China Social Media Rule: अब डिग्री वाले ही सोशल मीडिया पर दे पाएंगे ‘ज्ञान’, जानिए क्या है चीन का नया कानून

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Fri, 31 Oct 2025 10:34 AM IST
सार

China New Social Media Rule:

चीन सरकार ने ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नया नियम लागू किया है। अब हेल्थ, एजुकेशन, लॉ या फाइनेंस जैसे विषयों पर ज्ञान देने से पहले इन्फ्लुएंसर को उस विषय में डिग्री या प्रोफेशनल लाइसेंस दिखाना होगा। यह कदम फेक इंफॉर्मेशन पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है।

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china implements degree rule for social media influencers
नए कानूनों से रेगुलेशन को मजबूत बनाने पर जोर - फोटो : AI

    विस्तार

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स कंटेंट क्रिएटर्स को आजादी देते हैं कि वे अपने चैनल के जरिए लोगों से जानकारी साझा करें। लेकिन कई बार कंटेंट क्रिएटर्स भ्रामक जानकारी साझा करते भी पाए जाते हैं। इससे लोगों के बीच गलत जानकारी पहुंचने से भ्रम और अंधविश्वास फैलता है चीन ने इस पर रोक लगाने के लिए कड़ा कदम उठाया है।

    चीन की सरकार ने नया कानून लागू किया है जिसके तहत अब कोई भी क्रिएटर अगर हेल्थ, एजुकेशन, लॉ या फाइनेंस जैसे रेगुलेटेड विषयों पर कंटेंट बनाना चाहता है, तो उसे उस विषय में अपनी योग्यता यानी डिग्री या लाइसेंस दिखाना होगा। यह नया नियम 25 अक्टूबर से लागू हो गया है। इसका मकसद गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकना और जनता को झूठी या भ्रामक सलाह से बचाना है।

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    प्लेटफॉर्म्स के लिए बनाए गए सख्त नियम

    रिपोर्ट्स के अनुसार, अब Douyin, Weibo और Bilibili जैसे प्लेटफॉर्म पर भी यह जिम्मेदारी होगी कि वे यह सुनिश्चित करें कि कंटेंट पोस्ट करने वाले क्रिएटर्स की साख वाकई प्रमाणित हो। साथ ही, उन्हें यह भी देखना होगा कि कंटेंट में सही सोर्स का हवाला दिया गया है या नहीं।

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    क्रिएटर्स को अब यह साफ बताना होगा कि कब उन्होंने किसी अध्ययन से जानकारी ली है या कब उनके वीडियो में AI-जनरेटेड कंटेंट का उपयोग किया गया है। इसके अलावा, चीन के साइबर प्रशासन (CAC) ने हेल्थ प्रोडक्ट्स, सप्लीमेंट्स और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के छिपे विज्ञापनों पर भी रोक लगा दी है।

    नियंत्रण या विश्वसनीयता की ओर कदम?

    हालांकि सरकार का दावा है कि यह कदम पारदर्शिता और सटीकता लाने के लिए है, लेकिन आलोचक इसे ऑनलाइन सेंसरशिप का एक नया तरीका मानते हैं। उनका कहना है कि इससे स्वतंत्र आवाजों को दबाया जा सकता है और सोशल मीडिया पर खुली बहस सीमित हो जाएगी। यह नियम ऐसे समय में आया है जब इन्फ्लुएंसर्स पारंपरिक विशेषज्ञों की जगह तेजी से ले रहे हैं। स्वास्थ्य सलाह से लेकर वित्तीय गाइडेंस तक, कई क्रिएटर बिना औपचारिक योग्यता के भी अपने फॉलोअर्स के बीच ‘एक्सपर्ट’ बन चुके हैं।

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