सावधान: चैटजीपीटी-जेमिनी के नाम पर चल रहा बड़ा फ्रॉड! फर्जी एआई एप डाउनलोड करते ही खाली हो सकता है बैंक अकाउंट
एआई एप्स की बढ़ती लोकप्रियता के बीच साइबर अपराधियों ने ठगी का नया रास्ता खोज लिया है। ChatGPT, Gemini और Claude के नाम पर फर्जी एप्स के जरिए डिवाइस में मालवेयर पहुंचाया जा रहा है। डेवलपर्स के लिए यह खतरा और भी गंभीर हो सकता है।

विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (AI) ने पढ़ाई, नौकरी, प्रोग्रामिंग और रोजमर्रा के कई काम आसान कर दिए हैं। ChatGPT, Google Gemini और Claude जैसे टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन AI की इसी लोकप्रियता को अब साइबर अपराधी हथियार बना रहे हैं। वे इन लोकप्रिय सेवाओं के नाम और पहचान का इस्तेमाल करके फर्जी एप्स और टूल्स लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
इन एप्स को देखने पर पहली नजर में यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि वे असली हैं या नकली। लेकिन डिवाइस में इंस्टॉल होते ही ये खतरनाक मालवेयर को सक्रिय कर सकते हैं। इसके बाद निजी जानकारी चोरी होने से लेकर पूरे सिस्टम पर साइबर अपराधियों का नियंत्रण होने तक का खतरा पैदा हो जाता है।कैसे काम करते हैं फर्जी एआई एप्स?
- साइबर अपराधियों का तरीका काफी सीधा है। जब कोई यूजर ChatGPT, Gemini या किसी अन्य AI टूल का नया वर्जन डाउनलोड करने की कोशिश करता है, तो उसे असली एप जैसी दिखने वाली नकली एप्लिकेशन मिल सकती है।
- यूजर जैसे ही इसे डाउनलोड और इंस्टॉल करता है, उसके डिवाइस में मालवेयर पहुंच सकता है। यह मालवेयर संवेदनशील डेटा चुराने, सिस्टम की गतिविधियों पर नजर रखने और दूसरे खतरनाक काम करने में सक्षम हो सकता है। यानी सिर्फ लोकप्रिय नाम देखकर किसी AI एप पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है।
डेवलपर्स पर भी मंडरा रहा बड़ा खतरा
- यह खतरा सिर्फ आम स्मार्टफोन यूजर्स तक सीमित नहीं है। AI आधारित एजेंटिक टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल के कारण डेवलपर्स भी साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं।
- AI एजेंट्स को अक्सर कंप्यूटर की फाइलें पढ़ने, कोड में बदलाव करने, कमांड चलाने और अलग-अलग डेवलपमेंट टूल्स से जुड़ने की अनुमति दी जाती है। ऐसे में अगर कोई डेवलपर गलती से संक्रमित AI एक्सटेंशन, पैकेज या टूल अपने सिस्टम में इंस्टॉल कर लेता है तो नुकसान काफी बड़ा हो सकता है।
- एक बार खतरनाक सॉफ्टवेयर को जरूरी परमिशन मिल जाने पर वह संवेदनशील फाइलों और दूसरे महत्वपूर्ण संसाधनों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है।
2026 में सामने आए हजारों मालवेयर हमले
- एंटी वायरस बनाने वाली कंपनी कैस्परस्काई के मुताबिक, 2026 में AI सेवाओं का नाम इस्तेमाल करने वाले करीब 92,000 मालवेयर साइबर हमले सामने आए हैं। इनमें लगभग 49 प्रतिशत हमले फर्जी ChatGPT एप्स से जुड़े बताए गए हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार, करीब 18 प्रतिशत मामलों में Claude के नाम का इस्तेमाल किया गया, जबकि इतने ही प्रतिशत हमलों में Gemini से जुड़े फर्जी एप्स सामने आए।
- रिसर्च के दौरान 15,000 से ज्यादा ऐसे मालवेयर सैंपल भी मिले, जिन्हें एजेंटिक AI सॉफ्टवेयर के तौर पर पेश किया गया था। इनमें ट्रोजन और स्पाइवेयर जैसे खतरनाक प्रोग्राम भी शामिल थे।
AI एप डाउनलोड करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- किसी भी AI एप को डाउनलोड करने से पहले यह जांचना बेहद जरूरी है कि वह कहां से डाउनलोड किया जा रहा है। एप का नाम और लोगो असली जैसा दिखना उसकी विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है।
- यूजर्स को हमेशा AI टूल के आधिकारिक स्रोत से ही एप डाउनलोड करना चाहिए। अनजान वेबसाइट, संदिग्ध लिंक या किसी थर्ड-पार्टी सोर्स से मिले इंस्टॉलेशन पैकेज से दूरी रखना बेहतर है।
- डेवलपर्स को AI एक्सटेंशन, पैकेज और एजेंट्स को दी गई परमिशन की भी अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। कंपनियों को अपने IDE, डेवलपमेंट वर्कस्पेस और AI एजेंट एक्सेस पर निगरानी रखनी चाहिए। साथ ही यह भी पता होना चाहिए कि बाहरी सॉफ्टवेयर उनके सिस्टम में किस रास्ते से प्रवेश कर रहा है।
- AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ साइबर जोखिम भी बढ़ रहे हैं। इसलिए किसी भी नए AI टूल को डाउनलोड करने से पहले कुछ सेकंड की सावधानी आपको बड़े साइबर नुकसान से बचा सकती है।
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