Independence Day 2021: कहां से कहां पहुंचा तकनीक और विज्ञान का विकास, पहले सैटलाइट से टेस्ट ट्यूब बेबी और स्वदेसी GPS तक
आजादी के बाद 74 साल के दौरान देश में बहुत कुछ बदला है। ग्राम पंचायत से लेकर राजधानी तक में काफी विकास हुए हैं। गांवों को जोड़ने वाली पक्की सड़कें बनी हैं तो हवाई मार्ग को लेकर भी काफी विकास हुआ है।

विस्तार
देश इस साल यानी 2021 में आजादी का 75वां जश्न मना रहा है। आजादी के बाद 74 साल के दौरान देश में बहुत कुछ बदला है। ग्राम पंचायत से लेकर राजधानी तक में काफी विकास हुआ। गांवों को जोड़ने वाली पक्की सड़कें बनीं तो हवाई मार्ग में भी आमूलचूल परिवर्तन आ गया। पहले गांवों में पक्की सड़कें तक नहीं थींं, लेकिन आज 1,57,383 ग्राम पंचायतों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंच चुका है। इन 74 साल के दौरान देश में विज्ञान और तकनीक को लेकर भी काफी विकास हुआ। आइए 75 साल की आजादी के मौके पर भारत में विज्ञान और तकनीक को लेकर हुए प्रमुख विकास पर एक नजर डालते हैं।
1975- आर्यभट्ट

आर्यभट्ट देश का पहला सैटेलाइट था, जिसे 19 अप्रैल 1975 को अंतरिक्ष के लिए रवाना किया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) ने सोवियत संघ की मदद से भारत में विकसित पहला उपग्रह आर्यभट्ट अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक स्थापित किया था। देश के पहले उपग्रह का नाम भारत के मशहूर खगोलशास्त्री और गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था। इस सैटलाइट का वजन 360 किलोग्राम था और इसका जीवन करीब 17 साल था। उस दौरान इसकी लागत 3 करोड़ से भी ज्यादा की थी। इस सैटेलाइट का उद्देश्य एक्सरे एस्ट्रोनॉमी, एरोनॉमिक्स और सौर भौतिकी में प्रयोग करना था। आर्यभट्ट उपग्रह की तस्वीर दो रुपये के नोट पर कई साल तक थी।
1975- सैटेलाइट टीवी

1975 में ही एक अगस्त को सैटेलाइट निर्देशात्मक टेलीविजन प्रयोग (साइट) का इस्तेमाल हुआ। साइट डॉ. साराभाई का सपना था, जो 1975-76 के दौरान अमेरिका के एप्लीकेशन टेक्नोलॉजी सैटेलाइट (एटीएस -6) से तैयार किया गया था। साइट ने भारत जैसे विकासशील देश को टेलीविजन के क्षेत्र के लिए बहुत बड़ा हथियार दिया। पहली बार देश के छह राज्यों (राजस्थान, बिहार, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक) के कुल 2,400 गांवों में लगभग 400 कम्यूनिटी टीवी सेट स्थापित किए गए। यह प्रोजेक्ट भी इसरो की देख-रेख में ही पूरा हुआ।