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Sri Lanka: राजनीतिक स्थिरता लाने की कोशिशें नाकाम, सहयोग के बजाय विपक्ष की दिलचस्पी आंदोलन में
Fri, 19 Aug 2022 02:08 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Fri, 19 Aug 2022 02:08 PM IST
सार
श्रीलंका की मुख्य विपक्षी पार्टी समगी जना बलाबेगया (एसजेपी) ने अब साफ कहा है कि वह प्रस्तावित सर्वदलीय सरकार में कोई पद स्वीकार नहीं करेगी। पार्टी के नेता सजित प्रेमदासा ने कहा है कि सर्वदलीय सरकार बनने से देश में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ नहीं होगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
श्रीलंका में राजनीतिक स्थिरता लाने की राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की कोशिश फिलहाल कामयाब होती नहीं दिख रही है। विक्रमसिंघे सर्वदलीय सरकार बना कर यह संदेश देना चाहते हैं कि श्रीलंका को आर्थिक संकट से निकालने और उसके लिए अपनाए जाने वाले उपायों को लेकर देश में राजनीतिक आम सहमति है। लेकिन विपक्षी पार्टियां सर्वदलीय सरकार में शामिल होने की उनकी पेशकश को मंजूर करेंगी, ऐसा कोई संकेत नहीं है। उलटे कुछ वामपंथी सांसदों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की शर्तों के खिलाफ देश में अपनी मुहिम तेज कर दी है।
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श्रीलंका की मुख्य विपक्षी पार्टी समगी जना बलाबेगया (एसजेपी) ने अब साफ कहा है कि वह प्रस्तावित सर्वदलीय सरकार में कोई पद स्वीकार नहीं करेगी। पार्टी के नेता सजित प्रेमदासा ने कहा है कि सर्वदलीय सरकार बनने से देश में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ नहीं होगा। जबकि जरूरत पूरे सिस्टम को बदलने की है। प्रेमदासा ने कहा है- ‘हम मंत्री पद स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि ऐसा करने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा। बल्कि उससे सिर्फ सीटें बदलेंगी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।’
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प्रेमदासा ने कहा है कि अगर राष्ट्रपति उनकी पार्टी का सहयोग चाहते हैं, तो इसे उपलब्ध कराने के लिए वे तैयार हैं। लेकिन एसजेबी ऐसा संसदीय समितियों में शामिल होकर करना चाहती है। वहां से सहयोग करके भी वह राष्ट्र के साथ खड़ी दिखेगी। प्रेमदासा ने कहा- ‘अगर मुझे अमेरिका के राष्ट्रपति या ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भी आमंत्रित करें, तब भी मैं कोई पद स्वीकार नहीं करुंगा। बल्कि मैं अपने राष्ट्र, अपने देश के साथ खड़ा दिखना चाहूंगा।’
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प्रेमदासा ने ये बातें उस कार्यक्रम में कहीं, जिन्हें देश में चार महीने से ज्यादा चले अरागयला (जन संघर्ष) में शामिल रहीं महिला कार्यकर्ताओं ने आयोजित किया था। उस कार्यक्रम में श्रीलंका के आर्थिक संकट और महिलाओ पर हुए उसके असर विस्तार से चर्चा हुई। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अब ऐसा लगता है कि अरागयला से जुड़े रहे समूह विपक्ष के साथ मिल कर अपनी मुहिम आगे बढ़ाने की रणनीति अपना रहे हैं। जुलाई में जब अरागलया से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति निवास पर हमला बोला था, तो उस समय एक भीड़ ने प्रेमदासा के साथ भी बदसलूकी की थी। लेकिन अब महिला कार्यकर्ताओं ने प्रेमदासा को अपने कार्यक्रम की अध्यक्षता करने के लिए आमंत्रित किया।
इस कार्यक्रम में अरागयला से जुड़े रहे देश भर के कई समूहों के प्रतिनिधि आए। उनमें बधिर समुदाय, वकील, और सरकारी कर्मचारियों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। एसजेबी ने इन कार्यकर्ताओं की मांगों को उठाने का संकल्प जताया है। पार्टी प्रवक्ता ने बुधवार को कहा कि सरकार को महिला कार्यकर्ताओं की मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पार्टी ने 22 जुलाई को प्रतिरोध स्थलों पर पड़े छापों के दौरान घायल हुए कार्यकर्ताओं के लिए इंसाफ की मांग भी सरकार के सामने रखी है।
महिला संगठनों की एक प्रमुख मांग यह है कि देश में सभी महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन मुफ्त में दिए जाएं। प्रेमदासा ने कहा कि उन्होंने 2019 में ही ये मांग संसद में उठाई थी। लेकिन तब उनका मजाक उड़ाया गया था। सरकार ने उस पर ध्यान नहीं दिया। अब उनकी पार्टी फिर से इस मांग पर जोर डालेगी।