EV Report: ईवी व एक्सपोर्ट बढ़ाने को ऑटो सेक्टर करेगा ₹3.5 लाख करोड़ निवेश, टॉप 5 कंपनियां लगाएंगी बड़ी रकम

Jagriti
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीJagriti
Tue, 26 May 2026 01:59 PM IST
सार

India EV Investment

: भारत का ऑटो बाजार इलेक्ट्रिक की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है। नई रिपोर्ट के अनुसार आने वाले पांच वर्षों में देश की कार कंपनियां इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, बैटरी टेक्नोलॉजी और एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए भारी निवेश करने वाली हैं। जानिए इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की रिपोर्ट के बारे में विस्तार से...

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India Ratings Report: Indian Auto Sector Set for ₹3.5 Lakh Crore
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    Passenger Vehicle Sector India:

    रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की नई रिपोर्ट में सामने आया है कि देश का पैसेंजर व्हीलक उद्योग एक बहुत बड़े और एतिहासिक निवेश चक्र में प्रवेश कर चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 से 2030 (FY26-FY30) के दौरान भारतीय ऑटो इंडस्ट्री कुल 3.2 लाख करोड़ रुपये से लेकर 3.5 लाख करोड़ रुपये तक का रिकॉर्ड तोड़ कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी कैपेक्स करने की तैयारी में है। इस भारी-भरकम निवेश के पीछे सबसे बड़ी वजह देश में तेजी से बढ़ रहा ईवी ट्रांजिशन, विदेशों में बढ़ता भारतीय गाड़ियों का निर्यात और ग्राहकों के बीच प्रीमियम कारों की बढ़ती मांग को बताया जा रहा है।

    ऑटो कंपनियों का क्या मानना है?

    रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि इस निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रिक व्हीकल ट्रांजिशन पर खर्च हो सकता है। इसमें कुल निवेश का करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा EV प्लेटफॉर्म, बैटरी टेक्नोलॉजी और EV इकोसिस्टम तैयार करने में लगाया जाएगा। ऑटो कंपनियां आने वाले समय में ईवी बाजार को सबसे बड़ा अवसर मान रही हैं। यही वजह है कि अभी से बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी में निवेश शुरू हो चुका है।

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    टॉप कंपनियां करेंगी खर्च

    सबसे अच्छी बात यह है इसमें देश की टॉप 5 ऑटो कंपनियां अकेले दो लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश कर सकती है। यह पैसा एक ईवी मॉडल, बैटरी सिस्टम्, फ्लेक्सिबल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट नेटवर्क मजबूत करने में लगाया जा सकता है।

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    एक्सपोर्ट भी बना बड़ा फोकस

    भारतीय ऑटो कंपनियां अब सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। FY26 में पैसेंजर व्हीकल एक्सपोर्ट कुल बिक्री का 18.7 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।FY23 से FY26 के बीच निर्यात में लगभग 12 प्रतिशत CAGR दर्ज किया गया। कंपनियां अब ऐसे प्लांट बना रही हैं जो घरेलू और विदेशी दोनों बाजारों की जरूरतों को पूरा कर सकें।

    सस

    हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इतने बड़े निवेश की वजह से शुरुआती दौर में कंपनियों के रिटर्न पर दबाव रह सकता है। FY23 से FY25 के दौरान सेक्टर का ROCE 15 से 20 प्रतिशत के बीच था, लेकिन अगले कुछ वर्षों में यह थोड़ा कम रह सकता है क्योंकि कंपनियां पहले निवेश कर रही हैं और बाद में उससे कमाई होगी।

    मजबूत बैलेंस शीट से मिलेगा सहारा

    इंडिया रेटिंग्स के अनुसार ऑटो सेक्टर की वित्तीय स्थिति फिलहाल मजबूत मानी जा रही है। FY25 के अंत तक सेक्टर का नेट लेवरेज -0.8x रहा, जबकि ऑपरेशंस से आने वाला कैश फ्लो कैपेक्स से लगभग 2.4 गुना ज्यादा था। यानी कंपनियों के पास इतना वित्तीय दम मौजूद है कि वे बड़े निवेश कर सकें बिना ज्यादा कर्ज के दबाव में आए।

    किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा?

    रिपोर्ट में ईवी सेक्टर से जुड़े कुछ बड़े जोखिमों का भी जिक्र किया गया है:

    • ईवी अपनाने की गति उम्मीद से धीमी रहना।
    • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी।
    • नए EV प्लेयर्स के लिए प्रोडक्शन चुनौतियां।
    • ग्लोबल ऑटो कंपनियों के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा।

    ऑटो सेक्टर में बदलाव

    इंडिया रेटिंग्स की डायरेक्टर श्रुति साबू के मुताबिक भारतीय पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री अब एक बड़े संरचनात्मक बदलाव के दौर में है। कंपनियां भविष्य की मांग को देखते हुए पहले से निवेश बढ़ा रही हैं। इससे कहा जा सकता है कि आने वाले वर्षों में भारत का ऑटो सेक्टर सिर्फ पेट्रोल-डीजल कारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि EV आधारित नई टेक्नोलॉजी और ग्लोबल एक्सपोर्ट हब के रूप में तेजी से विकसित होगा।

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