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Four Chip Alliance: दक्षिण कोरिया ने ऐसा झटका क्यों दिया अमेरिका को?

Thu, 22 Sep 2022 05:08 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 22 Sep 2022 05:08 PM IST
सार

Four Chip Alliance: अमेरिकी सरकार ने चिप-4 नाम से एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत उसने जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान के साथ सेमीकंडक्टर उद्योग का एलायंस बनाने का इरादा जताया है। इस पहल में शामिल देश सप्लाई चेन मैनेजमेंट, अनुसंधान एवं विकास, सब्सिडी और कारोबार के दूसरे मामलों में सहयोग करेंगे...

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US form Four Chip Alliance with its allies to stop China
Four Chip Alliance - फोटो : Agency

विस्तार

सप्लाई चेन काउंसिल नाम से एक नई संस्था बनाने के लिए चीन और दक्षिण कोरिया के बीच इस बीच हाल में हुए समझौते को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी रणनीति के लिए एक तगड़ा झटका माना जा रहा है। विश्लेषकों ने कहा है कि जिस समय अमेरिका तकनीकी क्षेत्र में चीन को किसी भी सहयोग से वंचित करने की नीति पर चल रहा है, उसके एक निकट सहयोगी देश ने चीन के साथ करार कर लिया है।

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दक्षिण कोरिया और चीन के बीच नया समझौता आर्थिक सहयोग के मुद्दे पर दोनों देशों की हुई बैठक में हुआ। इस दौरान दोनों देशों ने तीसरे देशों में भी साझा उद्योग लगाने के एक सहमति पत्र पर दस्तखत किए। चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस पर अपनी टिप्पणी में लिखा है- ‘अपने मुख्य उत्पादों का निर्यात करने के लिए दक्षिण कोरिया को चीन के स्थिर बाजार की जरूरत है और चीन को भी औद्योगिक विकास के लिए दक्षिण कोरिया की जरूरत है।’

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हीलोंगजियांग प्रोविंशियल एकेडेमी ऑफ सोशल साइंसेज में उत्तर-पूर्व एशियाई अध्ययन संस्थान के निदेशक द झिगांग ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से बातचीत में कहा- ‘दक्षिण कोरिया ने यह दिखाया है कि वह चीन के साथ परस्पर विश्वास और स्थिर सहयोग का रिश्ता बनाए रखना चाहता है। उसने औद्योगिक और सप्लाई चेन के मामले में अमेरिकी दबाव के बावजूद ये इच्छा दिखाई है।’ लेकिन उन्होंने आगाह किया कि इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि दक्षिण कोरिया अमेरिका के चिप एलायंस में शामिल नहीं होगा।

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अमेरिकी सरकार ने चिप-4 नाम से एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत उसने जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान के साथ सेमीकंडक्टर उद्योग का एलायंस बनाने का इरादा जताया है। इस पहल में शामिल देश सप्लाई चेन मैनेजमेंट, अनुसंधान एवं विकास, सब्सिडी और कारोबार के दूसरे मामलों में सहयोग करेंगे। आम समझ है कि ये पहल चीन को सेमीकंडक्टर क्षेत्र की नई तकनीक से अलग रखने के लिए की गई है।

एशिया टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 2021 में दक्षिण कोरिया से हुए सेमीकंडक्टर निर्यात का 40 फीसदी हिस्सा चीन गया था। दक्षिण करियाई कंपनी सैमसंग का एक प्रमुख चिप प्लांट चीन के शहर शियान में है। उसे फ्लैश मेमरी उत्पादन का दुनिया का सबसे बड़ा संयंत्र बताया जाता है। इसी तरह एसके हायनिक्स कंपनी का डीरैम प्लांट चीन के शहर वुक्सी में है। उसने डालियान स्थित इंटेल कंपनी के नैंड प्लैश ऑपरेशन प्लांट को भी खरीद लिया है। दक्षिण कोरियाई कंपनियां दूसरे देशों के अपने निर्यात के लिए चीन में बनने वाले पुर्जों पर निर्भर हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक दक्षिण कोरिया चीन से संबंध तोड़ कर अपनी कंपनियों को भारी नुकसान में नहीं डालना चाहता। इसलिए उसने बीच का रास्ता अपनाया है। उसने चिप को लेकर छिड़ रहे ट्रेड वॉर का हिस्सा बनने के बजाय अमेरिका और चीन दोनों के साथ चलने की नीति तय की है। लेकिन अब देखने की बात यह होगी कि क्या यह अमेरिका को मंजूर होता है। जानकारों के मुताबिक अगर अमेरिका ने दक्षिण कोरिया और चीन के बीच हुए करार को अपने प्रतिबंधों का उल्लंघन माना, तो दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए भारी मुश्किल खड़ी हो सकती है।

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