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अमेरिका ने धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर की पाक की आलोचना, अल्पसंख्यकों की दुर्दशा बताई
Tue, 05 May 2020 03:28 PM IST
Sneha Baluni
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 05 May 2020 03:28 PM IST
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ईशनिंदा कानून के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग
- फोटो : PTI
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अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने कहा है कि पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता गंभीर रूप से प्रतिबंधित है और उसने इस दिशा में कोई कदम न उठाने को लेकर उसकी आलोचना की।
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अंतरराष्ट्रीय संस्था ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा, 'पाकिस्तान ईशनिंदा और अहमदिया विरोधी कानूनों में व्यवस्थित परिवर्तन और धार्मिक अल्पसंख्यकों (हिंदू, ईसाई और सिख) का जबरन धर्मांतरण (मुस्लिम बनाने) के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहा है। यहां धार्मिक स्वतंत्रता गंभीर रूप से प्रतिबंधित है।'
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यूएससीआईआरएफ ने सिफारिश की है कि अमेरिकी सरकार को पाकिस्तान को 'विशेष परेशानी' वाले देश के तौर पर दोबारा नामित करना चाहिए। संस्था ने आसिया बीबी के मामले का उल्लेख करते हुए कहा, 'हाई-प्रोफाइल मामले में कई लोग बरी हुए इसके बावजूद ईशनिंदा कानून लागू है।'
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बता दें कि आसिया बीबी को ईशनिंदा कानून के तहत जेल में बंद किया गया था और उन्हें पिछले साल ही रिहा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएससीआईआरएफ को लगभग 80 व्यक्तियों के बारे में पता है जो ईशनिंदा के कारण जेल में बंद हैं, जिनमें कम से कम आधे आजीवन कारावास या मौत की सजा का सामना कर रहे हैं।
अहमदिया मुस्लिमों की दुर्दशा पर प्रकाश डालते हुए संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा, अहमदिया मुस्लिमों की आस्था को अपराध माना जाता है। इसकी वजह से उन्हें अधिकारियों और सामाजिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। अधिकारी और भीड़ दोनों उनके घरों को निशाना बनाती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में सालाना एक हजार महिलाओं का जबरन धर्मांतरण किया जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत सी लड़कियों का अपहरण किया जाता है, जबरन शादी कराई जाती है और उनके साथ दुष्कर्म होता है। आयोग दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करता है।