Attention Economy: सोशल मीडिया युवाओं को बना रहा बीमार? अमेरिका में ट्रायल, YouTube-Instagram पर गंभीर आरोप

Jagriti
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीJagriti
Sat, 14 Mar 2026 01:11 PM IST
सार

Social Media Addiction Lawsuit LA:

क्या यूट्यूब और इंस्टाग्राम बच्चों को अपना आदी बना रहे हैं? लॉस एंजिल्स की अदालत में चल रहे 20 वर्षीय युवती केजीएम के केस ने हलचल मचा दी है। मार्क जुकरबर्ग से लेकर एडम मोसेरी तक को इस मामले में गवाही देनी पड़ी है। यह पहली बार हो रहा है जब जूरी यह तय करेगी कि क्या अटेंशन के चक्कर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने जानबूझकर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया। जानिए पूरा मामला विस्तार से...

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Attention Economy Trial:  YouTube Meta Responsible  Teen Mental Health?
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    अमेरिका के लॉस एंजिल्स में एक ऐसा ट्रायल चल रहा है जो सोशल मीडिया इंडस्ट्री के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। यह मामला इस सवाल की जांच कर रहा है कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म युवा यूजर्स में नशे जैसी लत और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इस मुकदमे का केंद्र एक 20 वर्षीय युवती केजीएम है, जिसने दावा किया है कि बचपन में यूट्यूब और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करने से उसे डिप्रेशन, सेल्फ-हार्म और लंबे समय तक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।

    अटेंशन इकोनॉमी पर आधारित है सोशल मीडिया मॉडल

    वादी पक्ष के वकीलों का तर्क है कि सोशल मीडिया कंपनियां ऐसे प्लेटफॉर्म डिजाइन करती हैं जो यूजर का ध्यान ज्यादा से ज्यादा समय तक बांधे रखें। लॉस एंजिल्स सुपीरियर कोर्ट में बहस के दौरान वकील मार्क लेनियर ने कहा कि मेटा प्लेटफॉर्म्स और यूट्यूब जैसी कंपनियों की तेजी से हुई ग्रोथ अटेंशन इकोनॉमी पर आधारित है। इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म यूजर का ज्यादा समय हासिल करने के लिए एल्गोरिद्म और फीचर्स डिजाइन करते हैं, जिससे कंपनियों को ज्यादा विज्ञापन और मुनाफा मिलता है।

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    6 साल की उम्र से शुरू हुआ डिजिटल टॉर्चर

    • शुरुआती एक्सपोजर: केजीएम ने महज 6 साल की उम्र में यूट्यूब और 9 साल की उम्र में इंस्टाग्राम का इस्तेमाल शुरू कर दिया था।
    • गंभीर परिणाम: 10 साल की उम्र तक वह डिप्रेशन (अवसाद) का शिकार हो गईं और खुद को नुकसान पहुंचाने लगीं।
    • मेडिकल रिपोर्ट: उनकी थेरेपिस्ट ने उन्हें 13 साल की उम्र में बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर और सोशल फोबिया से ग्रस्त पाया।
    • मार्क जुकरबर्ग (सीईओ, मेटा): उनसे प्लेटफॉर्म की सुरक्षा और किशोरों के डेटा पर तीखे सवाल हुए।
    • एडम मोसेरी (इंस्टाग्राम हेड): इंस्टाग्राम के एल्गोरिदम और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर उसके असर पर उनसे जवाब मांगे गए।
    • क्रिस्टोस गुडरो ( वीपी, यूट्यूब): यूट्यूब के रिकमेंडेशन इंजन के डिजाइन पर उनसे पूछताछ हुई।

    दूसरी तरफ मेटा और यूट्यूब ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उनके प्लेटफॉर्म ज्यादातर यूजर्स के लिए सुरक्षित हैं और केजीएम की मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं अन्य व्यक्तिगत कारणों से जुड़ी हो सकती हैं।

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    जूरी को क्या तय करना है?

    इस मामले में जूरी को यह तय करना होगा कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों ने लापरवाही बरती और क्या उनके प्लेटफॉर्म्स ने वादी को वास्तविक नुकसान पहुंचाया।अगर फैसला वादी के पक्ष में जाता है तो कंपनियों पर भारी वित्तीय जुर्माना लगाया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा फैसला सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म के डिजाइन और एल्गोरिद्म में बड़े बदलाव करने के लिए मजबूर कर सकता है।

    1600 से ज्यादा लोगों ने किए हैं मुकदमे

    हालांकि के यह मामला सिर्फ केजीएम से जुड़ा या सिर्फ एक का नहीं है। यह मुकदमा सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ चल रह बड़े कानूनी संघर्ष का हिस्सा है। रिपोर्ट्स के अुनसार इसमें 1600 से ज्यादा लोग इस बड़े मुकदमे में शामिल हैं, जिसमें कई परिवार और स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स भी शामिल हैं। इतना ही नहीं केस में टिकटॉक और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं।

    फैसले से बदल सकती है सोशल मीडिया इंडस्ट्री

    बताया जा रहा है कि शुक्रवार से जूरी की चर्चा (Deliberation) शुरू हो सकती है। यह फैसला तय करेगा कि क्या भविष्य में सोशल मीडिया कंपनियां अपने एडिक्टिव डिजाइन के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार मानी जाएंगी या नहीं।

    कानूनी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस केस का फैसला भविष्य में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    अगर अदालत कंपनियों को जिम्मेदार मानती है, तो इससे सोशल मीडिया एल्गोरिद्म, बच्चों के लिए सुरक्षा नियम और डिजिटल प्लेटफॉर्म डिजाइन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जूरी की विचार-विमर्श प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है और टेक इंडस्ट्री की नजर इस ऐतिहासिक फैसले पर टिकी हुई है।

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