रोबोट्स नहीं लेंगे आपकी जगह: भारत सरकार पहचान रही एआई-सुरक्षित करियर, किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Sat, 24 Oct 2026 01:20 PM IST
सार

एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारत उन प्रोफेशन और हुनर की पहचान करने में जुटा है, जिनकी अहमियत आने वाले समय में बनी रहेगी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, सरकार ऐसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए सोच रही है, जहां इंसानी रचनात्मकता और पारंपरिक कौशल की खास जिम्मेदारी है। आइए जानते हैं सरकार का क्या प्लान है।

AI Can’t Take These Jobs, India Identifying Automation-Proof Careers Future
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी में भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शोधकर्ताओं और छात्रों को किय - फोटो : amarujala.com

    विस्तार

    एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह सवाल गहराता जा रहा है कि आने वाले समय में किन क्षेत्रों में इंसानों की जरूरत होगी। क्या एआई की वजह से सभी नौकरियां खतरे में हैं? केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सरकार ऐसे पेशों की पहचान कर रही है, जहां एआई काम की रफ्तार तो बढ़ा सकता है, लेकिन इंसानों की जगह लेना जरूरी नहीं होगा। भारत इस दिशा में हस्तशिल्प, हथकरघा, पाक कला और पर्यटन जैसे क्षेत्रों की संभावनाओं पर ध्यान दे रहा है। इसके साथ ही सरकार विदेशों में काम कर रहे भारतीय शोधकर्ताओं, इंजीनियर्स और वैज्ञानिकों को देश लौटकर काम करने के लिए प्रोत्साहित करने के तरीके भी तलाश रही है।

    एआई के दौर में किन पेशों पर रहेगा भारत का फोकस?

    • जर्मनी में भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शोधकर्ताओं और छात्रों को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि उन्होंने अपने मंत्रालय से ऐसे पेशों की पहचान करने को कहा है, जो तेजी से बदलती तकनीक के बीच भी स्थिर बने रह सकते हैं।
    • गोयल के अनुसार, भारत जैसे बड़े देश के लिए लाखों लोगों के भविष्य के रोजगार की योजना बनाना जरूरी है। सरकार यह समझना चाहती है कि किन क्षेत्रों में एआई का इस्तेमाल प्रोड्क्टिविटी बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। उनका जोर ऐसे क्षेत्रों को पहचानने पर है, जहां तकनीक और इंसानी कौशल एक-दूसरे के पूरक बन सकें।
    वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी में भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शोधकर्ताओं और छात्रों को किय
    वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी में भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शोधकर्ताओं और छात्रों को किय - फोटो : amarujala.com

    हस्तशिल्प, हथकरघा और पर्यटन में भारत की ताकत

    • पीयूष गोलय ने कहा कि हमारा भारत हस्तशिल्प, हथकरघा, पाक कला और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में ग्लोबली जिम्मेदारी निभा सकता है। इन क्षेत्रों में पारंपरिक कौशल, रचनात्मकता और मानवीय अनुभव की खास भूमिका होती है।
    • उन्होंने खास तौर पर भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा की चर्चा करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में पीढ़ियों से विकसित हुए पारंपरिक हुनर को एआई पूरी तरह बदल नहीं सकता।
    • सरकार का फोकस भारत की कुछ ऐसे खास क्षमताओं को पहचानने और उन्हें विकसित करने पर है, जिनसे बड़े पैमाने पर लोगों को फायदा मिल सके। गोयल ने कहा कि देश को अपनी खास ताकत वाले क्षेत्रों पर मिलकर काम करना चाहिए, ताकि भारत की 1.4 अरब आबादी का भविष्य बेहतर बनाया जा सके।

    रोजगार बढ़ाने को लेकर क्या दिया जवाब?

    • कार्यक्रम के दौरान जब गोयल से पूछा गया कि इन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए किस तरह के प्रोत्साहन दिए जा सकता हैं, तो उन्होंने कहा कि इसका कोई एक तरीका नहीं हो सकता है। उनके अनुसार, पहल पहल संबंधित क्षेत्र की जरूरतों और उपलब्ध अवसरों पर निर्भर कर सकती है।
    • इसमें कुछ योजनाएं सरकार की अगुवाई में चल सकती हैं, कुछ निजी क्षेत्र आगे बढ़ा सकते हैं और कुछ पहल लोगों की भागीदारी या नए अवसरों के आधार पर विकसित हो सकती हैं। इसका मतलब है कि रोजगार और स्किल को बढ़ावा देने के लिए सरकार, इंडस्ट्री और लोगों की भागीदारी जरूरी हो सकती है।

    विदेशों में काम कर रहे भारतीय शोधकर्ताओं को वापस लाने की तैयारी

    • इतना ही नहीं, पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार विदेशों में काम कर रहे भारतीय रिसचर्स , इंजीनियर्स और वैज्ञानिकों को भारत लौटने और देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए तरीका तलाश रही है।
    • जर्मनी में मौजूद भारतीय रिसचर्स और छात्रों से उन्होंने पूछा कि भारत में काम करने के लिए उन्हें किस तरह की मदद की जरूरी है? या भारत लौटने के लिए सोचने के लिए उन्हें किस तरह की मदद चाहिए। उनका कहना है कि सरकार यह समझना चाहती है कि प्रतिभाशाली लोगों के लिए देश में काम करने और शोध करने की परिस्थितियों को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।
    • गोयल के अनुसार, इस दिशा में केवल आर्थिक प्रोत्साहन देना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए बेहतर माहौल, मजबूत संस्थागत सहयोग और ऐसा इकोसिस्टम जरूरी है, जहां वे अपने काम को आगे बढ़ा सकें।
    • मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विदेशों से प्रतिभाशाली लोगों को वापस लाने के लिए वेतन या वित्तीय मदद ही एकमात्र सहारा नहीं हो सकता। शोधकर्ताओं को ऐसा वातावरण भी चाहिए, जहां उन्हें अपने काम के लिए जरूरी सुविधाएं और सहयोग मिल सके।
    • इस मुद्दे पर सरकार निजी और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों, प्रमुख शोध संस्थानों और इंडस्ट्री के दिग्गजों के साथ चर्चा करेगी। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं और उद्योग के बीच साझेदारी की संभावनाएं तलाशना है।
    • ऐसी साझेदारी से शोध और उद्योग की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, इस दिशा में किस तरह की ठोस पहल होगी, इसका विवरण अभी सामने नहीं आया है।

    क्या जर्मनी में भारतीय छात्र भारत लौटने में दिखा रहे रुचि?

    • इसी के साथ में पीयूष गोयल ने जर्मनी में पढ़ रहे भारतीय छात्रों का जिक्र करते हुए कहा कि उनमें से कई अब भारत लौटकर देश की आर्थिक प्रगति में योगदान देने में रुचि दिखा रहे हैं।
    • उन्होंने कहा कि भारतीय छात्र विदेश में नौकरी तलाशने के बजाय अपनी पढ़ाई और अनुभव का इस्तेमाल भारत की विकास यात्रा में करना चाहते हैं। उनके अनुसार, यह बदलाव देश में काम करने और योगदान देने के नए अवसरों की ओर बढ़ती रुचि को दिखाता है।
    • रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी में भारतीय मूल के लगभग 3.30 लाख लोग रहते हैं। इसके अलावा, वहां करीब 60 हजार से 70 हजार भारतीय छात्र हैं।
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