Viral AI Influencer: जिसको समझ रहे थे इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर, वो निकली एआई; हर महीने कर रही लाखों की कमाई
Vrutika PatelAI Influencer:
इंस्टाग्राम पर 'वृत्तिका पटेल' नाम की एक लाइफस्टाइल इन्फ्लुएंसर की खूब चर्चा हो रही है। लेकिन लोग तब हैरान रह गए जब उन्हें पता चला कि वो कोई असली इंसान नहीं बल्कि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए बनाई गई एक 'डिजिटल अवतार' है। हैरानी की बात यह है कि लोग इस 'नकली' लड़की के कंटेंट के लिए पैसे (सब्सक्रिप्शन) भी खर्च कर रहे हैं, जिसे लेकर इंटरनेट पर नैतिकता की बहस छिड़ गई है।

विस्तार
आजकल सोशल मीडिया पर 'वृत्तिका पटेल' नाम के एक इंस्टाग्राम अकाउंट की खूब चर्चा हो रही है। पहली नजर में यह अकाउंट किसी आम लाइफस्टाइल इन्फ्लुएंसर का लगता है। लेकिन लोगों के होश तब उड़ गए जब उन्हें पता चला कि यह कोई असल लड़की नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए बनाई गई एक 'डिजिटल अवतार' है। वृतिका पटेल नाम की इस इन्फ्लुएंसर का इंस्टाग्राम प्रोफाइल काफी एक्टिव है। इस प्रोफाइल के 1 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और इसे देखकर आपको लगेगा कि वह कोई आम लाइफस्टाइल या फैशन इन्फ्लुएंसर है।
कौन है वृत्तिका पटेल?
वृत्तिका पटेल के अकाउंट पर आपको फैशन और लाइफस्टाइल से जुड़ी बहुत ही शानदार तस्वीरें मिलेंगी। तस्वीरों में वह कभी नीले कुर्ते में फूलों के बैकग्राउंड के साथ पोज देती दिखती हैं तो कभी दीव के बीच पर घूमती या कैफे में पास्ता खाती नजर आती हैं। ये तस्वीरें इतनी असली लगती हैं कि किसी के लिए भी यह पहचानना मुश्किल है कि यह एक कंप्यूटर के जरिए बनाई गई तस्वीर है या कोई असली इंसान।
एआई इन्फ्लुएंसर आखिर क्या होते हैं?
वृतिका पटेल सोशल मीडिया पर राज कर रहे 'एआई इन्फ्लुएंसर्स' के नए ट्रेंड का हिस्सा हैं। 'इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग हब' के अनुसार, एआई इन्फ्लुएंसर ऐसे डिजिटल कैरेक्टर या अवतार होते हैं जिन्हें क्रिएटर्स के जरिए बनाया जाता है। उन्हें एक पर्सनैलिटी दी जाती है ताकि वे बिल्कुल किसी असली इन्फ्लुएंसर की तरह काम कर सकें और दिखें।
आजकल सोशल मीडिया पर ऐसे हजारों 'फर्जी' इन्फ्लुएंसर मौजूद हैं। एआई तकनीक इतनी एडवांस हो गई है कि पहली नजर में असली इंसान और एआई के बीच फर्क करना बेहद मुश्किल होता है। हालांकि, अगर आप तस्वीरों को थोड़ा ध्यान से देखेंगे तो बहुत ज्यादा बेदाग त्वचा और जरूरत से ज्यादा परफेक्ट तस्वीरें इनकी असलियत बयां कर देती हैं।
एआई इन्फ्लुएंसर्स का बढ़ता ट्रेंड
वृत्तिका पटेल जैसी प्रोफाइल इंटरनेट पर तेजी से पैर पसार रहे 'एआई-जनरेटेड इन्फ्लुएंसर्स' की एक नई और बड़ी कैटेगरी का हिस्सा हैं। इन आभासी किरदारों को बनाने के लिए आज के आधुनिक एआई टूल्स का सहारा लिया जाता है, जो इतनी सटीकता से काम करते हैं कि असली इंसान और कंप्यूटर के जरिए तैयार तस्वीरों या वीडियो के बीच का अंतर लगभग खत्म हो जाता है।
हालांकि, डिजिटल चेहरों का यह सिलसिला कोई नया नहीं है। ऐसे वर्चुअल अवतार साल 2010 के दशक के मध्य से ही इंटरनेट पर मौजूद रहे हैं। लेकिन हाल के वर्षों में जेनरेटिव एआई टेक्नोलॉजी में आए क्रांतिकारी बदलावों ने इस ट्रेंड में जबरदस्त उछाल ला दिया है। यही वजह है कि आज विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे हजारों प्रोफाइल सक्रिय हैं। इन्होंने अपनी बनावटी खूबसूरती और दिलचस्प कंटेंट के दम पर लाखों फॉलोअर्स बटोर लिए हैं।
सिर्फ एक एआई मॉडल से कैसे हो रही है लाखों की कमाई?
भले ही वृतिका पटेल असली न हों, लेकिन उनके पीछे काम कर रहे इंसान असली पैसे छाप रहे हैं। फरवरी 2026 की 'बिजनेस ऑफ फैशन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे फेक इन्फ्लुएंसर ब्रांड कोलैबोरेशन, एफिलिएट लिंक और सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिए असली कैश जनरेट कर रहे हैं।
वृतिका की कमाई का गणित
अगर वृतिका की कमाई के गणित को समझें तो यह वाकई हैरान करने वाला है। उनके इंस्टाग्राम पर करीब 300 ऐसे प्रशंसक हैं जिन्होंने उनका पेड सब्सक्रिप्शन लिया हुआ है। हर सब्सक्राइबर इसके लिए हर महीने 399 रुपए की फीस देता है, जिसका सीधा मतलब यह है कि केवल सब्सक्रिप्शन के जरिए ही एआई इन्फ्लुएंसर 'वृतिका' या उनके पीछे की टीम हर महीने 1,19,700 रुपए कमा रही है।
गौर करने वाली बात यह है कि करीब 1.1 लाख रुपये की यह कमाई तो महज शुरुआत है। इसमें ब्रांड कोलैबोरेशन और विज्ञापनों से होने वाली इनकम को अभी जोड़ा ही नहीं गया है। अगर उन अन्य जरियों से होने वाली कमाई को भी शामिल कर लिया जाए तो यह कुल आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी नैतिकता की बहस
हाल ही में जब एक्स पर एक यूजर ने वृतिका के सब्सक्राइबर्स और उनकी मोटी कमाई का खुलासा किया तो इंटरनेट की दुनिया में नैतिकता को लेकर एक नई जंग छिड़ गई। इस ट्रेंड को लेकर यूजर्स के बीच मिली-जुली और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां एक यूजर का मानना है कि समाज और सांस्कृतिक मूल्यों में गिरावट के लिए सिर्फ एआई तकनीक को दोष देना गलत है, उनका तर्क है कि असली जिम्मेदारी उन लोगों की है जो ऐसी डिजिटल रचनाओं को बढ़ावा देकर उन्हें सफल बनाते हैं।
वहीं, इस मामले में एक गंभीर और अलग एंगल भी सामने आया है। एक अन्य यूजर ने संदेह जताया कि ये फेक अकाउंट्स कुछ संदिग्ध लोगों के जरिए 'मनी लॉन्ड्रिंग' के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ताकि सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिए काले धन को सफेद में बदला जा सके। जैसे-जैसे एआई तकनीक और बेहतर हो रही है, यह 'फेक क्रिएटर इकॉनमी' तेजी से अपने पैर पसार रही है। वास्तविकता और कल्पना के बीच की यह धुंधली होती लकीर भविष्य के इंटरनेट को जितना दिलचस्प बना रही है, उससे कहीं ज्यादा डरावने सवाल भी खड़े कर रही है।