AI ने निकाला कंपनी का दिवाला: कर्मचारियों को खुली छूट देने पर आया 4,100 करोड़ रुपये का बिल, क्या है मामला?

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Fri, 29 May 2026 12:14 PM IST
सार

Claude AI Costs:

एक बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी को अपने कर्मचारियों के जरिए एआई टूल्स का बिना किसी लिमिट के इस्तेमाल करने पर एक ही महीने में 4,100 करोड़ रुपये ($500 मिलियन) का भारी-भरकम बिल थमा दिया गया है। यह साबित करती है कि कैसे बिना किसी कंट्रोल के एआई का अंधाधुंध इस्तेमाल कंपनियों का बजट बिगाड़ रहा है और माइक्रोसॉफ्ट से लेकर अमेजन जैसी दिग्गज कंपनियां इससे कैसे जूझ रही हैं।

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AI Costs Are Exploding: Enterprise Burns Through Half a Billion Dollars
एंथ्रोपिक क्लाउड (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एआई

    विस्तार

    क्या आप सोच सकते हैं कि सिर्फ एक महीने के एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) इस्तेमाल का बिल करीब 4,100 करोड़ रुपये आ सकता है? यह कोई मजाक नहीं है। हाल ही में एक बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी के साथ ठीक ऐसा ही हुआ है।

    एक एआई कंसल्टेंट ने खुलासा किया है कि एक बड़ी कंपनी ने अपने कर्मचारियों को एआई टूल इस्तेमाल करने की छूट तो दे दी। लेकिन उस पर कोई खर्च की लिमिट नहीं लगाई। इसका नतीजा आईटी इतिहास की सबसे महंगी गलतियों में से एक साबित हुआ। इस घटना ने बड़ी कंपनियों के बोर्डरूम में हड़कंप मचा दिया है कि क्या एआई का इस्तेमाल उसे कंट्रोल करने की हमारी क्षमता से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है?

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    एक महीने में 4,100 करोड़ रुपये का बिल कैसे आ गया?

    जिस कंपनी का यह बिल आया है, उसने अपने कर्मचारियों को एंथ्रोपिक के क्लाउड प्लेटफॉर्म का अनलिमिटेड एक्सेस दे दिया था।

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    कोई लिमिट नहीं:

    खर्च पर कोई कैप नहीं था और न ही इस्तेमाल को ट्रैक करने के लिए कोई डैशबोर्ड था।

    भारी-भरकम काम:

    कर्मचारियों ने एआई का इस्तेमाल कोडिंग और ऐसे 'एजेंटिक पाइपलाइन्स' (जहां एआई बिना इंसानी मदद के खुद कई काम करता है) के लिए किया, जो बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग पावर लेते हैं।

    लंबे प्रॉम्प्ट:

    लंबे टेक्स्ट को प्रोसेस करने वाले प्रॉम्प्ट्स ने खर्च को कई गुना बढ़ा दिया।

    जब हजारों कर्मचारियों ने एक साथ बिना किसी रोक-टोक के इन महंगे एआई फीचर्स का इस्तेमाल किया तो कुछ ही हफ्तों में खर्च कंपनी के कुल आईटी बजट को भी पार कर गया।

    दिग्गज कंपनियां भी हो रही हैं परेशान

    यह सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं है। टेक जगत की कई दिग्गज कंपनियां एआई के बढ़ते खर्च से जूझ रही हैं:

    माइक्रोसॉफ्ट:

    द वर्ज की रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में अपने कई इंजीनियरों के क्लाउड कोड लाइसेंस रद्द कर दिए हैं, क्योंकि प्रति इंजीनियर महीने का खर्च $500 से $2,000 तक पहुंच गया था।

    उबर:

    कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ने बताया कि उन्होंने एआई कोडिंग टूल्स के आक्रामक इस्तेमाल के कारण अप्रैल महीने में ही अपना पूरे साल 2026 तक का एआई बजट खत्म कर दिया है।

    अमेजन के कर्मचारियों का नया खेल: 'Tokenmaxxing'

    अमेजन (Amazon) को हाल ही में अपना एक इंटर्नल लीडरबोर्ड बंद करना पड़ा। इस लीडरबोर्ड का मकसद यह ट्रैक करना था कि कौन सा कर्मचारी एआई का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन हुआ इसका उल्टा। टॉप पर आने के लालच में कर्मचारियों ने एआई से फालतू के और बिना जरूरत वाले काम करवाने शुरू कर दिए।

    इससे कंपनी का कंप्यूटिंग बिल आसमान छूने लगा। टेक इंडस्ट्री में इस ट्रेंड को टोकनमैक्सिंग, यानी बिना किसी साफ मकसद के ज्यादा से ज्यादा एआई टोकन जलाना कहा जा रहा है।

    कंपनियां एआई के मामले में कहां गलती कर रही हैं?

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियां एआई और उससे होने वाले फायदों के बीच का तालमेल नहीं बिठा पा रही हैं:

    मौसम पूछने के लिए महंगा एआई:

    एक एक्सपर्ट ने बताया कि कर्मचारी इतने महंगे एंटरप्राइज एआई का इस्तेमाल मौसम का हाल जानने जैसे छोटे-मोटे कामों के लिए कर रहे हैं। इसका बिल कंपनी को चुकाना पड़ता है।

    एआई बिल चुकाने के लिए छंटनी:

    लाइमस्टोन डिजिटल के फाउंडर मार्क का कहना है, "कंपनियां अब लोगों को इसलिए नौकरी से नहीं निकाल रहीं क्योंकि एआई ने उनकी जगह ले ली है, बल्कि इसलिए निकाल रही हैं ताकि वे एआई का भारी-भरकम बिल चुका सकें।"

    गलत फोकस:

    माइक्रोसॉफ्ट की पूर्व चीफ एआई ऑफिसर सोफिया वेलास्टेगुई के मुताबिक, लोग एआई का इस्तेमाल उन कामों को ऑटोमेट करने में कर रहे हैं जो उन्हें पसंद नहीं हैं। जबकि इसका इस्तेमाल कंपनी की कमाई बढ़ाने वाले कामों में होना चाहिए।

    आगे का रास्ता क्या है?

    इस 4,100 करोड़ की घटना के बाद, एआई इंडस्ट्री के लिए संकेत साफ हैं। भले ही एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के लिए यह एक बड़ी कमाई का जरिया बना हो, लेकिन इससे उनका नाम भी खराब हो सकता है। अगर कंपनियों को लगने लगा कि क्लाउड या कोई भी एआई उनका बजट बिगाड़ सकता है तो वे इसे खरीदने से कतराएंगी।

    अब समझदारी इसी में है कि कंपनियां एआई टूल्स लागू करने से पहले रियल-टाइम यूसेज ट्रैकिंग, अलर्ट सिस्टम और सख्त बजट लिमिट जैसे नियम तय करें। ताकि भविष्य में किसी और को इतना बड़ा झटका न लगे।

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