Meta: कंपनियों को बदलनी होगी डाटा भेजने की प्रक्रिया, मेटा ने कहा- जुर्माने के खिलाफ करेंगे अपील
कंपनी के वैश्विक मामलात अध्यक्ष निक क्लेग व मुख्य विधि अधिकारी जेनिफर न्यूस्टिड का दावा है कि डाटा प्रोटेक्शन कमीशन (डीपीसी) के आदेश में कई गलतियां हैं, यह अन्यायपूर्ण है। इस आदेश से नई मिसाल कायम होगी, अनगिनत कंपनियों को यूरोप व अमेरिका के बीच डाटा ट्रांसफर में मुश्किल आएगी।

विस्तार
यूरोपीय संघ की ओर से 10,770 करोड़ रुपये के जुर्माने के बाद अब कई बड़ी कंपनियों को अपने डाटा भेजने की प्रक्रिया बदलनी होगी। वहीं, आदेश के बाद मेटा ने फिलहाल सेवाएं बंद करने से इन्कार किया है। साथ ही, उसने आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है, इसके खिलाफ अपील की बात भी कही है।
कंपनी के वैश्विक मामलात अध्यक्ष निक क्लेग व मुख्य विधि अधिकारी जेनिफर न्यूस्टिड का दावा है कि डाटा प्रोटेक्शन कमीशन (डीपीसी) के आदेश में कई गलतियां हैं, यह अन्यायपूर्ण है। इस आदेश से नई मिसाल कायम होगी, अनगिनत कंपनियों को यूरोप व अमेरिका के बीच डाटा ट्रांसफर में मुश्किल आएगी। वहीं पूर्व में मेटा ने कहा था कि अगर उसे डाटा अंध महासागर के पार भेजने से रोका तो उसे कामकाज में बदलाव लाने होंगे, जो महंगी और जटिल प्रक्रिया है। उल्लेखनीय है कि पृथ्वी पर मेटा के 21 डाटा सेंटर हैं, इनमें से 17 अमेरिका, 3 यूरोप और 1 सिंगापुर में हैं।
2013 में शुरू हुआ मामला
- अमेरिकी सरकार इंटरनेट के जरिये लोगों की निगरानी कैसे कर रही है, इस बारे में जाने-माने कार्यकर्ता एडवर्ड स्नोडेन ने 2013 में खुलासे के बाद निजता अधिकार कार्यकर्ता मैक्स श्रेम्स ने अपने निजी डाटा के उपयोग पर अमेरिकी कंपनी फेसबुक के खिलाफ यूरोप में शिकायत दर्ज करवाई।
- शिकायत के बाद यूरोप ने सख्त निजता संरक्षण कानून बनाए, लेकिन अमेरिकी कानून ढीले-ढाले बने रहे, बल्कि वहां निजता के लिए अलग से कोई कानून भी नहीं बना।
- अमेरिका-यूरोप ने डाटा ट्रांसफर के लिए ‘प्राइवेसी शील्ड’ नामक समझौता किया, लेकिन यूरोपीय संघ के सर्वोच्च न्यायालय ने 2020 में इसे रद्द कर दिया।
- इस पर फेसबुक ने यूजर्स से रजामंदी के लिए समझौता कर डाटा ट्रांसफर का रास्ता अपनाना चाहा। शुरुआत में डीपीसी को आपत्ति नहीं थी, लेकिन सोमवार का आदेश इसके खिलाफ आया।
- इन सबके बीच 2022 में प्राइवेसी शील्ड में सुधार कर अमेरिका-यूरोप एक और समझौता कर चुके हैं। मेटा को उम्मीद थी कि नया समझौता उसे बचा लेगा, लेकिन अभी यूरोप ने इसे पारित ही नहीं किया है। कई विशेषज्ञ व संस्थान इसकी जांच कर रहे हैं, बड़ी संख्या में सांसदों ने इसमें फिर से सुधार करने को कहा है। यह समझौता जल्द लागू होता नहीं दिखता।