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चीन में उइगर मुसलमानों के नरसंहार के विरोध में बोलना जारी रखेगा अमेरिका: विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन

वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाला, वॉशिंगटन Published by: प्रियंका तिवारी Updated Thu, 11 Mar 2021 12:50 PM IST
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन - फोटो : ANI
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि शिनजियांग प्रांत में उईगुर मुसलमानों के खिलाफ चीन के नरसंहार पर अमेरिका जोर-शोर से आवाज उठाता रहेगा। बता दें चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के प्रति ज्यादती की कई रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं।
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इन रिपोर्ट्स में यह खुलासा किया गया है कि चीन उइगर मुसलमानों को यातना देता है। साथ ही यह दावा भी किया गया है कि चीन पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी अपनी यातनाओं का शिकार बनाता आ रहा है। अब उइगर्स के प्रति चीनी नीति को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि चीन सुनियोजित तरीके से उइगर्स की पहचान को खत्म करने में जुटा है।


गौरतलब है कि राष्ट्रपति जो बाइडन के पदभार संभालने के बाद अगले सप्ताह शीर्ष अमेरिकी और चीनी अधिकारियों की रूबरू होने वाली पहली बैठक के पहले कई सांसदों ने चीन में मानवाधिकार की बदतर स्थिति को लेकर चिंता प्रकट की है।

व्हाइट हाउस और विदेश विभाग ने बुधवार को कहा कि ब्लिंकन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवान चीन की विदेश नीति विभाग के शीर्ष अधिकारियों, चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश मामलों के प्रमुख यांग जेइची और स्टेट काउंसलर व विदेश मंत्री वांग यी के साथ 18 मार्च को अलास्का के ऐंकरेज में वार्ता करेंगे।

संसद में विदश मामलों की समिति के सदस्यों को ब्लिंकन ने बताया कि चीन के मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों पर अमेरिका बोलना जारी रखेगा। उन्होंने कहा, ‘इस मामले में हमारा रुख स्पष्ट है और हम इसे नरसंहार, मानवाधिकारों के उल्लंघन के तौर पर देखते हैं और हम इसके खिलाफ आवाज उठाना जारी रखेंगे।’

असल में संसद सत्र के दौरान अमेरिकी सांसद माइकल मैककॉल ने ब्लिंकन से पूछा था कि बाइडन प्रशासन इस नरसंहार को रोकने के लिए क्या अतिरक्त कदम उठा रहा है।

इस पर जवाब देते हुए ब्लिंकन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हम कई चीजें कर सकते हैं और ऐसा करेंगे भी। सबसे महत्वपूर्ण है कि इस बारे में बोलना जारी रखें और सुनिश्चित करना होगा कि दूसरे देश भी आवाज उठाएं। चीन सिर्फ हमारी आवाज पर ध्यान नहीं देगा जब तक कि दुनिया भर से आवाज ना उठे। इसके बाद ही बदलाव की गुंजाइश पैदा होगी।’

उन्होंने कहा, ‘हम कई तरह के कदम उठा सकते हैं। इसके तहत नरसंहार, मानवाधिकार के उल्लंघन के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाए, पाबंदी लगाई जाए और वीजा पर भी प्रतिबंध लगाने के विकल्प भी हैं। मुझे लगता है कि अगर चीन दावा करता है कि कुछ नहीं हुआ है तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र को वहां जाने का मौका देना होगा। अगर कुछ छिपाने के लिए नहीं है तो हमें, दुनिया को दिखाएं।’
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