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रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में जुटा भारत: दोनों देशों से लगातार संपर्क; क्या है जयशंकर की पहल?
Fri, 04 Sep 2026 08:38 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, वॉर्सा।
आईएएनएस, वॉर्सा।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 04 Sep 2026 08:38 PM IST
सार
भारत रूस और यूक्रेन दोनों से लगातार संपर्क में है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत तनाव कम करने और युद्ध खत्म कराने में मददगार विचार तलाश रहा है। उन्होंने साफ कहा कि संघर्ष का समाधान व्यापार में नहीं, बल्कि बातचीत, कूटनीति और वार्ता में है। दोनों देशों ने भारतीय और पोलिश नागरिकों की समुद्री सुरक्षा पर भी चर्चा की।
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एस जयशंकर, विदेश मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत रूस और यूक्रेन, दोनों के लगातार संपर्क में है। भारत ऐसे विचार और सुझाव तलाश रहा है, जिनसे तनाव कम हो और युद्ध खत्म करने का रास्ता बने। वॉर्सा में पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने भारत की भूमिका पर बात की। एस जयशंकर ने कहा कि भारत ने दोनों पक्षों से लगातार बातचीत की है और इस मामले में आगे बढ़ने के लिए संभावित सुझावों पर चर्चा कर रहा है।
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मॉस्को और कीव में क्या बातचीत हुई?
विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि वह कुछ दिन पहले मॉस्को गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बिश्केक में तीन दिन पहले मुलाकात हुई थी। इसके बाद जयशंकर कीव गए और वहां यूक्रेनी पक्ष से बातचीत की। उन्होंने कहा कि रूस के साथ काफी विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद यूक्रेन के साथ भी बातचीत हुई। भारत का प्रयास है कि इन चर्चाओं से ऐसा रास्ता निकले, जो युद्ध को कम करने और आखिरकार रोकने में मदद करे।
युद्ध खत्म करने के लिए भारत क्या कह रहा है?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही हो सकता है। उनके मुताबिक, किसी देश का तेल, एल्युमिना, उर्वरक या धातु-खनिज खरीदना या न खरीदना युद्ध खत्म करने का रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अब पांचवें साल में है। इसे खत्म करने के लिए बातचीत, कूटनीति और समझौते की जरूरत है।
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यह भी पढ़ें: गांजा पीकर विमान उड़ाने पर गिरी गाज: एअर इंडिया ने पायलट को नौकरी से निकाला; क्या है पूरा मामला?
रूस से तेल खरीदने पर भारत का क्या कहना है?
एस जयशंकर ने कहा कि भारत की जिम्मेदारी 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा की जरूरत पूरी करना है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा स्थिति बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र की स्थिति का भी जिक्र किया। पोलैंड के विदेश मंत्री सिकोरस्की ने इस सवाल पर कहा कि पोलैंड की प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जयशंकर ने भारत के कारणों को प्रभावी तरीके से समझाया है। जयशंकर ने यह भी साफ किया कि भारत की ऊर्जा जरूरतों को मौजूदा वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियों के बीच देखना होगा और युद्ध का अंत व्यापारिक फैसलों से नहीं, बातचीत से होगा।
क्या भारत अवैध प्रवासन के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है?
वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पोलैंड की राजधानी वॉर्सा में भारत की प्रवासन नीति को पूरी तरह साफ किया है। उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में कुशल भारतीय कार्यबल का विदेशों में काम करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। भारत सरकार हमेशा वैध और कानूनी मोबिलिटी का खुलकर समर्थन करती है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत किसी भी स्थिति में अवैध या अनियमित प्रवासन को बढ़ावा नहीं देता है। अपने नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए भारत ने कई देशों के साथ कानूनी आवाजाही के लिए समझौते किए हैं।
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि दुनिया भर में भारतीय प्रतिभाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारतीय पेशेवरों का बड़ा योगदान है। यूरोप में डॉक्टर, नर्स और तकनीकी विशेषज्ञों की भारी जरूरत है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था सिर्फ वस्तुओं या पैसे के लेन-देन तक सीमित नहीं है। इसमें हुनर और कौशल का सही आदान-प्रदान भी शामिल है। भारत चाहता है कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद रहे।
विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि वह कुछ दिन पहले मॉस्को गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बिश्केक में तीन दिन पहले मुलाकात हुई थी। इसके बाद जयशंकर कीव गए और वहां यूक्रेनी पक्ष से बातचीत की। उन्होंने कहा कि रूस के साथ काफी विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद यूक्रेन के साथ भी बातचीत हुई। भारत का प्रयास है कि इन चर्चाओं से ऐसा रास्ता निकले, जो युद्ध को कम करने और आखिरकार रोकने में मदद करे।
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युद्ध खत्म करने के लिए भारत क्या कह रहा है?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही हो सकता है। उनके मुताबिक, किसी देश का तेल, एल्युमिना, उर्वरक या धातु-खनिज खरीदना या न खरीदना युद्ध खत्म करने का रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अब पांचवें साल में है। इसे खत्म करने के लिए बातचीत, कूटनीति और समझौते की जरूरत है।
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रूस से तेल खरीदने पर भारत का क्या कहना है?
एस जयशंकर ने कहा कि भारत की जिम्मेदारी 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा की जरूरत पूरी करना है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा स्थिति बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र की स्थिति का भी जिक्र किया। पोलैंड के विदेश मंत्री सिकोरस्की ने इस सवाल पर कहा कि पोलैंड की प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जयशंकर ने भारत के कारणों को प्रभावी तरीके से समझाया है। जयशंकर ने यह भी साफ किया कि भारत की ऊर्जा जरूरतों को मौजूदा वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियों के बीच देखना होगा और युद्ध का अंत व्यापारिक फैसलों से नहीं, बातचीत से होगा।
क्या भारत अवैध प्रवासन के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है?
वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पोलैंड की राजधानी वॉर्सा में भारत की प्रवासन नीति को पूरी तरह साफ किया है। उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में कुशल भारतीय कार्यबल का विदेशों में काम करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। भारत सरकार हमेशा वैध और कानूनी मोबिलिटी का खुलकर समर्थन करती है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत किसी भी स्थिति में अवैध या अनियमित प्रवासन को बढ़ावा नहीं देता है। अपने नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए भारत ने कई देशों के साथ कानूनी आवाजाही के लिए समझौते किए हैं।
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि दुनिया भर में भारतीय प्रतिभाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारतीय पेशेवरों का बड़ा योगदान है। यूरोप में डॉक्टर, नर्स और तकनीकी विशेषज्ञों की भारी जरूरत है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था सिर्फ वस्तुओं या पैसे के लेन-देन तक सीमित नहीं है। इसमें हुनर और कौशल का सही आदान-प्रदान भी शामिल है। भारत चाहता है कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद रहे।