Deepfake: किसी की तस्वीर या आवाज से छेड़छाड़ अब नहीं चलेगी, डेनमार्क ने बनाया सख्त डीपफेक कानून
Law Against Deepfake:
डेनमार्क सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बने डीपफेक कंटेंट पर लगाम लगाने जा रही है। नए कानून के तहत किसी की आवाज या चेहरा बिना अनुमति के इस्तेमाल करना गैरकानूनी होगा। इससे आम नागरिकों और कलाकारों की पहचान को सुरक्षा मिलेगी।

विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल से डीपफेक कंटेंट का भी खतरा बढ़ा रहा। डीपफेक कंटेंट से निपटने के लिए अब कई देशों में नए कानून बनाए जा रहे हैं। कोपेनहेगन से मिली जानकारी के अनुसार, डेनमार्क की सरकार एक नया कानून लाने जा रही है जो नागरिकों को एआई से बने डीपफेक कंटेंट से सुरक्षा देगा। डीपफेक टेक्नोलॉजी से बनाए गए फर्जी वीडियो, फोटो और ऑडियो अब दुनिया भर में तेजी से फैल रहे हैं और इनसे आम लोगों की प्राइवेसी और पहचान पर खतरा बढ़ गया है।
2021 की घटना बनी बदलाव की वजह
2021 में डेनमार्क की गेम स्ट्रीमर मेरी वॉटसन के साथ एक बड़ा हादसा हुआ। किसी अज्ञात अकाउंट ने उनकी छुट्टी की एक तस्वीर को एडिट कर उन्हें निर्वस्त्र दिखाने वाला डीपफेक बना दिया। इस घटना के बाद देशभर में डिजिटल पहचान की सुरक्षा को लेकर चर्चा शुरू हुई और अब सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।
क्या कहता है नया कानून?
प्रस्तावित कानून के तहत किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरा या व्यक्तिगत लक्षणों का बिना अनुमति इस्तेमाल और शेयर करना प्रतिबंधित होगा। इसका उद्देश्य लोगों को ऑनलाइन अपमान, बदनाम करने या गलत सूचना फैलाने से बचाना है। इस कानून के बाद हर नागरिक को अपने ‘चेहरे और आवाज’ पर कॉपीराइट का अधिकार मिलेगा। यानी कोई भी प्लेटफॉर्म बिना अनुमति ऐसा कंटेंट साझा नहीं कर सकेगा।
बड़े टेक प्लेटफॉर्म पर भी होगी सख्ती
डेनमार्क के संस्कृति मंत्री याकोब एंगेल-श्मिट ने कहा कि अगर कोई प्लेटफॉर्म डीपफेक कंटेंट नहीं हटाता, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि, कानून में आम सोशल मीडिया यूजर्स के लिए जेल का प्रावधान नहीं रखा गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम डीपफेक और गलत सूचना के खिलाफ दुनिया में उठाए गए सबसे बड़े प्रयासों में से एक है। कई यूरोपीय देशों, जिनमें फ्रांस और आयरलैंड शामिल हैं, ने भी इस कानून में दिलचस्पी दिखाई है।