नहीं करना चाहिए।