SIAM: ईरान युद्ध से भारत के वाहनों पर मंडराया खतरा, अगर नहीं मिला 'ये' केमिकल तो थम जाएंगे ट्रकों के पहिए

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Sat, 14 Mar 2026 12:31 PM IST
सार

DEF Shortage India:

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब भारत की सड़कों पर पड़ने वाला है। BS-VI डीजल वाहनों के लिए जरूरी 'DEF' (डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड) की सप्लाई खतरे में है। जानिए कैसे एक छोटे से केमिकल की कमी और स्मार्ट 'इंजन सेंसर' देश के पूरे ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर ब्रेक लगा सकता है।

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DEF Shortage Risk in India: Middle East Tensions Could Impact BS-VI Diesel Vehicles
डीजल वाहनों के लिए जरूरी DEF की सप्लाई पर मंडरा रहा संकट - फोटो : एक्स

    विस्तार

    ईरान में चल रहे युद्ध और मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ शेयर बाजार या तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर भारत की सड़कों पर दौड़ने वाले डीजल वाहनों की तकनीक और ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ने वाला है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की संस्था SIAM ने सरकार को चेतावनी दी है कि एक खास केमिकल की कमी के कारण देश के कमर्शियल डीजल वाहनों और कई डीजल पैसेंजर कारों के पहिए थम सकते हैं। आइए समझते हैं कि ये पूरा मामला क्या है और इसका वाहनों की तकनीक से क्या लेना-देना है।

    क्या है पूरी समस्या?

    भारत में BS-VI डीजल वाहनों को चलने के लिए DEF (डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड) नाम के एक खास लिक्विड की जरूरत होती है। इसे बनाने के लिए TGU (टेक्निकल ग्रेड यूरिया) का इस्तेमाल होता है। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण समुद्री रास्ते बाधित हैं। इससे भारत में TGU का आयात खतरे में पड़ गया है।

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    DEF क्या है और इसके बिना गाड़ी क्यों नहीं चलती?

    अगर आपको लगता है कि गाड़ी सिर्फ डीजल से चलती है तो BS-VI तकनीक ने इस नियम को पूरी तरह बदल दिया है। दरअसल, नए BS-VI डीजल इंजनों में प्रदूषण को कम करने के लिए सेलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन (SCR) सिस्टम लगा होता है। इसे सही से काम करने के लिए DEF की जरूरत पड़ती है। यह DEF 32.5% TGU और डिआयोनाइज्ड (शुद्ध) पानी का एक खास मिश्रण होता है। जब इसे SCR सिस्टम में डाला जाता है तो यह इंजन से निकलने वाली खतरनाक नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) गैस को हानिरहित नाइट्रोजन और पानी में बदल देता है। लेकिन इसमें सबसे बड़ी चुनौती वाहनों में मौजूद स्मार्ट 'इंजन इंटरलॉक सिस्टम' है। अगर आपकी गाड़ी का DEF खत्म हो जाता है तो यह सेंसर गाड़ी के इंजन को स्टार्ट ही नहीं होने देता। यानी, सीधे शब्दों में कहें तो बिना DEF के आपकी गाड़ी अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिल सकती।

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    भारत में DEF की कमी क्यों हो सकती है?

    भारत में DEF की कमी के पीछे कई बड़े कारण एक साथ जुड़ गए हैं। सबसे बड़ी समस्या आयात पर हमारी भारी निर्भरता है क्योंकि भारत अपनी कुल जरूरत का 50-60% TGU दुबई और मिस्र से मंगवाता है। लेकिन युद्ध के चलते इन रास्तों पर शिपिंग न सिर्फ मुश्किल हुई है, बल्कि काफी महंगी भी हो गई है। माल ढुलाई और इंश्योरेंस का खर्च इस कदर बढ़ गया है कि विदेशी ट्रेडर्स ने अपनी सप्लाई कमिटमेंट ही रद्द करना शुरू कर दिया है। इससे अप्रैल 2026 के बाद एक बड़ा संकट खड़ा होने की स्थिति बन गई है। इन बाहरी समस्याओं के साथ-साथ घरेलू स्तर पर भी गैस सप्लाई की अड़चन आ गई है। दरअसल, भारत में TGU बनाने वाली इकलौती बड़ी कंपनी GNFC (गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स) को इसके उत्पादन के लिए नेचुरल गैस (RLNG) की जरूरत होती है। लेकिन कतर से यह गैस लाने वाले जहाजों को भी शिपिंग की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप गैस की सप्लाई घट गई है और देश के अंदर भी TGU का उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

    बचाव के लिए SIAM ने सरकार से क्या मांगा?

    SIAM ने सरकार से अपील की है कि वह घरेलू कंपनी GNFC को निर्देश दे कि वह अपना TGU उत्पादन पूरी क्षमता से करे। फिलहाल GNFC हर महीने 15,000 से 20,000 टन TGU बनाती है, जो हमारी कुल जरूरत का सिर्फ 40-50% है। जब तक विदेशों से आयात सामान्य नहीं हो जाता, तब तक सरकार को DEF बनाने वाली कंपनियों को प्राथमिकता के आधार पर यह केमिकल देना चाहिए।

    आगे क्या होगा?

    अगर सप्लाई चेन को जल्द ठीक नहीं किया गया, तो देश में माल ढुलाई करने वाले ट्रकों का चक्का जाम हो सकता है। इससे न सिर्फ लॉजिस्टिक्स सेक्टर प्रभावित होगा, बल्कि रोजमर्रा की जरूरी चीजों की सप्लाई पर भी ब्रेक लग सकता है।

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