‘पूरी पीढ़ी को बर्बाद नहीं होने दे सकते’: अश्लील एप्स पर दिल्ली हाई कोर्ट ने Google-Apple को लगाई फटकार

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Wed, 13 May 2026 04:36 PM IST
सार

Delhi High Court:

दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल और एपल को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद अश्लील कंटेंट वाले एप्स पर तुरंत लगाम लगाने के सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' के नाम पर देश की पूरी युवा पीढ़ी को बर्बाद होने की छूट नहीं दी जा सकती। टेक कंपनियों को अब केवल शिकायतों का इंतजार करने के बजाय, एप अपलोड होते ही ऐसे कंटेंट को रोकने की जिम्मेदारी उठानी होगी।

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Delhi HC Asks Google, Apple To Crack Down On Obscene Mobile Apps, Warns Against ‘Ruining Generation’
दिल्ली हाईकोर्ट, Delhi High Court - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को टेक दिग्गज गूगल और एपल को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि वे अपने प्लेटफॉर्म जैसे गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर पर मौजूद अश्लील और वल्गर कंटेंट परोसने वाले मोबाइल एप्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि इंटरनेट पर मौजूद इस तरह के कंटेंट से पूरी की पूरी पीढ़ी को बर्बाद होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    कोर्ट की सख्त टिप्पणी

    मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने बेहद सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे देश की पूरी एक पीढ़ी को इस तरह के कंटेंट की वजह से बर्बाद होते हुए नहीं देख सकते। बेंच ने आगे विस्तार देते हुए कहा कि हालांकि वे संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा सम्मान करते हैं। लेकिन इस आजादी का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि किसी को भी अश्लील सामग्री फैलाने की खुली छूट दे दी जाए।

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    क्या है पूरा मामला?

    यह पूरा मामला रुबिका थापा नाम की एक महिला के जरिए हाई कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। इस याचिका में गूगल और एपल के प्लेटफॉर्म पर मौजूद उन एप्स पर रोक लगाने की मांग की गई है, जो यूजर्स को लुभाने के लिए अश्लील लाइव स्ट्रीमिंग का सहारा लेते हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि इन एप्स तक बच्चों की पहुंच बहुत आसान है और इन्हें किसी भी मोबाइल में आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है।

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    इतना ही नहीं, इन एप्स का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और हनी-ट्रैप जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने के लिए भी किया जा रहा है। वकील ने इस बात पर भी चिंता जताई कि इनमें से ज्यादातर एप्स विदेशी हैं, जो भारतीय कानूनों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए भारत से करोड़ों रुपये की कमाई कर रहे हैं।

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