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बजट प्रस्ताव में धनी लोगों पर टैक्स बढ़ाने की वकालत कर क्या सियासी पैगाम देना चाहते हैं जो बाइडन?
Sat, 29 May 2021 02:49 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 29 May 2021 02:49 PM IST
सार
राष्ट्रपति के टैक्स प्रस्तावों को आधुनिक अमेरिकी इतिहास में सबसे महत्वाकांक्षी एलान बताया गया है। इन प्रस्तावों के जरिए जो बाइडन ने धनी अमेरिकियों और कॉरपोरेट सेक्टर से 3.6 ट्रिलिटन डॉलर जुटाने की योजना पेश की है...
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जो बाइडन (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
अपने छह ट्रिलियन डॉलर के बजट प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने धनी लोगों पर टैक्स बढ़ाने का साहसी इरादा जताया है। लेकिन ज्यादातर जानकारों को नहीं लगता कि राष्ट्रपति सचमुच इसे कार्यरूप दे पाएंगे। बल्कि इसे राष्ट्रपति के इरादे का संकेत समझा गया है, जिसका मकसद सियासी पैगाम देना है।
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राष्ट्रपति के टैक्स प्रस्तावों को आधुनिक अमेरिकी इतिहास में सबसे महत्वाकांक्षी एलान बताया गया है। इन प्रस्तावों के जरिए जो बाइडन ने धनी अमेरिकियों और कॉरपोरेट सेक्टर से 3.6 ट्रिलिटन डॉलर जुटाने की योजना पेश की है। उनके प्रस्ताव के मुताबिक इस रकम को जलवायु परिवर्तन रोकने, आर्थिक गैर-बराबरी कम करने, देश के ढहते इन्फ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत करने और सामाजिक सुरक्षा उपायों को मजबूत करने से संबंधित कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा।
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प्रस्ताव के मुताबिक धनी व्यक्तियों की आमदनी, उनके निवेश (शेयरों) की बिक्री, और संपत्ति उत्तराधिकारियों को ट्रांसफर करने पर अब ज्यादा टैक्स लगेगा। व्यक्तिगत आय कर की दर 37 फीसदी से बढ़ा कर 39.9 फीसदी कर दी जाएगी। नई दर 5,09,300 डॉलर से अधिक साझा आमदनी वाले दंपतियों और 4,52,700 डॉलर से अधिक आमदनी वाले सिंगल व्यक्तियों पर लागू होगी। इसी तरह कैपिटल गेन्स टैक्स और उत्तराधिकार कर में बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। कॉरपोरेट टैक्स की दर मौजूदा 21 से बढ़ा कर 28 फीसदी करने का प्रस्ताव किया गया है।
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लेकिन टैक्स बढ़ोतरी के प्रस्ताव को कांग्रेस (संसद) की मंजूरी मिल सकेगी, इसको लेकर शक जताए गए हैं। रिपब्लिकन पार्टी पहले ही किसी तरह का टैक्स बढ़ाने पर विरोध जता चुकी है। डेमोक्रेटिक पार्टी के भी कम से दो सीनेटर जो मेंचिन और क्रिस्टिन साइनेमा टैक्स बढ़ाने का विरोध करते रहे हैं। राष्ट्रपति ने छह ट्रिलियन डॉलर का जो बजट प्रस्ताव सामने रखा है, उसमें पहले ही पारित हो चुका 1.9 ट्रिलियन डॉलर का कोरोना राहत पैकेज और 2.3 ट्रिलियन डॉलर का घोषित इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज शामिल हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज पर रिपब्लिकन पार्टी के साथ आम सहमति बनाने की बाइडन की तमाम कोशिशें अब तक नाकाम रही हैं। ऐसे में पूरी संभावना है कि टैक्स संबंधी बजट प्रस्तावों पर रिपब्लिकन पार्टी फिलिबस्टर नियम लागू करने की कोशिश करेगी, जिसके बाद 100 सदस्यीय सीनेट में उन्हें पारित कराने के लिए 60 सदस्यों का समर्थन जरूरी हो जाएगा।
व्हाइट हाउस के सूत्रों ने मीडिया से कहा है कि इन तमाम प्रस्तावों को बजट में शामिल करने के पीछे बाइडन का मकसद साफ है। अगर रिपब्लिकन पार्टी इन पर सहमत नहीं होती है, जब राष्ट्रपति सीनेट में बजट रिकॉन्सिलिएशन नियम के तहत उन्हें पास कराने का फैसला करेंगे। ये नियम लागू होने पर बजट संबंधी प्रस्ताव साधारण बहुमत से पास हो सकते हैं। लेकिन इसमें पेच तब फंसेगा, अगर डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस्टिन साइनेमा और जो मेंचिन टैक्स बढ़ाने के विरोध पर अड़े रहे।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर टैक्स प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली, तो बाकी सारा बजट भी खटाई में पड़ सकता है। बाइडन के घोषित पैकेजों के लिए धन जुटाने का अकेला रास्ता तब राजकोषीय घाटा बढ़ना रह जाएगा। लेकिन उसे भी सीनेट में पास कराना कठिन हो सकता है।
कॉरपोरेट सेक्टर ने बजट प्रस्तावों का एलान होते ही टैक्स प्रस्तावों के खिलाफ गोलबंदी शुरू कर दी है। द यूएस चैंबर कॉमर्स ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार को कोरोना महामारी के अलावा एक ही दूसरी बात रोक सकती है और वह है राष्ट्रपति के टैक्स प्रस्ताव। चैंबर ने कहा- कैपिटन गेन्स टैक्स से दो तिहाई पूंजी निवेशों पर फर्क पड़ेगा। कॉरपोरेट टैक्स में बढ़ोतरी से 14 लाख छोटे कारोबारियों पर बोझ बढ़ेगा। कॉरपोरेट लॉबिस्ट्स की अमेरिका में तगड़ी पकड़ को देखते हुए राष्ट्रपति के इरादों के हकीकत में बदलने की संभालना और कम मानी जा रही है।