Project EAT: गूगल बना रहा है एआई-पावर्ड वर्कप्लेस, लीक मेमो ने खोले कंपनी के राज

जागृति
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति
Sun, 01 Feb 2026 10:20 AM IST
सार

Google AI Workplace:

टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी गूगल अब केवल दुनिया के लिए एआई नहीं बना रही, बल्कि वह खुद को पूरी तरह एक AI-पावर्ड वर्कप्लेस में बदलने की ओर अग्रसर है। एक लीक हुए इंटरनल मेमो से खुलासा हुआ है कि गूगल प्रोजेक्ट EAT के माध्यम से अपने कार्यबल को अत्याधुनिक एआई क्षमताओं से लैस कर रहा है।

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Google Project EAT Leaked Tech Giant Transitions into AI-Powered Workplace Boost Developer Velocity
Google - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    गूगल ने इंटरनल प्रोजेक्ट EAT के जरिए अपने कर्मचारियों के लिए AI-ड्रिवन वर्कप्लेस बनाने की योजना शुरू की है। लीक डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, कंपनी एडवांस्ड AI टूल्स, कोड असिस्टेंस और ऑटोमेशन के जरिए प्रोडक्टिविटी, कोलैबोरेशन और वर्क-क्वालिटी को नए स्तर पर ले जाना चाहती है।

    क्या है प्रोजेक्ट EAT?

    तकनीकी भाषा में ईटिंग योर ओन डॉग फूड (Eating your own dog food) का अर्थ है अपने ही बनाए प्रोडक्ट्स को बाजार में उतारने से पहले खुद इस्तेमाल करना। इसी तर्ज पर प्रोजेक्ट EAT को गूगल की एआई एंड इंफ्रास्ट्रचर (AI2) यूनिट के तहत चलाया जा रहा है। कंपनी के दिग्गज अमीन वहदत के नेतृत्व में ये यूनिट डेटा सेंटर्स, एआई चिप्स और अन्य बुनियादी तकनीकों पर काम कर रही है।

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    स्मार्ट कोडिंग और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस

    लीक हुए दस्तावेजों के मुताबिक, गूगल एक ऐसा भविष्य देख रहा है जहां:

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    इंजीनियरिंग और कोडिंग:

    स्टेट-ऑफ-द-आर्ट एआई टूल्स के जरिए कोड क्वालिटी में सुधार और रूटीन (Toil) कामों में कमी आएगी।

    डेवलपर वेलोसिटी:

    शुरुआती 12 हफ्तों के सीड स्टेज टेस्ट में एआई की मदद से काम की रफ्तार में जबरदस्त बढ़त देखी गई है।

    स्टैंडर्डाइजेशन:

    पूरे संगठन में एआई के इस्तेमाल को एक मानक प्रक्रिया बनाया जाएगा, जिससे बाहरी एआई प्रतिस्पर्धा के जोखिम को कम किया जा सके।

    सिर्फ काम नहीं, वर्क-कल्चर भी बदलेगा

    गूगल का मानना है कि एआई के समावेश से न केवल काम की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि कर्मचारियों का एंगेजमेंट और कोलैबोरेशन भी बढ़ेगा। मेमो में दावा किया गया है कि इससे कर्मचारियों को बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस मिलेगा, क्योंकि एआई कठिन और दोहराव वाले कामों का बोझ खुद संभाल लेगा।

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