GPS: दुनिया के बस 6 देशों के पास है अपना नैविगेशन सिस्टम, स्मार्टफोन से गाड़ियों तक, सब चलते हैं इनके भरोसे
Satellite Navigation System:
ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने से लेकर कैब बुक करने तक, आजकल कई तरह के काम बिना जीपीएस के नामुमकिन हैं। आइए जानते हैं कौन से है वो 6 देश जिनके पास GPS जैसा अपना सैटेलाइट बेस्ड नैविगेशन सिस्टम है।

विस्तार
आजकल हमारी जिंदगी में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) कितना जरूरी है, यह हमें बताने की जरूरत नहीं। हम मैप देखते हैं, उबर या ओला बुक करते हैं, यहां तक कि मौसम का हाल भी GPS की मदद से पता चलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के हर कोने में सिर्फ़ एक नहीं, बल्कि कई अलग-अलग सैटेलाइट सिस्टम काम करते हैं? और हर देश अपना खुद का सिस्टम क्यों बनाना चाहता है? चलिए, आज इस बारे में विस्तार से बात करते हैं।
नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम क्या है?
सबसे पहले, यह समझ लेते हैं कि यह काम कैसे करता है। एक नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम, जिसे तकनीकी भाषा में GNSS (Global Navigation Satellite System) कहते हैं, कई सैटेलाइट्स का एक नेटवर्क होता है। ये सैटेलाइट्स लगातार अपनी लोकेशन और समय की जानकारी पृथ्वी पर भेजते रहते हैं। हमारे फोन या कार में लगे रिसीवर इन सिग्नलों को पकड़ते हैं और कम से कम चार सैटेलाइट्स की मदद से हमारी सटीक लोकेशन का पता लगाते हैं।
दुनिया के प्रमुख GNSS सिस्टम
GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम)
दुनिया में चार मुख्य GNSS सिस्टम हैं जो पूरी पृथ्वी को कवर करते हैं। सबसे पुराना और सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला सिस्टम है GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम), जिसका मालिकाना हक अमेरिका के पास है। इसे अमेरिका के रक्षा विभाग ने विकसित किया था। इसमें 24 से ज़्यादा सैटेलाइट्स हैं, जो पृथ्वी से करीब 20,200 किलोमीटर की ऊंचाई पर घूमते हैं। हमारे स्मार्टफोन, गाड़ियों और दूसरे गैजेट्स में सबसे ज्यादा GPS का ही इस्तेमाल होता है।
GLONASS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम)
रूस का अपना सैटेलाइट बेस्ड नैविगेशन सिस्टम है, जिसे GLONASS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) कहते हैं, जिसे 1980 के दशक में विकसित किया गया था। इसमें भी करीब 24 सैटेलाइट्स हैं और कुछ जगहों पर यह GPS से ज्यादा बेहतर काम करता है। कई डिवाइस GPS और GLONASS दोनों का इस्तेमाल करके लोकेशन की सटीकता बढ़ाते हैं।
Galileo (गैलीलियो)
यूरोपियन यूनियन ने इसे GPS और GLONASS पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए बनाया था। Galileo अपने पब्लिक सर्विस के लिए जाना जाता है और इसकी सटीकता बहुत ज्यादा है। इसमें 28 से ज्यादा सैटेलाइट्स हैं। यह सिस्टम अपनी हाई-एक्यूरेसी के लिए खास तौर पर सिविलियन यूज़र्स के बीच लोकप्रिय है।
BeiDou (बीडू)
चीन का BeiDou सिस्टम पहले सिर्फ क्षेत्रीय था, लेकिन अब यह दुनिया भर में काम करता है। इसमें 35 से ज्यादा सैटेलाइट्स हैं। चीन ने इस सिस्टम को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया है। यह सिस्टम भी बेहद सटीक जानकारी देता है।
NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन)
ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने इसे भारत और इसके आसपास के इलाकों के लिए बनाया है। इसमें 7 सैटेलाइट्स हैं। NavIC को खास तौर पर भारत की सुरक्षा और नागरिकों की जरूरतों के लिए बनाया गया है। यह GPS से ज्यादा सटीक जानकारी देने में सक्षम है। NavIC सैटेलाइट सिस्टम को सबसे पहले 2013 में लॉन्च किया गया था।
QZSS (क्वासी-जेनिथ सैटेलाइट सिस्टम)
यह जापान और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक क्षेत्रीय सिस्टम है। QZSS, GPS के साथ मिलकर काम करता है और खासकर उन जगहों पर जहां GPS सिग्नल कमजोर होते हैं, वहां भी सटीकता को बढ़ाता है।