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UK: ब्रिटेन के लिए छात्र वीजा पर सख्त नियमों का दिखा असर, विद्यार्थियों के साथ आने वाले आश्रितों की संख्या घटी

Wed, 01 May 2024 05:20 PM IST
मिथिलेश नौटियाल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Wed, 01 May 2024 05:20 PM IST
सार

UK: इस साल जनवरी से लेकर मार्च के महीने में छात्रों के साथ ब्रिटेन आने वाले आश्रितों की संख्या में 80 प्रतिशत तक गिरावट देखने को मिली है। यूके सरकार ने कहा है कि सख्त नियमों की वजह से यह संभव हो पाया।

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UK claims drastic drop in student dependents after visa crackdown
ब्रिटेन के गृह सचिव जेम्स क्लेवरली - फोटो : ANI

विस्तार

ब्रिटेन में छात्र वीजा को लेकर इस साल सख्त नियम जारी किए गए हैं। ऐसे में अब विदेशी छात्रों के साथ जाने वाले आश्रितों की संख्या में महत्वपूर्ण गिरावट देखने को मिली है, जिसका यूके सरकार ने स्वागत किया है। ब्रिटेन के गृह विभाग का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस साल जनवरी से लेकर मार्च के महीने में छात्रों के साथ आने वाले आश्रितों की संख्या में 80 प्रतिशत तक गिरावट देखने को मिली है। इसके अलावा दुनियाभर से 26,000 से कम छात्रों ने वीजा के लिए आवेदन किया है। बीते कुछ वर्षों में वीजा आवेदन के मामले में भारतीय छात्र अगृणी रहे हैं लेकन इस बार के आंकड़े कुछ अलग कहानी बयां कर रहे हैं। वीजा आवेदन में गिरावट का मतलब है कि इस बार कम भारतीय छात्रों ने यूके के विश्वविद्यालयों को चुना है। 

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‘छात्र वीजा को लेकर खत्म हुआ ‘बैकडोर’ सिस्टम’
जनवरी से प्रभावी नियमों के तहत रिसर्च कोर्स करने वाले छात्रों को छोड़कर अधिकांश छात्र अपने परिवार के सदस्यों को स्टूडेंट वीजा पर साथ नहीं ला सकते। इसके अलावा वे अपना कोर्स पूरा करने से पहले वीजा नहीं बदल सकते। इस बारे में यूके सरकार का दावा है कि पहले बाहर से आने वाले छात्रों को बैकडोर से वीजा मिल जाते थे, जिनका जमकर दुरुपयोग किया गया। सरकार का दावा है कि ‘शिक्षा की जगह अप्रवासन’ बेचने वाले ऐसे  संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की गई है। 
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अप्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही थी- जेम्स क्लेवरली
इस मामले में ब्रिटन के गृह सचिव जेम्स क्लेवरली का कहना है कि छात्र वीजा की वजह से देश में अप्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही थी और इससे ब्रिटिश लोगों का सरकार से विश्वास उठ रहा था। दरअसल बढ़ती जनसंख्या की वजह से देश की सार्वजनिक सेवाओं पर बोझ पड़ रहा था और लोगों को उनकी मेहनत के मुताबिक वेतन नहीं मिल रहा था। जेम्स क्लेवरली ने कहा कि इसके बाद उनके कार्यालय द्वारा छात्र वीजा के संबंध में आंकड़े जारी किए गए। उन्होंने आगे कहा कि उनके द्वारा कानूनी प्रवासन में अब तक की सबसे बड़ी कटौती करने का वादा किया गया था। इस संबंध में बिना समय गंवाए कार्रवाई शुरू की गई। क्लेवरली ने कहा कि कार्रवाई का असर दिखा और अप्रवासियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि आश्रितों की संख्या में कटौती के लिए आवश्यक कार्रवाई क्यों की गई।
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ब्रिटेन के गृह विभाग के आंकड़े
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2019 से 2023 के बीच छात्र वीजा पाने वाले भारतीयों की संख्या में 85,849 की वृद्धि हुई थी। यह अब तक का उच्चतम आंकड़ा था। 2023 में भारत के 1,20,110 छात्रों को वीजा प्रदान किया गया, जो कि 2022 की तुलना में 14 प्रतिशत कम था। 2024 में जनवरी से लेकर मार्च महीने के बीच छात्रों के साथ आने वाले आश्रितों की संख्या में 80 प्रतिशत तक गिरावट देखने को मिली है। जेम्स क्लेवरली ने कहा है कि कड़े वीजा मानदडों की वजह से यह गिरावट देखने को मिली है।

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