Cyber Fraud: भारत में साइबर ठगों ने 5 वर्षों में उड़ाए 52 हजार करोड़! DoT ने 59 लाख बैंक खाते किए सीज

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Mon, 18 May 2026 02:32 PM IST
सार

Cybercrime India 2026:

भारत में पिछले पांच वर्षों में साइबर ठगों ने आम लोगों के 52 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा लूट लिए हैं। इस बढ़ते खतरे पर लगाम लगाने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) ने बड़ा एक्शन लेते हुए 3.4 करोड़ फर्जी मोबाइल नंबर और 59 लाख संदिग्ध बैंक खातों को ब्लॉक कर दिया है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कैसे सरकार एआई और नए सख्त कानूनों के जरिए जालसाजों पर शिकंजा कस रही है और कैसे आप इन सब ठगी से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं?

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India Lost Over Rs 52,000 Crore To Cyber Fraud In 5 Years, DoT Intensifies Anti-Fraud Drive
साइबर फ्रॉड (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock

    विस्तार

    भारत में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। दूरंसचार विभाग (DoT) के नए आंकड़ों ने सभी को हैरान कर दिया है। पिछले 5 वर्षों में भारत के लोगों ने साइबर फ्रॉड के कारण 52 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा गवां दिए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि सरकार और दूरंसचार विभाग इन जालसाजों से निपटने के लिए एक्शन मोड में हैं। आइए जानते हैं कि सरकार ने इस पर क्या आंकड़े पेश किए हैं और ठगी रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

    5 वर्षों में साइबर फ्रॉड की 60 लाख शिकायतें

    मुंबई में विश्व दूरसंचार दिवस के मौके पर DoT अधिकारियों ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में साइबर फ्रॉड से जुड़ी लगभग 60 लाख शिकायतें सामने आई हैं। इनमें से 3 हजार से ज्यादा मामलों को सुलझा लिया गया है और फ्रॉड करने वाले 6 बड़े गैंग्स को पकड़ा गया है। जालसाजी का तुरंत पता लगाने और नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही, नया टेलीकॉम एक्ट 2023 और टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स 2024 लागू होने से भारत का डिजिटल सुरक्षा ढांचा पहले से काफी ज्यादा मजबूत हुआ है।

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    फर्जी सिम लिया तो 50 लाख जुर्माना और जेल

    सिम कार्ड से जुड़े फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार जल्द ही बायोमेट्रिक आइडेंटिटी वेरिफिकेशन सिस्टम ड्राफ्ट रूल्स, 2025 लागू करने जा रही है। इस नए नियम के तहत टेलीकॉम यूजर्स का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य हो जाएगा। अगर कोई व्यक्ति किसी और की पहचान चुराकर फर्जी सिम लेने की कोशिश करता है तो उसे 3 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा, ऐसे मामलों में 50 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है।

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    सरकार का बड़ा एक्शन

    जालसाजों की कमर तोड़ने के लिए दूरसंचार विभाग ने बैंक, यूपीआई एप्स और पुलिस जैसी कई एजेंसियों के साथ मिलकर एक बड़ा और कड़ा अभियान चलाया है। इस कार्रवाई के तहत शक के घेरे में आए 3.4 करोड़ मोबाइल नंबरों को हमेशा के लिए डिस्कनेक्ट कर दिया गया है। साथ ही साइबर फ्रॉड में शामिल 16.97 लाख व्हाट्सएप अकाउंट्स पर भी बैन लगा दिया गया है। डिवाइस लेवल पर सुरक्षा बढ़ाते हुए गलत IMEI नंबर वाले 2.27 लाख हैंडसेट ब्लॉक किए गए हैं।

    सबसे बड़ी कार्रवाई बैंक खातों पर हुई है, जहां फ्रॉड के पैसे ट्रांसफर होने वाले 59 लाख संदिग्ध बैंक अकाउंट्स को फ्रीज कर दिया गया है। इस कदम से करीब 1 हजार करोड़ रुपये ठगों के हाथ लगने से बच गए। वहीं, सरकार के संचार साथी पोर्टल के जरिए 1250 करोड़ रुपये की कीमत के करीब 10 लाख खोए या चोरी हुए फोन्स को ब्लॉक और ट्रैक करने में सफलता मिली है।

    फ्रॉड होने पर तुरंत उठाएं ये कदम

    सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि अगर किसी के साथ भी ऑनलाइन या फाइनेंशियल फ्रॉड होता है तो बिना देरी किए नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। सुरक्षित रहने के लिए घटना के 24 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज कराना सबसे जरूरी होता है। इसके अलावा, अपने खोए हुए फोन को ब्लॉक करने या किसी संदिग्ध कॉल की रिपोर्ट करने के लिए संचार साथी एप या वेबसाइट का इस्तेमाल करें। इसे अब तक 1.7 करोड़ से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं।

    देश के टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर को भी लगातार आधुनिक बनाया जा रहा है। इसी के तहत देश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में 100 से ज्यादा 5G लैब स्थापित की गई हैं। अब नए मोबाइल टावरों में बिजली की खपत कम करने के लिए सोलर पैनल भी लगाए जा रहे हैं।

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