फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Ukraine Crisis: German Chancellor Olaf Schulz arrived in Moscow and discussed with Russian President Vladimir Putin for no longer attack on Ukraine

यूक्रेन संकट: क्या अब रूस ने अपनी रणनीति बदल दी है और हमले का इरादा छोड़ दिया है?

Wed, 16 Feb 2022 04:00 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Wed, 16 Feb 2022 04:00 PM IST
सार

भारतीय विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कदाचित टकराव होता तो यह यूरोप, अमेरिका की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत जैसे विकासशील देशों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डालता। क्योंकि प्राकृतिक गैस, ईधन तेल आदि के दामों में भारी उछाल आने की प्रबल संभावना थी...

विज्ञापन
Ukraine Crisis: German Chancellor Olaf Schulz arrived in Moscow and discussed with Russian President Vladimir Putin for no longer attack on Ukraine
यूक्रेन संकट: इमैनुएल मैक्रों और व्लादिमीर पुतिन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

मंगलवार को जर्मनी के चांसलर ओलफ शूल्ज मास्को पहुंचे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से चर्चा हुई और दुनिया ने राहत की सांस ली। सभी को उम्मीद है कि रूस अब यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा। रूस ने भी यूक्रेन की सीमा पर तैनात अपनी सेना की संख्या में कटौती करने की घोषणा कर दी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के बोरिस जॉनसन ने भी राहत की सांस ली है। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि रूस ने यह कदम किस भरोसे पर उठाया है। लेकिन तमाम आशंकाओं के बीच इस नए बदलाव से पूरी दुनिया को  मंहगाई और युद्ध की स्थिति में पैदा होने वाली अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता जैसे हालात से बच जाने के आसार हैं। खासकर, भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह एक अच्छी स्थिति होगी।

विज्ञापन


इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर चर्चा की थी। विदेश मामलों के जानकारों का कहना है कि राष्ट्रपति बाइडन ने पुतिन को अपनी सभी चिंताओं और प्रतिबद्धताओं से अवगत कराया। यूक्रेन की सीमा पर तैनात रूसी सेना तथा हमले की आशंका से उठे सवालों को लेकर भी खुलकर चर्चा की। अल-जजीरा न्यूज और स्पूतनिक के मुताबिक राष्ट्रपति पुतिन ने भी बाइडन के सामने अपनी चिंताओं को रखा। पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस का यूक्रेन पर हमले का कोई इरादा नहीं है, लेकिन यूक्रेन को नाटो सदस्य देशों में शामिल करने का प्रस्ताव और प्रयास दोनों उसके लिए गंभीर चिंता का विषय है। यह रूस की सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा संवेदनशील मसला है। ऐसा समझा जा रहा है कि रूस ने भी अपनी तरफ से प्रस्ताव दिए और अमेरिका ने भी रूस के सामने कुछ स्थितियां रखीं तथा बातचीत बिना किसी निर्णायक स्थिति के समाप्त हो गई।

विज्ञापन

अमेरिका के लिए भी सिरदर्द है यूक्रेन का संकट

यूक्रेन संकट के चलते अमेरिका में मंहगाई दर बढ़कर 7.5 फीसदी तक पहुंच गई और नए मंडराते संकट ने महाशक्ति को चिंतित कर दिया था। अमेरिकी शेयर बाजार भी सोमवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ था। रूस के राष्ट्रपति पुतिन की सभी सुविधाओं वाली नौका जर्मनी में मरम्मत के लिए गई थी और बिना पूरी मरम्मत के समय से पहले ही रूस के लिए रवाना हो गई। दोनों संदेश दुनिया में आग की तरह फैले। यह यूक्रेन पर रूस के हमले और जवाब में अमेरिका की अगुआई में पश्चिमी देशों की रूस पर कार्रवाई की आशंका पैदा कर रहा था। हालांकि अंतरराष्ट्रीय सामरिक विशेषज्ञों को भी दोनों महाशक्तियों के टकराने पर संदेह था।

विज्ञापन
विज्ञापन


भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर वाइस मार्शल एन बी सिंह कहते हैं कि अमेरिका, रूस दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। फ्रांस, ब्रिटेन के पास भी परमाणु हथियार हैं। इसलिए रूस की कार्रवाई और जवाबी कार्रवाई दोनों ही बहुत आसान नहीं रहने वाली थी। इसमें कई देशों पर सीधा गंभीर असर पड़ता। इस टकराव की आंच में यूरोप के देश आ जाते। भारतीय विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कदाचित टकराव होता तो यह यूरोप, अमेरिका की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत जैसे विकासशील देशों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डालता। क्योंकि प्राकृतिक गैस, ईधन तेल आदि के दामों में भारी उछाल आने की प्रबल संभावना थी। वाशिंगटन से नीलेश सिंह ने बताया कि अमेरिका और यहां के बाजारों में रूस के साथ बढ़ने वाले टकराव की संभावना महसूस की जाने लगी थी, लेकिन मंगलवार की सुबह अच्छी खबर लेकर आई है।

अभी चलेगा कूटनीति का दौर

अभी रूस ने यूक्रेन सीमा पर तैनात अपनी सेना की संख्या में कटौती करने की घोषणा की है, लेकिन इसका मतलब खतरा टल जाना भी नहीं है। अभी रूस और पश्चिमी देशों में कूटनीतिक वार्ता का दौर चलेगा। रूस चाहता है कि यूक्रेन को नाटो देशों में शामिल न किया जाए। इसके अलावा उसके आसपास के देशों को भी नाटो के प्रभाव से मुक्त रखा जाए। रूस इसे अपनी सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता मानता है। नाटो प्रमुख जेंस स्टोलेबर्ग ने भी कूटनीति के लिहाज से रूस के कदम को सकारात्मक बताया है। अमेरिका के रक्षामंत्री ऑस्टिन लॉयड बेल्जियम की यात्रा पर हैं। ऑस्टिन की यात्रा का मकसद नाटो के सदस्य देश पोलैंड, लिथुआनिया से चर्चा है। इसी तरह से रूस के विदेशमंत्री सर्गेई लावरोव भी कूटनीतिक रास्ते तलाशने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे थे। ऐसे में माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर के शिखर नेता अब समस्या के समाधान की तरफ अपने प्रयासों को तेज करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed