Captcha Update: अब QR Code बताएगा आप इंसान हैं या नहीं! Google कर रहा बड़ा एक्सपेरिमेंट

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Tue, 12 May 2026 02:00 PM IST
सार

वेबसाइट्स पर "I’m Not a Robot" वाले कैप्चा (Captcha) का झंझट जल्द ही खत्म हो सकता है। गूगल (Google) इंटरनेट सर्फिंग का तरीका बदलने जा रहा है। कंपनी एक नए क्यूआर कोड (QR Code) आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम पर काम कर रही है, जिसमें वेबसाइट्स को एक्सेस करने के लिए स्मार्टफोन से स्कैन करना अनिवार्य हो सकता है।

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जल्द आएगा गूगल का नया वेरिफिकेशन सिस्टम - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    इंटरनेट इस्तेमाल करते समय आपने कभी न कभी “I’m Not a Robot” वाला कैप्चा (Captcha) जरूर देखा होगा। इसे भरने के बाद ही वेबसाइट खुलती है। यह सिस्टम वेबसाइट्स को फर्जी ट्रैफिक और ऑटोमेटेड बॉट्स से बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अब गूगल इस पुराने सिस्टम को बदलने की तैयारी में नजर आ रही है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी एक नए QR कोड आधारित ह्यूमन वेरिफिकेशन सिस्टम की टेस्टिंग कर रही है। इसमें यूजर को वेबसाइट इस्तेमाल करने से पहले अपने स्मार्टफोन से QR Code स्कैन करना पड़ सकता है। इसके जरिए वेबसाइट यह जांच पाएगी कि सामने असली इंसान है या कोई बॉट।

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    ऐसे काम करेगा नया सिस्टम
    ऐसे काम करेगा नया सिस्टम - फोटो : Adobe Stock

    कैसे काम करेगा नया सिस्टम?

    बताया जा रहा है कि जब यूजर किसी वेबसाइट पर जाएगा, तो स्क्रीन पर एक QR Code दिखाई देगा। यूजर को इसे अपने फोन से स्कैन करना होगा। स्कैन करने के बाद फोन वेबसाइट को एक डिजिटल सिग्नल भेजेगा, जिससे यह पुष्टि होगी कि वेबसाइट इस्तेमाल करने वाला असली यूजर है।मौजूदा कैप्चा सिस्टम में अक्सर यूजर्स को ट्रैफिक लाइट, बस या तस्वीरों की पहचान करनी पड़ती है। कई बार टेक्स्ट टाइप करना भी जरूरी होता है। नया सिस्टम इस पूरी प्रक्रिया को बदल सकता है।

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    QR कोड
    QR कोड - फोटो : अमर उजाला

    गूगल क्यों बदलना चाहती है कैप्चा?

    गूगल लंबे समय से कैप्चा (Captcha) सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है। शुरुआत में यह तकनीक काफी प्रभावी मानी जाती थी, लेकिन अब AI और ऑटोमेटेड बॉट्स पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट हो चुके हैं। कई बॉट्स आसानी से कैप्चा टेस्ट पास कर लेते हैं।इसी वजह से कंपनी अब ऐसा तरीका तलाश रही है जिसमें असली डिवाइस और यूजर की पहचान ज्यादा सुरक्षित तरीके से हो सके। गूगल का मानना है कि फोन-लिंक्ड वेरिफिकेशन स्पैम, फर्जी अकाउंट और बॉट एक्टिविटी को कम करने में मदद कर सकता है।

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