सेंधमारी का खौफ: चीन सरकार अब करेगी सिर्फ देसी कंप्यूटरों का इस्तेमाल, बदले जाएंगे पांच करोड़ पीसी

Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांगHarendra Chaudhary
Mon, 09 May 2022 06:47 PM IST
सार

चीन सरकार ने जो ताजा आदेश जारी किया है, उसके तहत पीसी ब्रांडों और सॉफ्टवेयर्स को शामिल किया गया है। लेकिन इंटेल और एमएमडी जैसी कंपनियों के उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है। बताया जाता है कि इन कंपनियों की तकनीक का विकल्प अभी चीन के पास नहीं है...

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Chinese government instructed its agencies and state enterprises to stop using all personal computers of foreign brands
चीन में लेनोवो स्टोर - फोटो : Agency (File Photo)

    विस्तार

    एक खबर के मुताबिक चीन सरकार ने अपनी एजेंसियों और सरकारी उद्यमों को विदेशी ब्रांड के तमाम पर्सनल कंप्यूटरों का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया है। उनकी जगह देश में बने कंप्यूटरों का इस्तेमाल शुरू करने को कहा गया है। इस कदम के पीछे मकसद संवेदनशील जगहों पर विदेशी टेक्नोलॉजी की पहुंच खत्म करना है। बताया जाता है कि तमाम एजेंसियों और उद्यमों को यह काम दो साल के अंदर पूरा करने को कहा गया है।

    अमेरिकी मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग की एक खबर के मुताबिक इस फैसले के कारण सिर्फ चीन सरकार के दफ्तरों में इस्तेमाल होने वाले पांच करोड़ कंप्यूटर बदले जाएंगे। इस खबर के मुताबिक चीन सरकार ने काफी समय पहले विदेशी ब्रांडों की जगह देश में विकसित कंप्यूटरों का इस्तेमाल करने का मन बनाया था। लेकिन ये काम धीमी गति से आगे बढ़ रहा था। लेकिन अब अमेरिका से बढ़ रहे टकराव को देखते हुए चीन सरकार ने इसे जल्द से जल्द पूरा करने का निर्णय लिया है। चीन सरकार का मकसद यह है कि अमेरिकी चिप, सर्वर और फोन पर उसकी निर्भरता को न्यूनतम स्तर पर लाया जाए।

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    एचपी और डेल पर गिरी गाज

    कैनालिस नाम की एक एजेंसी के मुताबिक चीन में पर्सनल कंप्यूटर के सबसे प्रचलित ब्रांड एचपी और डेल टेक्नोलॉजीज हैं। उनके बाद चीनी कंपनी लेनेवो का नंबर है। अब नई नीति के तहत एचपी और डेल के कंप्यूटर बदल दिए जाएंगे। चीन पर्सनल कंप्यूटरों (पीसी) का बड़ा निर्यातक है। 2021 में उसके इस निर्यात में नौ फीसदी की वृद्धि हुई थी। लेकिन चीन से जो कंप्यूटर निर्यात होते हैं, उनमें बड़ी संख्या अमेरिकी कंपनियों के कंप्यूटरों की होती है। इन कंपनियों की मैनुफैक्चरिंग यूनिट चीन में हैं।

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    कैनालिस के विश्लेषक एमा शू ने लिखा है- ‘चीन के पीसी बाजार में बड़ी उथल-पुथल मची हुई है। लेकिन 2021 में जो वृद्धि दर दर्ज हुई, उससे इस पर रोशनी पड़ी कि यहां कंपनियों के लिए कितने बड़े अवसर उपलब्ध हैं। सरकार के भीतर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। इसलिए स्थानीय ब्रांड के कंप्यूटरों की खरीदारी का चलन बढ़ा है। इस वजह से एचपी और डेल जैसी अमेरिकी कंपनियों को अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।’

    इंटेल और एमएमडी पर भरोसा!

    ब्लूमबर्ग के मुताबिक चीन सरकार ने जो ताजा आदेश जारी किया है, उसके तहत पीसी ब्रांड्स और सॉफ्टवेयर्स को शामिल किया गया है। लेकिन इंटेल और एमएमडी जैसी कंपनियों के उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है। बताया जाता है कि इन कंपनियों की तकनीक का विकल्प अभी चीन के पास नहीं है।

    वेबसाइट यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में सूचना तकनीक (आईटी) संबंधी देसी उत्पादों को खरीदने की नीति के कारण माइक्रोसॉफ्ट और एचपी जैसी अमेरिकी कंपनियों ने चीन की सरकारी कंपनियों के साथ साझा उद्यम बनाने की नीति अपनाई है, ताकि उन्हें सरकारी खरीद के ऑर्डर मिलते रहें। इसके बावजूद समझा जाता है कि ताजा सरकारी नीति का लाभ लेनेवो, हुवावे, और इंस्पुर जैसी चीनी कंपनियों को मिलेगा। संभावना है की किंगसॉफ्ट और स्टैंडर्ड सॉफ्टवेयर जैसी सॉफ्टवेयर क्षेत्र की चीनी कंपनियां अब माइक्रोसॉफ्ट और एडोब जैसी अमेरिकी कंपनियों के बाजार का बड़ा हिस्सा हड़प लेंगी।

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