फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   UNGA vote for World Map Change Duniya Ka Naksha Badalne Ka UN Prastav mercator vs equal earth explainer

एक्सप्लेनर: क्या बदल जाएगा 450 साल पुराना दुनिया का नक्शा, कैसे अफ्रीकी देश के चलते भारत को मिल सकता है न्याय?

Fri, 04 Sep 2026 04:08 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 04 Sep 2026 04:08 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र में 450 साल पुराने मर्केटर मैप को बदलने का प्रस्ताव पेश हुआ है। जानिए नक्शे में अफ्रीका-भारत के वास्तविक आकार और इस नए बदलाव के वैश्विक असर को।

विज्ञापन
UNGA vote for World Map Change Duniya Ka Naksha Badalne Ka UN Prastav mercator vs equal earth explainer
दुनिया का नक्शा बदलने का यूएन में प्रस्ताव, वोटिंग आज। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) आज एक अहम प्रस्ताव पर मतदान करने वाली है। यह प्रस्ताव कितना अहम है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगर यह पारित हुआ तो आने वाले दिनों में दुनियाभर में दिखाए-पढ़ाए जाने वाले वैश्विक नक्शों में बदलाव करना जरूरी हो जाएगा और उसकी जगह नए नक्शे ले लेंगे। इतना ही नहीं मौजूदा नक्शे में दिखने वाले महाद्वीप के साथ भारत और कई देशों की स्थिति में बड़ा बदलाव हो जाएगा।
विज्ञापन


ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर वैश्विक नक्शे पर बदलाव कराने का दम रखने वाला यह प्रस्ताव क्या है, जिस पर संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग होने वाली है? इसकी जरूरत क्यों पड़ी? अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो क्या-क्या बदल सकता है? आइये जानते हैं...
विज्ञापन

पहले जानें- क्या है यूएन में आज पेश होने वाला प्रस्ताव?

संयुक्त राष्ट्र महासभा में आज पेश होने वाला प्रस्ताव वैश्विक स्तर पर दर्शाए जाने वाले मानचित्र को बदलने और सदियों पुराने 'मर्केटर प्रोजेक्शन' मैप की जगह समान-क्षेत्र दर्शाने वाले मानचित्रों को वैश्विक मानक बनाने से जुड़ा है। इस प्रस्ताव को अफ्रीकी देश टोगो की ओर से प्रायोजित किया गया है, जिसे 55-सदस्यीय अफ्रीकी संघ का समर्थन मिल चुका है। 

दरअसल, इस वक्त दुनिया में विश्व का जो मानचित्र दिखाया जाता है, वह 400 साल से भी ज्यादा पुराना है और इसे गेरहार्डस मर्केटर की ओर से दुनियाभर में व्यापार के लिए जाने वाले नाविकों की मदद के लिए बनाया गया था। यह पारंपरिक मानचित्र ध्रुवों के पास के देशों को उनके वास्तविक आकार से बहुत बड़ा और भूमध्य रेखा (इक्वेटर) के पास के क्षेत्रों को बहुत छोटा दिखाता है। 

उदाहरण के लिए मौजूदा नक्शे पर अफ्रीका और ग्रीनलैंड एक ही आकार के दिखाई देते हैं, जबकि वास्तविकता में अफ्रीका एक महाद्वीप है, जो कि ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है। ऐसा ही कई और अन्य देशों के भी साथ की स्थिति है। अफ्रीका अपने असल आकार के मुकाबले छोटा दिखाए जाने को लेकर ही नाराजगी जाहिर करता रहा है, क्योंकि इसकी वजह से पूरी दुनिया उसकी विशालता को पहचान नहीं पाती और इसे कम कर के आंकती है।  
विज्ञापन

UNGA vote for World Map Change Duniya Ka Naksha Badalne Ka UN Prastav mercator vs equal earth explainer
टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट ड्युसे। - फोटो : अमर उजाला

अब जानें- पुराने मर्केटर नक्शे में दिक्कत क्या और कितनी बड़ी है?

1569 में गेरहार्डस मर्केटर द्वारा बनाए गए पारंपरिक मानचित्र- मर्केटर प्रोजेक्शन में भौगोलिक स्तर पर कई गड़बड़ियां थीं। यह सिर्फ कुछ सीमाओं के गलत खिंचाव की बात नहीं है, बल्कि इसने दुनिया को देखने, समझने और अलग-अलग क्षेत्रों की वैश्विक स्थिति को आंकने के हमारे नजरिए को गहरे रूप से प्रभावित किया है।

1. ध्रुवों के पास के क्षेत्रों का कृत्रिम रूप से बड़ा दिखना
मर्केटर नक्शे को मूल रूप से नाविकों के सफर को आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया था, ताकि वे सीधी रेखा खींचकर अपनी दिशा तय कर सकें। लेकिन गोल पृथ्वी को सपाट कागज पर उतारने के इस तरीके के कारण, जैसे-से हम भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ते हैं, जमीन का आकार काफी ज्यादा खिंचकर बड़ा हो जाता है। 

इसका असर यह होता है कि भूमध्य रेखा के करीब स्थित क्षेत्र, जैसे- अफ्रीका, भारत, दक्षिण अमेरिका बहुत छोटे दिखाई देते हैं। वहीं, ध्रुवों के करीब वाले देश, जैसे- कनाडा, रूस, अमेरिका और यूरोप अपने वास्तविक आकार से कहीं ज्यादा बड़े दिखाई देते हैं।

UNGA vote for World Map Change Duniya Ka Naksha Badalne Ka UN Prastav mercator vs equal earth explainer
मर्केटर मानचित्र बनाम इक्वल अर्थ नक्शा। - फोटो : अमर उजाला
2. अफ्रीका की स्थिति में भारी गड़बड़ी
  • अगर पुराने मर्केटर मानचित्र और असल क्षेत्रफल की तुलना की जाए तो अफ्रीका वास्तव में तो ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है, लेकिन नक्शे पर यह सच पूरी तरह छिप जाता है और दोनों ही देश लगभग एक ही आकार के दिखने लगते हैं
  • वास्तविकता तो यह है कि अफ्रीका के अंदर पूरा अमेरिका (यूएसए), चीन, भारत, जापान, मेक्सिको और अधिकांश यूरोप के भू-भाग एक साथ समा सकते हैं, और उसके बाद भी काफी जगह बच जाएगी। 
  • इसके उलट मौजूदा प्रचलित नक्शे पर यूरोप का आकार अफ्रीका के बराबर या उससे भी बड़ा लगता है, जबकि वास्तविकता में यूरोप का कुल आकार अफ्रीका का केवल एक तिहाई ही है।

3. भारत का वास्तविक आकार भी कम दर्शाता है मर्केटर मैप

मर्केटर मैप की इस गड़बड़ी का एक बड़ा नुकसान भारत को भी उठाना पड़ता है। दरअसल, भारत का वास्तविक क्षेत्रफल लगभग 31.6 लाख वर्ग किलोमीटर है। लेकिन मर्केटर नक्शे पर भारत को अमेरिका के अलास्का से भी छोटा दिखाया जाता है, जबकि वास्तविकता में न सिर्फ अलास्का, बल्कि ग्रीनलैंड (जो कि अफ्रीका के बराबर दिखता है, भी भारत से आकार में छोटा है। अगर भारत को काल्पनिक रूप से ध्रुव के निकट रखा जाए, तो यह दिखने में ग्रीनलैंड से भी बड़ा लगने लगेगा।

इसी विकृति को रेखांकित करते हुए हाल ही में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से भारत को देखने वाले ग्रुप कैप्टन शुभंशु शुक्ला ने टिप्पणी की थी कि अंतरिक्ष से देखने पर भारत सामान्य विश्व नक्शों की तुलना में काफी बड़ा दिखाई देता है।

400 साल से काम आ रहे पुराने नक्शे को बदलने अब जरूरत क्यों?


1. अफ्रीका में उठ रहीं पुराने नक्शे के खिलाफ आवाजें
यूं तो मौजूदा मर्केटर नक्शे में भौगोलिक गड़बड़ियों की बात को पहले भी माना गया है, लेकिन बीते एक दशक और खासकर पिछले एक-दो साल में इसे बदलने को लेकर अफ्रीका की तरफ से सबसे ज्यादा आवाजें उठी हैं। टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट ड्युसे ने कहा है, नक्शा लोगों की धारणा को आकार देता है और यह प्रभावित करता है कि लोग दुनिया में महाद्वीपों और मनुष्यों के स्थान को कैसे समझते हैं। बचपन से ही स्कूली किताबों में गलत आकारों को देखने से बच्चों के दिमाग में गलत भौगोलिक धारणाएं बैठ जाती हैं। 

अफ्रीकी संघ की उपसभापति सलमा मलिका हद्दादी, छोटे दिखने का मतलब- कम अहम भी हो जाता है। एक तरह से विजुअल्स हमारी सोच तय करते हैं। जब कोई महाद्वीप या देश नक्शे पर बहुत छोटा दिखाई देता है, तो लोग अवचेतन रूप से उसे कम शक्तिशाली, कम अहमियत वाला मानने लगते हैं। 

UNGA vote for World Map Change Duniya Ka Naksha Badalne Ka UN Prastav mercator vs equal earth explainer
पुराने नक्शे की जगह लेगा नया नक्शा। - फोटो : अमर उजाला
2. 'मानचित्र वाले औपनिवेशिकवाद के अंत की जरूरत'
इतिहासकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि मर्केटर नक्शा यूरोपीय औपनिवेशिक ताकतों के हितों और पश्चिमी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का एक राजनीतिक औजार रहा है। विश्व बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री राबाह अरेज्की के मुताबिक, इस नक्शे ने अफ्रीका को बहुत छोटा दिखाकर औपनिवेशिक काल में उसे आसानी से जीतने योग्य और आज के समय में अप्रासंगिक दिखाने में मदद की। पश्चिमी देशों को बड़ा दिखाकर मनोवैज्ञानिक रूप से उपनिवेशों को मानसिक गुलामी या अधीनता में रखने का प्रयास किया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल साउथ की राजनीतिक और वैश्विक मांग भी अब यही है। अफ्रीका और भारत जैसे देश जो आज वैश्विक अर्थव्यवस्था और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, वे चाहते हैं कि वैश्विक मंचों पर उनकी अहमियत को पूरी गरिमा और सम्मान के साथ दिखाया जाए।

3. अब बेहतर और सटीक वैज्ञानिक विकल्प मौजूद 
अफ्रीकी संघ और वैज्ञानिकों का कहना है कि जब 1569 में यह नक्शा बना था, तब इसका मकसद सिर्फ महासागर और सागर में नौवहन में मदद करना था, ताकि नाविक सीधी रेखा में सफर कर सकें। लेकिन आज, हमारे पास इक्वल अर्थ जैसी आधुनिक तकनीक और प्रोजेक्शन्स हैं, जो बिना किसी राजनीतिक पूर्वाग्रह के सभी देशों के क्षेत्रफल को उनके वास्तविक अनुपात में दिखाते हैं।

अगर यूएनजीए में नक्शा बदलने का प्रस्ताव पारित हुआ तो क्या होगा?

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में नक्शा बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का यह मतलब हरगिज नहीं होगा कि अगले ही दिन या अगले कुछ हफ्तों में दुनिया में पुराने नक्शे का इस्तेमाल बंद हो जाएगा और उसकी जगह कोई नया नक्शा ले लेगा। दरअसल, यह प्रस्ताव मर्केटर नक्शे पर प्रतिबंध की मांग नहीं करता, बल्कि सिर्फ पुराने नक्शे को नए नक्शे से बदलने की वकालत करता है। यह प्रस्ताव यूएन पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होगा, फिर भी यह दुनिया को देखने और दर्शाने के तौर-तरीकों में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत कर सकता है। 

1. स्कूली शिक्षा और पाठ्यक्रमों में हो सकता है बदलाव

UNGA vote for World Map Change Duniya Ka Naksha Badalne Ka UN Prastav mercator vs equal earth explainer
नक्शे बदले तो बदल जाएगा पढ़ाने का तरीका। - फोटो : अमर उजाला
2. डिजिटल तकनीक और गूगल/एपल मैप्स में बदलाव
यह प्रस्ताव गूगल और एपल जैसी बड़ी टेक कंपनियों को डिजिटल मैपिंग प्लेटफॉर्म्स से अपनी डिफॉल्ट मानचित्र प्रणालियों को बदलने की अपील करता है। प्रस्ताव पास होने पर, टोगो सरकार अगले साल (2027) की पहली तिमाही में अपनी राजधानी लोमे में यूनेस्को अफ्रीकी संघ और गूगल जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित करेगी, ताकि इस बदलाव को तकनीकी स्तर पर लागू करने का रोडमैप तैयार किया जा सके।

3. अंतरराष्ट्रीय संगठनों की कार्यप्रणाली में आ सकता है बदलाव 
  • संयुक्त राष्ट्र के अलग-अलग निकाय, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और सरकारों से उन सभी जगहों पर इक्वल अर्थ या अन्य समान-क्षेत्रीय मानचित्रों के इस्तेमाल के लिए कहा जाएगा जहां देशों का सही पैमाना मायने रखता है।
  • विश्व बैंक जैसी संस्थाएं पहले से ही मर्केटर को हटाकर इक्वल अर्थ मैप को अपना रही हैं, और नासा-नेशनल ज्योग्राफिक भी इसका इस्तेाल कर रहे हैं। प्रस्ताव पास होने से यह प्रक्रिया और तेज होगी।
  • हालांकि यह काम आसान नहीं होगा, क्योंकि सदियों से मर्केटर नक्शा हमारे ग्राफिक्स, डिजिटल इंटरफेस और किताबों में गहराई से रच-बस चुका है। इसे बदलने के लिए सरकारों को संस्थागत जड़ता और पुराने ढांचे को बदलने के खर्चों का सामना करना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed