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UNGA: 'पाकिस्तान बना वैश्विक आतंकवाद का अड्डा’; ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर जयशंकर ने खोली पड़ोसी की पोल

Sat, 27 Sep 2025 11:57 PM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 27 Sep 2025 11:57 PM IST
सार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की बैठक में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर हमला बोला और वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत के रुख को पेश किया। उन्होंने पहलगाम हमला, आतंकवादियों के वित्तपोषण और उनके सार्वजनिक महिमामंडन की निंदा की। 

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Terrorist bases operating on an industrial scale in Pakistan, Jaishankar exposes in UNGA
यूएनजीए में जयशंकर ने पाकिस्तान की खोली पोल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र की आम बहस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार किया और उसे वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बताया। यूएनजीए में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन की शुरूआत 'भारत की जनता की ओर से नमस्कार' कहकर की। आगे उन्होंने कहा कि भारत ने आजादी के बाद से ही आतंकवाद की चुनौती का सामना किया है, क्योंकि उसका एक पड़ोसी देश आतंकवाद का गढ़ है। इस दौरान बिना नाम लिए उन्होंने कहा कि दशकों से दुनिया में हुए बड़े आतंकवादी हमलों की जड़ें उसी एक देश से जुड़ी रही हैं।  

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अपने संबोधन के दौरान एस जयशंकर ने कहा कि भारत स्वतंत्रता के बाद से ही आतंकवाद की चुनौती का सामना कर रहा है। हमारा पड़ोसी दशकों से वैश्विक आतंकवाद का केंद्र रहा है। सीमा पार बर्बरता का सबसे ताजा उदाहरण इस वर्ष अप्रैल में पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या थी। जो लोग आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों का समर्थन करते हैं, उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में औद्योगिक स्तर पर आतंकवादी ठिकाने संचालित हो रहे हैं और आतंकियों को सार्वजनिक रूप से महिमामंडित किया जाता है। आतंकवाद के वित्तीय संसाधनों को पूरी तरह से बंद करना जरूरी है।

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जयशंकर ने पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बताया
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 80वें संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए इसे वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कारण दशकों से अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हमलों की श्रृंखला जारी रही है और संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादियों की सूची में इसके कई नागरिक शामिल हैं। जयशंकर ने इस वर्ष अप्रैल में पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या को हालिया उदाहरण के रूप में पेश किया।
 

 

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भारत स्वतंत्रता के बाद से ही आतंकवाद से लड़ रहा
उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है, क्योंकि यह घृणा, हिंसा, असहिष्णुता और भय का मिश्रण है। उन्होंने कहा कि जब कोई राष्ट्र आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में अपनाता है, आतंकवादी केंद्र औद्योगिक स्तर पर संचालित होते हैं और आतंकियों को सार्वजनिक रूप से महिमामंडित किया जाता है, तो ऐसे कार्यों की कड़ी निंदा होनी चाहिए।

 

जो आतंकवाद का समर्थन करेगा, उसे भुगतना होगा परिणाम
विदेश मंत्री ने आतंकवाद के वित्तपोषण को पूरी तरह बंद करने, प्रमुख आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने और पूरे आतंकवादी तंत्र पर लगातार दबाव बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश या संस्था आतंक को बढ़ावा देने वाले देशों का समर्थन करेंगे, उन्हें इसका नकारात्मक परिणाम भुगतना पड़ेगा। जयशंकर का यह भाषण भारत की आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और वैश्विक सुरक्षा में सक्रिय भूमिका को स्पष्ट करता है। 
 

तीन प्रमुख अवधारणाओं से आगे बढ़ रहे
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत समकालीन विश्व के साथ तीन प्रमुख अवधारणाओं- आत्मनिर्भरता, आत्मरक्षा और आत्मविश्वास के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, हम देश और विदेश में अपने लोगों की रक्षा और उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसका अर्थ है आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता, अपनी सीमाओं की मजबूत सुरक्षा, विदेश में साझेदारियां बनाना और विदेश में अपने समुदाय की सहायता करना।

सुरक्षा परिषद का विस्तार जरूरी
विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी सदस्यता विस्तार और परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संकट की स्थिति में है। संघर्षों से जब शांति को खतरा पैदा होता है, संसाधनों की कमी के कारण विकास बाधित होता है और आतंकवाद के कारण मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है तब भी संयुक्त राष्ट्र चुप्पी साधे रहता है। उन्होंने कहा कि आम सहमति बनाने में संयुक्त राष्ट्र के सामर्थ्य के घटने से बहुपक्षवाद में विश्वास भी कम होता है।

टैरिफ का मुद्दा भी उठाया
जयशंकर ने टैरिफ के कारण दुनिया भर में फैली अस्थिरता और अनिश्चितत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भारत टैरिफ अस्थिरता और अनिश्चित बाजार पहुंच देख रहा है। ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, खासकर 2022 के बाद से, संघर्ष और व्यवधानों की पहली शिकार रही हैं। बेहतर स्थिति वाले समाज ने पहले पहल करके खुद को सुरक्षित रखा। संसाधनों की कमी से जूझ रहे समाज ने जिंदा रहने के लिए संघर्ष किया, और उसके बाद उन्हें पाखंडी भाषण सुनने पड़े हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को व्यापार का हथियार बना लिया है और भारत समेत विभिन्न देशों पर भार-भरकम टैरिफ लगाया है।

यूक्रेन, गाजा में शत्रुता खत्म करने का आह्वान
जयशंकर ने कहा कि हममें से प्रत्येक के पास शांति और समृद्धि में योगदान देने का अवसर है। संघर्षों के मामले में, विशेष रूप से यूक्रेन और गाजा में, यहां तक कि उन लोगों ने भी इसका प्रभाव महसूस किया है जो सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं थे। जो राष्ट्र सभी पक्षों को शामिल कर सकते हैं, उन्हें समाधानों की तलाश में आगे आना चाहिए। भारत शत्रुता समाप्त करने का आह्वान करता है और शांति बहाल करने में मदद करने वाली किसी भी पहल का समर्थन करेगा।
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