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उपलब्धि: गेहूं के एक फूल से पैदा किए तीन दाने, उपज में तीन गुना बढ़ोतरी होने से किसानों की बढ़ेगी आय
Sat, 25 Oct 2025 08:17 AM IST
लव गौर
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: लव गौर
Updated Sat, 25 Oct 2025 08:17 AM IST
सार
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने गेहूं की पैदावार बढ़ाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे जीन की पहचान की है जो गेहूं के एक फूल में सामान्य एक की जगह तीन अंडाशय विकसित करता है यानी एक फूल से तीन दाने।
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गेहूं की पैदावार बढ़ाने में बड़ी उपलब्धि
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
दुनिया की बढ़ती आबादी और घटती कृषि भूमि के बीच अमेरिकी वैज्ञानिकों ने गेहूं की पैदावार बढ़ाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे जीन की पहचान की है जो गेहूं के एक फूल में सामान्य एक की जगह तीन अंडाशय विकसित करता है यानी एक फूल से तीन दाने। यह खोज भविष्य की खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से जूझती खेती और किसानों की आय तीनों के लिए एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम मानी जा रही है।
वैज्ञानिकों ने गेहूं की एक दुर्लभ प्रजाति में यह देखा कि उसके हर फूल में सामान्य एक अंडाशय की जगह तीन अंडाशय विकसित हो रहे हैं। डीएनए विश्लेषण में पाया गया कि इस प्रजाति में वुशेल-डी1 नामक जीन सक्रिय रहता है, जबकि आम गेहूं में यह जीन निष्क्रिय होता है। यह जीन फूल बनने की शुरुआती अवस्था में फूल ऊतक (फ्लोरल टिश्यू) को अधिक बढ़ने का संकेत देता है, जिससे अतिरिक्त अंडाशय बनते हैं। परिणामस्वरूप एक फूल से तीन दाने बनने लगते हैं। यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पनास) पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
खाद्य आत्मनिर्भरता को मिलेगी मजबूती
भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है, उसके लिए यह खोज अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है। देश में प्रति व्यक्ति भूमि घट रही है और सिंचाई जल की उपलब्धता सीमित होती जा रही है। ऐसी स्थिति में यदि वुशेल-डी1 जीन को भारतीय गेहूं किस्मों में सफलतापूर्वक जोड़ा जाता है तो प्रति हेक्टेयर उपज में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
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किसानों की आमदनी बढ़ेगी और खाद्य आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिलेगी। भारतीय कृषि वैज्ञानिक पहले ही उच्च उत्पादकता वाली हाइब्रिड गेहूं किस्मों पर काम कर रहे हैं। इस खोज के साथ भारत कम संसाधनों में अधिक उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज कृषि विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। एक फूल से तीन दाने की यह संभावना केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाले दशक में खेतों की वास्तविकता बन सकती है। यदि यह तकनीक सुरक्षित रूप से खेतों तक पहुंची, तो दुनिया के सामने हरित क्रांति द्वितीय चरण की शुरुआत होगी, जहां जीन विज्ञान और जलवायु अनुकूल कृषि मिलकर भविष्य की खाद्य सुरक्षा की नई नींव रखेंगे।
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वैज्ञानिकों ने गेहूं की एक दुर्लभ प्रजाति में यह देखा कि उसके हर फूल में सामान्य एक अंडाशय की जगह तीन अंडाशय विकसित हो रहे हैं। डीएनए विश्लेषण में पाया गया कि इस प्रजाति में वुशेल-डी1 नामक जीन सक्रिय रहता है, जबकि आम गेहूं में यह जीन निष्क्रिय होता है। यह जीन फूल बनने की शुरुआती अवस्था में फूल ऊतक (फ्लोरल टिश्यू) को अधिक बढ़ने का संकेत देता है, जिससे अतिरिक्त अंडाशय बनते हैं। परिणामस्वरूप एक फूल से तीन दाने बनने लगते हैं। यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पनास) पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
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खाद्य आत्मनिर्भरता को मिलेगी मजबूती
भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है, उसके लिए यह खोज अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है। देश में प्रति व्यक्ति भूमि घट रही है और सिंचाई जल की उपलब्धता सीमित होती जा रही है। ऐसी स्थिति में यदि वुशेल-डी1 जीन को भारतीय गेहूं किस्मों में सफलतापूर्वक जोड़ा जाता है तो प्रति हेक्टेयर उपज में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
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किसानों की आमदनी बढ़ेगी और खाद्य आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिलेगी। भारतीय कृषि वैज्ञानिक पहले ही उच्च उत्पादकता वाली हाइब्रिड गेहूं किस्मों पर काम कर रहे हैं। इस खोज के साथ भारत कम संसाधनों में अधिक उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज कृषि विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। एक फूल से तीन दाने की यह संभावना केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाले दशक में खेतों की वास्तविकता बन सकती है। यदि यह तकनीक सुरक्षित रूप से खेतों तक पहुंची, तो दुनिया के सामने हरित क्रांति द्वितीय चरण की शुरुआत होगी, जहां जीन विज्ञान और जलवायु अनुकूल कृषि मिलकर भविष्य की खाद्य सुरक्षा की नई नींव रखेंगे।